संदर्भ
भारत सरकार ने गुजरात में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC)-आधारित डिजिटल फूड करेंसी पायलट परियोजना शुरू की है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली एक सरकारी खाद्य सुरक्षा तंत्र है, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के अंतर्गत पात्र परिवारों को रियायती दरों पर खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुएँ वितरित करता है।
- नोडल मंत्रालय: उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय (खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग), भारत सरकार।
उचित मूल्य की दुकानें (FPS)
- ये सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत खुदरा दुकानें हैं, जो पात्र लाभार्थियों को चावल, गेहूँ और चीनी जैसी आवश्यक वस्तुएँ रियायती दरों पर वितरित करती हैं।
सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC)
- CBDC किसी देश की संप्रभु मुद्रा का डिजिटल रूप है, जिसे उसके केंद्रीय बैंक द्वारा जारी और विनियमित किया जाता है, और यह भौतिक नकद की तरह ही वैध मुद्रा के रूप में कार्य करती है। भारत में इसे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किया जाता है और इसे ई-रुपया (डिजिटल रुपया) भी कहा जाता है।
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संबंधित तथ्य
- यह पहल पात्र लाभार्थियों को मिलने वाले अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी, पहुँच को सरल बनाएगी और रियायती खाद्यान्न की आपूर्ति में जवाबदेही को मजबूत करेगी।
CBDC-आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के बारे में
- मुख्य सहयोग: उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक, गुजरात सरकार।
- डिजिटल कूपन का निर्गमन: CBDC ढाँचे के अंतर्गत, भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से उत्पन्न डिजिटल कूपन, लाभार्थियों के खातों में प्रोग्रामेबल डिजिटल मुद्रा (e₹) के रूप में सीधे जमा किए जाएँगे।
- लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में प्रोग्रामेबल डिजिटल रुपया जमा होगा, जिससे क्यूआर कोड-आधारित या कूपन कोड-आधारित लेन-देन संभव होगा।
- उचित मूल्य की दुकानों की भूमिका: लाभार्थी अपने पात्र खाद्यान्न की मात्रा को उचित मूल्य दुकानों (FPS) पर CBDC कूपन या वाउचर कोड का उपयोग करके प्राप्त कर सकेंगे।
मुख्य पहलें: भारत की खाद्य सुरक्षा प्रणाली का डिजिटल रूपांतरण
- राशन कार्ड का एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण और ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ (ONORC) ढाँचे के अंतर्गत देशव्यापी पोर्टेबिलिटी।
- आधार-सक्षम प्रमाणीकरण और रियल-टाइम लेन-देन रिकॉर्ड के लिए e-POS उपकरणों की तैनाती।
- राइटफुल टार्गेटिंग डैशबोर्ड के माध्यम से डेटा-आधारित सत्यापन का कार्यान्वयन।
- ‘अन्न चक्र’ के माध्यम से डिजिटल आपूर्ति-शृंखला अनुकूलन और ‘अन्न सहायता’ जैसी शिकायत निवारण प्रणालियों को सुदृढ़ करना।
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महत्त्व
- ई-गवर्नेंस: यह प्रणाली बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और e-POS संचालन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करेगी तथा सुरक्षित, ट्रेसेबल और रियल-टाइम लेन-देन सुनिश्चित करेगी।
- डिजिटल इंडिया का विस्तार: यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली में डिजिटल इंडिया विजन का एक महत्त्वपूर्ण विस्तार दर्शाती है।
- सुशासन को बढ़ावा: यह ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ की सरकार की परिकल्पना को और सुदृढ़ करेगा, जिससे लाभार्थियों को अधिक पारदर्शिता और अधिकारों की जागरूकता के साथ उनका हक मिलेगा।
- FPS डीलरों के लाभ: उचित मूल्य दुकान के डीलरों को भी उनका मार्जिन रियल-टाइम आधार पर प्राप्त होगा, जिससे एक पारस्परिक रूप से लाभकारी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होगा।