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संक्षिप्त समाचार

6 Apr 2026

कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (CSAR) अभियान

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ईरान में बढ़ते संघर्ष के मध्य अमेरिकी विमानों के गिराए जाने के बाद यूएस के कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (CSAR) अभियानों पर ध्यान केंद्रित हुआ है।

कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (CSAR) मिशन के बारे में

  • उद्देश्य: शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों में फँसे कर्मियों, जैसे- गिराए गए पायलट और अलग-थलग पड़े सैनिकों को खोजने, सहायता देने और सुरक्षित वापस लाने के लिए।
  • सामान्य खोज अभियानों के विपरीत, ये मिशन सक्रिय युद्ध क्षेत्रों (जैसे- वर्तमान में ईरान) में संचालित होते हैं और प्रायः हेलीकॉप्टरों के माध्यम से किए जाते हैं।

CSAR का आदर्श वाक्य और भावना

  • ध्येय वाक्य: ‘ये कार्य हम इसलिए करते हैं, ताकि अन्य जीवित रह सकें।’
    • यह ‘किसी को पीछे न छोड़ने’ की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • संचालन की विधि
    • सामान्यत: ब्लैक हॉक जैसे हेलीकॉप्टरों का उपयोग कर इन अभियानों को चलाया जाता है।

CSAR का ऐतिहासिक विकास

  • इसकी शुरुआत प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हवाई बचाव प्रयासों से हुई।
  • 1943 (बर्मा): पहला प्रमुख अमेरिकी पैरारेस्क्यू मिशन, जिसमें पैराशूट से चिकित्सकों को उतारा गया।
  • 1944: दुश्मन क्षेत्र में पहला हेलीकॉप्टर बचाव अभियान।
  • वियतनाम युद्ध
    • आधुनिक CSAR अभियानों का विकास हुआ,
    • मिशन अधिक बड़े और जटिल बने।

प्रशिक्षण और विशेषज्ञता

  • CSAR कर्मियों को दोहरी भूमिका में प्रशिक्षित किया जाता है:
    • उच्च प्रशिक्षित सैनिक
    • प्रमाणित पैरामेडिक।
  • प्रशिक्षण अवधि: लगभग 2 वर्ष, जो सबसे कठिन सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक है।
  • प्रशिक्षण में शामिल
    • पैराशूटिंग
    • डाइविंग
    • जीवन रक्षा प्रशिक्षण
    • प्रतिरोध और बच निकलने की तकनीक
    • पूर्ण पैरामेडिक प्रमाणन।

आंध्र प्रदेश की राजधानी: अमरावती

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लोकसभा ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी घोषित किया है।

संबंधित तथ्य

  • यह संशोधन आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के अनुरूप है, जिसके तहत जून 2024 से हैदराबाद की अस्थायी राजधानी की स्थिति समाप्त कर अमरावती को पूर्ण राजधानी बनाया गया।
  • तीन-राजधानी मॉडल, जिसे वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने प्रस्तावित किया था, अब प्रभावी रूप से निरस्त कर दिया गया है।

अमरावती के बारे में

  • स्थान: अमरावती आंध्र प्रदेश की एक नियोजित ग्रीनफील्ड राजधानी है, जो कृष्णा नदी के तट पर स्थित है।
  • पृष्ठभूमि: इसकी परिकल्पना वर्ष 2014 में की गई, जब हैदराबाद तेलंगाना का हिस्सा बन गया।
  • आधुनिक राजधानी का दृष्टिकोण: इसे सिंगापुर जैसे शहरों से प्रेरित एक विश्वस्तरीय, सतत् और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने की योजना है।
  • भूमि पूलिंग योजना: भूमि का अधिग्रहण सीधे करने के बजाय स्वैच्छिक भूमि पूलिंग योजना के माध्यम से किया गया, जिसमें किसानों ने अपनी कृषि भूमि योगदान स्वरूप दी।
  • सामाजिक प्रभाव: भूमि मालिकों को विकसित भूखंड और वार्षिकी प्राप्त हुई, लेकिन कृषि मजदूरों को सीमित मुआवजा और आजीविका सहायता मिली।
  • पर्यावरणीय चिंताएँ: उपजाऊ नदीय भूमि पर निर्माण से पारिस्थितिकी, बाढ़ जोखिम और कृषि भूमि के नुकसान को लेकर चिंताएँ उठी हैं।

ऑक्टोपस

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नए शोध से पता चला है कि नर ऑक्टोपस एक विशेष भुजा (हेक्टोकॉटिलस) का उपयोग कर मादाओं की रासायनिक पहचान करते हैं, जिससे कम दृश्यता वाले समुद्री वातावरण में प्रजनन सफलता बढ़ती है।

प्रजनन व्यवहार से जुड़े प्रमुख निष्कर्ष

  • हेक्टोकॉटिलस का कार्य: नर ऑक्टोपस ‘हेक्टोकॉटिलस’ नामक विशेष भुजा का उपयोग शुक्राणु स्थानांतरण और मादा की रासायनिक पहचान के लिए करते हैं।
  • रासायनिक पहचान: यह भुजा प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का पता लगा सकती है, जिससे पूर्ण अंधकार में भी मादा की पहचान संभव होती है।
  • विकासात्मक अनुकूलन: CRT1 (केमोरेसेप्टर टाइप 1) जैसे रिसेप्टर्स न्यूरोट्रांसमीटर से विकसित हुए हैं, जो संवेदन और प्रजनन कार्यों को जोड़कर अधिक प्रभावी संभोग सुनिश्चित करते हैं।

ऑक्टोपस के बारे में

  • ऑक्टोपस अत्यधिक बुद्धिमान, कोमल-शरीर वाले समुद्री अकशेरुकी हैं, जो संघ मोलस्का, वर्ग सेफालोपोडा और गण ऑक्टोपोडा से संबंधित हैं, जिनकी लगभग 300 प्रजातियाँ ज्ञात हैं।
  • ऑक्टोपस के उदाहरण
    • विशाल प्रशांत ऑक्टोपस: सबसे बड़ी प्रजाति, जिसकी भुजाओं का विस्तार 30 फीट से अधिक होता है; यह ठंडे प्रशांत जल में पाई जाती है।
    • सामान्य ऑक्टोपस (Octopus vulgaris): यह व्यापक रूप से वितरित प्रजाति है, जो उथले, गर्म उष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण जल में पाई जाती है।
    • ब्लू-रिंग्ड ऑक्टोपस: छोटी लेकिन अत्यंत विषैली प्रजाति, जो अपने चमकीले नीले चेतावनी चिह्नों के लिए जानी जाती है।
    • डम्बो ऑक्टोपस: गहरे समुद्र में पाई जाने वाली प्रजाति, जिसमें कान जैसे पंख होते हैं और जो अत्यधिक गहराई के अनुकूल होती है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • आहार: ऑक्टोपस मांसाहारी शिकारी होते हैं, जो मुख्यतः क्रस्टेशियन, मोलस्क और छोटी मछलियों का शिकार करते हैं, और विषैली लार का उपयोग करते हैं।
    • रक्षा तंत्र: ये स्याही छोड़ने, रंग बदलने (क्रोमैटोफोर्स) और त्वचा की बनावट बदलने (पैपिला) के माध्यम से शिकारी से बचते हैं।
    • बुद्धिमत्ता: ये उन्नत समस्या-समाधान क्षमता, स्मृति और उपकरणों के उपयोग का प्रदर्शन करते हैं, जो उच्च संज्ञानात्मक क्षमता को दर्शाता है।
  • संरक्षण स्थिति: अधिकांश प्रजातियाँ IUCN द्वारा ‘कम चिंताजनक’ या ‘अपर्याप्त डेटा’ श्रेणी में रखी गई हैं, हालाँकि गहरे समुद्र की प्रजातियाँ अभी भी कम अध्ययनित हैं।

राष्ट्रीय समुद्री दिवस

राष्ट्रीय समुद्री दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की समुद्री विरासत और व्यापार, संपर्क तथा आर्थिक विकास में इसकी भूमिका को रेखांकित किया।

राष्ट्रीय समुद्री दिवस के बारे में

  • राष्ट्रीय समुद्री दिवस प्रतिवर्ष 5 अप्रैल को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार में समुद्री क्षेत्र के महत्त्व को मान्यता देना है।
  • उद्गम: यह वर्ष 1919 में एसएस लॉयल्टी की यात्रा की स्मृति में मनाया जाता है, जो मुंबई से लंदन जाने वाला पहला भारतीय स्वामित्व वाला जहाज था और जिसने भारत के वैश्विक नौवहन में प्रवेश को चिह्नित किया।
  • वर्ष 2026 की थीम: समुद्री भारत–प्रगति को सशक्त बनाना’
    • यह थीम समुद्री विरासत, आर्थिक विकास और समुद्री क्षेत्र के सतत् विकास पर जोर देती है।

भारत की समुद्री विरासत के बारे में

  • प्राचीन समुद्री परंपराएँ: भारत का मेसोपोटामिया, रोम और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ समुद्री व्यापार का लंबा इतिहास रहा है, जो मानसूनी हवाओं और तटीय बस्तियों के माध्यम से संभव हुआ।
  • रणनीतिक व्यापार मार्ग: भारतीय महासागर के प्रमुख समुद्री मार्गों के साथ इसकी स्थिति ने ऐतिहासिक रूप से वैश्विक व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया।
  • औपनिवेशिक और आधुनिक विकास: औपनिवेशिक काल में समुद्री क्षेत्र का विकास हुआ और बाद में बंदरगाहों, जहाज निर्माण तथा वैश्विक नौवहन नेटवर्क के माध्यम से इसका विस्तार हुआ।
  • समकालीन महत्त्व: आज समुद्री परिवहन भारत के लगभग 90% व्यापार (मात्रा के आधार पर) को सँभालता है, जिससे यह आर्थिक विकास तथा सागरमाला और ब्लू इकोनॉमी जैसी पहलों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनता है।

बाबू जगजीवन राम

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उनकी जयंती (5 अप्रैल 2026) के अवसर पर नेताओं ने बाबू जगजीवन राम को सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण में उनके आजीवन योगदान के लिए श्रद्धांजलि दी।

बाबू जगजीवन राम के बारे में

  • बाबू जगजीवन राम (1908–1986) एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, दलित नेता और राजनेता थे, जिन्होंने सामाजिक न्याय, समानता और समावेशी शासन का समर्थन किया।
  • प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म वर्ष 1908 में बिहार में हुआ। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और कलकत्ता विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की, जहाँ उन्होंने जातिगत भेदभाव का सामना किया और उसका विरोध किया।

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

  • राष्ट्रीय आंदोलन में भागीदारी: उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ मिलकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और वंचित समुदायों को संगठित किया।
  • सामाजिक समानता के लिए संघर्ष: उन्होंने जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता के विरुद्ध संघर्ष किया और सामाजिक सुधार को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा।

संविधान सभा में भूमिका

  • वंचित वर्गों की सुरक्षा: उन्होंने अनुसूचित जातियों और अल्पसंख्यकों के लिए मौलिक अधिकारों और सुरक्षा उपायों की वकालत की।
  • सामाजिक न्याय को बढ़ावा: उन्होंने अस्पृश्यता उन्मूलन (अनुच्छेद-17) जैसे प्रावधानों में योगदान दिया और आरक्षण जैसी नीतियों का समर्थन किया।
  • स्वतंत्रता के बाद की भूमिका
    • श्रम और औद्योगिक सुधार: श्रम मंत्री के रूप में उन्होंने श्रमिक कल्याण कानूनों को मजबूत किया और औद्योगिक विवाद प्रणाली जैसे ढाँचों के विकास में योगदान दिया।
    • कृषि और आर्थिक विकास: उन्होंने आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया और संस्थागत उपायों के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने का समर्थन किया।
    • रक्षा और प्रशासनिक नेतृत्व: रक्षा मंत्री के रूप में वर्ष 1971 के युद्ध के दौरान उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे भारत की रणनीतिक सफलता सुनिश्चित हुई।

सम्मान और मान्यता

  • समता दिवस: उनकी जयंती (5 अप्रैल) को सामाजिक न्याय के सम्मान में ‘समता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
  • समता स्थल स्मारक: नई दिल्ली में स्थित उनका स्मारक उनके समानता और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
  • संस्थागत मान्यता: बाबू जगजीवन राम राष्ट्रीय फाउंडेशन जैसी संस्थाएँ उनके समावेशी विकास के आदर्शों को आगे बढ़ाती हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय सम्मान: वर्ष 2012 में बांग्लादेश सरकार ने वर्ष 1971 के मुक्ति संग्राम में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘फ्रेंड्स ऑफ लिबरेशन वॉर’ सम्मान प्रदान किया।

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