संदर्भ
वित्त वर्ष 2025–26 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी द्वितीय अग्रिम अनुमानों के अनुसार 7.6% पर संशोधित किया गया है।
संबंधित तथ्य
- यह संशोधन वित्त वर्ष 2022–23 को आधार वर्ष मानकर तैयार की गई नई GDP शृंखला पर आधारित है।
- इस परिवर्तन का प्रभाव राजकोषीय घाटा-से-GDP अनुपात तथा ऋण-से-GDP अनुपात जैसे प्रमुख राजकोषीय संकेतकों पर पड़ता है, जो नीतिगत नियोजन एवं राजकोषीय समेकन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
प्रमुख बिंदु
- नाममात्र GDP में संशोधन: नई GDP शृंखला के अंतर्गत वित्त वर्ष 2023–24 से 2025–26 की अवधि के लिए भारत की नाममात्र GDP (अर्थव्यवस्था का आकार) को नीचे की ओर संशोधित किया गया है।
- राजकोषीय संकेतकों पर प्रभाव: GDP को डिनोमीनेटर (Denominator) के रूप में उपयोग करने वाले प्रमुख राजकोषीय संकेतकों पर निम्न आधार (Lower base) का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
- राजकोषीय घाटा निहितार्थ: यदि राजकोषीय घाटे की वास्तविक राशि अपरिवर्तित रहती है, तब भी GDP का आधार कम होने से राजकोषीय घाटा-से-GDP अनुपात बढ़ जाएगा।
- ऋण-से-GDP निहितार्थ: इसी प्रकार, GDP का आधार कम होने से ऋण-से-GDP अनुपात भी बढ़ेगा।
क्षेत्रवार वृद्धि – वित्त वर्ष 2025–26
प्राथमिक क्षेत्र (कृषि एवं खनन)
- अपेक्षित वृद्धि: 2.8% (2024–25 के 5% से मंदी)
- कृषि: 2.5%
- खनन एवं उत्खनन: 5%
- कारण: कृषि एवं संसाधन दोहन में अपेक्षाकृत कम वृद्धि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा प्राथमिक क्षेत्र का समग्र योगदान कमजोर पड़ा है।
द्वितीयक क्षेत्र (उद्योग एवं विनिर्माण)
- अपेक्षित वृद्धि: 9.5% (7.3% से वृद्धि)
- विनिर्माण: 12.5% (मुख्य प्रेरक)
- निर्माण (Construction): 6.9%
- कारण: औद्योगिक पुनरुत्थान तथा विनिर्माण क्षेत्र में तेजी, जो “मेक इन इंडिया” पहल के लिए महत्त्वपूर्ण है।
तृतीयक क्षेत्र (सेवाएँ)
- अपेक्षित वृद्धि: 8.9% (8.3% से वृद्धि)
- व्यापार, होटल, परिवहन एवं संचार: 10.3%
- वित्तीय, रियल एस्टेट, आईटी एवं व्यावसायिक सेवाएँ: 10%।
- कारण: व्यापार, होटल, परिवहन एवं संचार समूह (10.3%) तथा वित्तीय, रियल एस्टेट, आईटी और व्यावसायिक सेवाओं के समूह (10%) में दो-अंकीय वृद्धि के कारण सेवा क्षेत्र में मजबूती आई है।
GDP के अग्रिम अनुमान (Advance Estimates) क्या हैं?
- अग्रिम अनुमान चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पूर्व जारी किए जाने वाले GDP वृद्धि के आधिकारिक आकलन (प्रक्षेपण) होते हैं।
- प्रथम अग्रिम अनुमान: जनवरी
- द्वितीय अग्रिम अनुमान: फरवरी
- अनंतिम (Provisional) अनुमान: मई
- संशोधित (Revised) अनुमान: आगामी दो वर्षों में क्रमशः जारी।
- नोडल मंत्रालय: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI)।
- अग्रिम अनुमान किन आधारों पर तैयार किए जाते हैं?
- कृषि उत्पादन के अनुमान
- औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP)
- कॉरपोरेट वित्तीय परिणाम
- GST संग्रह
- सरकारी व्यय के आँकड़े
- व्यापार संबंधी सांख्यिकी।
- GDP के अग्रिम अनुमानों का महत्त्व
- केंद्रीय बजट निर्माण का आधार: ये केंद्रीय बजट की तैयारी में प्रयुक्त आधिकारिक वृद्धि प्रक्षेपण प्रदान करते हैं।
- राजकोषीय घाटा एवं ऋण गणना: राजकोषीय घाटा-से-GDP तथा ऋण-से-GDP अनुपात की गणना में इनका उपयोग किया जाता है।
- नीतिगत निर्माण: सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को अर्थव्यवस्था की गति का आकलन करने में सहायता मिलती है।
- क्षेत्रीय प्रदर्शन का आकलन: कृषि, उद्योग एवं सेवा क्षेत्र की वृद्धि प्रवृत्तियों के प्रारंभिक संकेत प्रदान करते हैं।
प्रथम अग्रिम अनुमान एवं द्वितीय अग्रिम अनुमान के बीच अंतर
| विशेषता |
प्रथम अग्रिम अनुमान (FAE) |
द्वितीय अग्रिम अनुमान (SAE) |
| जारी करने वाला |
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) |
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) |
| जारी करने का समय |
जनवरी (चालू वित्त वर्ष के दौरान) |
फरवरी के अंत में (चालू वित्त वर्ष के दौरान) |
| उद्देश्य |
बजट निर्माण हेतु GDP वृद्धि का प्रारंभिक प्रक्षेपण प्रदान करना। |
अधिक नवीन आँकड़ों के आधार पर अद्यतन प्रक्षेपण प्रदान करना। |
| आँकड़ों का कवरेज |
प्रथम 7–8 महीनों (अप्रैल–नवंबर/दिसंबर) के आँकड़ों पर आधारित |
तृतीय तिमाही (अप्रैल–दिसंबर) के अधिक पूर्ण आँकड़ों को सम्मिलित करता है। |
| सटीकता स्तर |
प्रारंभिक, अधिक संशोधन की संभावना |
FAE की तुलना में अधिक परिष्कृत, परंतु संशोधन की संभावना बनी रहती है। |
| बजट में उपयोग |
केंद्रीय बजट के निर्माण में उपयोग |
वित्त वर्ष समाप्ति से पूर्व राजकोषीय गणनाओं को परिष्कृत करने में सहायक |
| इसके बाद |
द्वितीय अग्रिम अनुमान |
अनंतिम (Provisional) अनुमान (मई)। |