हॉर्नबिल रेस्टोरेंट

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छत्तीसगढ़ वन विभाग दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण और वनों को प्राकृतिक रूप से विकसित होने में सहायता देने हेतु छह “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” स्थापित कर रहा है।
हॉर्नबिल रेस्टोरेंट के बारे में
- “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा प्रारंभ की गई एक विशिष्ट वन्यजीव संरक्षण पहल को संदर्भित करता है।
- ये पारंपरिक भोजनालय नहीं हैं, बल्कि निर्दिष्ट क्षेत्रों में लगाए गए फलदार वृक्षों के प्राकृतिक समूह हैं, जिनका उद्देश्य विशेष रूप से दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के लिए प्रचुर खाद्य स्रोत उपलब्ध कराना है।
- स्थान: यह पहल उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) में, छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित है।
- यह अभयारण्य तीन रेंज—कुल्हाड़ीघाट, इंदागाँव और दक्षिण उदंती—में विस्तृत है, जो 1,000 मीटर तक की ऊँचाई वाले पर्वतीय भू-भाग को कवर करता है।
- इस क्षेत्र की जलवायु पश्चिमी घाट के समान है, जो हॉर्नबिल के लिए उपयुक्त है।
- उद्देश्य: मालाबार पाइड हॉर्नबिल के लिए स्थायी, खाद्य-समृद्ध आश्रय प्रदान करना, जिसकी जनसंख्या इस अभयारण्य में बढ़ रही है।
- हॉर्नबिल को जीवित रहने के लिए बड़ी मात्रा में फल (जैस-अंजीर) की आवश्यकता होती है, और ये समूह वर्ष भर उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं।
- जैव विविधता लाभ: हॉर्नबिल उष्णकटिबंधीय वनों में प्रमुख बीज-वितरक (कीस्टोन सीड डिस्पर्सर) हैं।
- वे फल खाते हैं और व्यापक क्षेत्रों में बीज प्रसरण करते हैं, जिससे प्राकृतिक वन पुनर्जनन, पादप विविधता का संरक्षण और बड़ी वृक्ष प्रजातियों को समर्थन प्राप्त होता है।
- संरक्षण और पर्यटन: दृश्य क्षेत्रों में वृक्षारोपण कर यह परियोजना पारिस्थितिकी पर्यटन को प्रोत्साहित करती है, जिससे आगंतुक और स्थानीय लोग हॉर्नबिल को सुरक्षित रूप से देख सकें।
- समान मॉडलों से प्रेरणा: यह छत्तीसगढ़ के इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान में सफल “वॉल्चर रेस्टोरेंट” मॉडल पर आधारित है, जहाँ मृतभक्षी पक्षियों के लिए खाद्य आपूर्ति शृंखला विकसित की गई थी।
मालाबार पाइड हॉर्नबिल के बारे में
- मालाबार पाइड हॉर्नबिल (Anthracoceros coronatus), जिसे लेसर पाइड हॉर्नबिल भी कहा जाता है, हॉर्नबिल परिवार का एक बड़ा पक्षी है, जो भारत और श्रीलंका का स्थानिक है।
- आकृति: यह मध्यम आकार का पक्षी है, जिसका काले और सफेद रंग का आकर्षक शरीर होता है।
- आवास: सदाबहार और आर्द्र पर्णपाती वन, वन के सीमांत क्षेत्र, नदी तटीय क्षेत्र, बागान तथा मानव बस्तियों के समीप; प्रायः 600 मीटर से कम ऊँचाई पर।
- वितरण: पश्चिमी घाट (दक्षिण भारत), मध्य/पूर्वी भारत (जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा) तथा श्रीलंका।
- आहार: मुख्यतः फलाहारी (विशेषकर अंजीर); साथ ही कीट, छोटे सरीसृप, स्तनधारी और पक्षियों का सेवन; प्रमुख बीज-वितरक (“वन के किसान”)।
- संरक्षण स्थिति: IUCN रेड लिस्ट में निकट संकटग्रस्त।
- IUCN के अनुसार, इस प्रजाति के 3,000–32,000 परिपक्व जीवों का अस्तित्व है।
- आवास क्षति/खंडन के कारण इनकी संख्या में गिरावट हो रही है।
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राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ‘बी कॉरिडोर’
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने सतत् अवसंरचना कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे परागणकर्ताओं या “बी कॉरिडोर” (Bee Corridors) बनाने की एक प्रथम-प्रकार की पहल की घोषणा की है।
बी कॉरिडोर के बारे में
- ‘बी कॉरिडोर’ राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे स्थापित परागणकर्ता-अनुकूल वनस्पति के प्रस्तावित सतत् रैखिक विस्तार हैं।
- उद्देश्य: इन्हें मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं को वर्ष भर पराग संसाधन प्रदान कर समर्थन देने के लिए डिजाइन किया गया है।
- पारिस्थितिकी महत्त्व: यह सजावटी सड़क किनारे वृक्षारोपण से हटकर पारिस्थितिकी, जैव-विविधता-वर्द्धक वृक्षारोपण की ओर परिवर्तन को दर्शाता है।
- वनस्पतियाँ: इन कॉरिडोर में वृक्षों, झाड़ियों, शाकीय पौधों और घासों का मिश्रण शामिल होगा, जो पराग से समृद्ध हों तथा स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल हों।
- नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसी देशज प्रजातियों को इन कॉरिडोर के साथ रोपित करने की योजना है।
- प्रजातियों का चयन इस प्रकार किया गया है कि विभिन्न ऋतुओं में क्रमिक पुष्पन सुनिश्चित हो सके, जिससे परागणकर्ताओं के लिए लगभग निरंतर पुष्पन और खाद्य आपूर्ति बनी रहे।
- क्रियान्वयन लक्ष्य: NHAI वित्तीय वर्ष 2026–27 के दौरान कम-से-कम तीन समर्पित परागणकर्ता कॉरिडोर विकसित करने की योजना बना रहा है।
- वर्ष 2026–27 में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे लगभग 40 लाख (4 मिलियन) वृक्ष लगाए जाएँगे, जिनमें से लगभग 60% बी कॉरिडोर पहल के अंतर्गत होंगे।
- व्यापक प्रभाव: यह पहल सतत् और पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी अवसंरचना विकास के अनुरूप है, जो राजमार्ग नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ जैव-विविधता तथा पारिस्थितिकी संतुलन को सुदृढ़ करती है।
मधुमक्खियाँ क्या हैं?
- मधुमक्खियाँ उड़ने वाले कीट हैं, जो मुख्यतः पराग पर निर्भर रहने तथा परागण में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका के लिए जानी जाती हैं।
- विश्व भर में 20,000 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें सामाजिक और एकाकी दोनों प्रकार शामिल हैं।
- वर्गीकरण: संघ आर्थ्रोपोडा और गण हाइमेनोप्टेरा से संबंधित; ततैया और चींटियों से निकट संबंध।
- शारीरिक संरचना: त्रि-भागीय शरीर (सिर, वक्ष, उदर); शाखायुक्त रोमों से आच्छादित, जो पराग को कुशलतापूर्वक पकड़ते हैं।
- आहार: शाकाहारी; पराग (प्रोटीन स्रोत) पर निर्भर।
- सामाजिक संरचना और जातियाँ (सामाजिक प्रजातियों जैसे मधुमक्खियों में): मधुमक्खियाँ अत्यधिक संगठित ‘यू-सोशल कालोनियों’ (सुपरऑर्गैनिज्म) में रहती हैं, जहाँ कार्य विभाजन होता है।
- रानी: एकमात्र प्रजननक्षम मादा; आकार में सबसे बड़ी; प्रतिदिन 2,000 तक अंडे देती है; कॉलोनी को विनियमित करने हेतु ‘फेरोमोन’ उत्पन्न करती है।
- श्रमिक: बंध्या मादाएँ; कॉलोनी का अधिकांश भाग (दसियॉँ हजार); भोजन-संग्रह, शिशु-देखभाल, सफाई, मोम निर्माण, रक्षा आदि कार्य करती हैं।
- नर (ड्रोन): नर; बड़ी आँखें; मुख्यतः रानी के साथ प्रजनन के लिए; न डंक होता है और न ही पराग वहन संरचना।
- कालोनी का आकार: एक छत्ते में सामान्यतः 20,000–80,000 मधुमक्खियाँ।
- परागण भूमिका: पुष्पीय पौधों के प्रमुख परागणकर्ता; जैव-विविधता और कृषि उत्पादकता के लिए अत्यावश्यक।
- वैगल नृत्य: वैगल नृत्य एक संप्रेषण व्यवहार है, जिसे श्रमिक मधुमक्खियाँ कॉलोनी के अन्य सदस्यों को किसी खाद्य स्रोत (अमृत या पराग) की दिशा और दूरी की जानकारी देने हेतु करती हैं।
- इसका प्रथम विश्लेषण ऑस्ट्रियाई प्राणी-व्यवहार वैज्ञानिक कार्ल वॉन फ्रिश द्वारा किया गया, जिन्हें इस खोज के लिए वर्ष 1973 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।
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अंतरराष्ट्रीय आयुष सम्मेलन
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हाल ही में तीसरा अंतरराष्ट्रीय आयुष सम्मेलन दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में संपन्न हुआ, जिसमें प्रमाण-आधारित पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों के संरचित वैश्विक एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय आयुष सम्मेलन के बारे में
- परिचय: यह द्विवार्षिक सम्मेलन है, जिसे साइंस इंडिया फोरम और वर्ल्ड आयुर्वेद फाउंडेशन द्वारा भारत के आयुष मंत्रालय के समर्थन से आयोजित किया जाता है।
- उद्भव: इसके पहले दो संस्करण वर्ष 2017 (नई दिल्ली) और वर्ष 2024 (दुबई) में आयोजित किए गए थे।
- वर्ष 2026 का सम्मेलन दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित किया गया।
- वर्ष 2026 थीम: “मनो–शारीरिक स्वास्थ्य के लिए प्रमाण-आधारित आयुष हस्तक्षेप।”
- केंद्रित क्षेत्र: सम्मेलन में आयुष में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान की गुणवत्ता, औषधीय वनस्पतियाँ, मानसिक स्वास्थ्य, चयापचय विकार, महिला एवं बाल स्वास्थ्य, ऑन्कोलॉजी, स्वप्रतिरक्षी रोग और यूएई स्वास्थ्य प्रणाली के भीतर एकीकरण पर चर्चा की गई।
- आयोजन और विचार-विमर्श
- सम्मेलन में 62 वैज्ञानिक सत्र, 16 पूर्ण बैठक चर्चाएँ 60 अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के साथ, 10 विषय-विशिष्ट सत्र, और पशु चिकित्सा एवं कृषि पारिस्थितिकी पर सम्मेलन हुए।
- प्राप्त 1,200 शोध सारांशों में से 352 मौखिक पत्र और 200 पोस्टर पीयर-रिव्यू किए गए और प्रस्तुत किए गए।
- 20 देशों के 100 विशेषज्ञों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि सभा ने आयुष हस्तक्षेपों पर श्वेत-पत्र जारी किया।
- आयुष फिल्म महोत्सव में 15 प्रविष्टियाँ प्रस्तुत की गईं, जो एकीकृत स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देती हैं।
- “वैलनेस बियॉन्ड वॉल्स” डॉ. अरुण द्वारा सर्वश्रेष्ठ फिल्म और “बियॉन्ड रेस्टलेस” डॉ. नीथू निकोलस द्वारा दूसरी सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार प्राप्त किया।
आयुष: आयुष भारत में प्रचलित चिकित्सा प्रणालियों का संक्षिप्त रूप है – आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी। |
सुपर-अर्थ

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खगोलविदों के अनुसार ‘सुपर-अर्थ’ आकाशगंगा में पाए जाने वाले सबसे सामान्य ग्रहों में से हैं। इसके बावजूद, हमारे सौर मंडल में इस श्रेणी का कोई भी ग्रह न होना वैज्ञानिकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण पहेली है, जो ग्रह निर्माण और सौर प्रणाली के विकास से जुड़े सिद्धांतों पर पुनर्विचार की आवश्यकता को दर्शाता है।
‘सुपर-अर्थ’ के बारे में
- ‘सुपर-अर्थ’ वे ग्रह हैं जिनका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान के दो से दस गुना के बीच होता है, पृथ्वी से बड़े लेकिन नेप्च्यून से छोटे।
- पहला पुष्ट उदाहरण: ग्लिसे 876 के चारों ओर परिक्रमा करने वाला ग्लिसे 876d, जिसे वर्ष 2004 में खोजा गया।
- प्रसिद्ध उदाहरण
- केपलर-452b (2015): सूर्य-समान तारे के चारों ओर परिक्रमा करता है, रहने योग्य क्षेत्र में, लगभग 1,400 प्रकाश वर्ष दूर।
- प्रोक्सिमा सेंटॉरी b (2016): ज्ञात सबसे निकटम ‘सुपर-अर्थ’, केवल 4.24 प्रकाश वर्ष दूर।
- केपलर स्पेस टेलिस्कोप द्वारा बाद में किए गए अवलोकनों ने यह दिखाया कि ऐसे ग्रह आकाशगंगा में अत्यंत सामान्य हैं।
- मुख्य विशेषताएँ
- मध्यम आकार और द्रव्यमान: ये पृथ्वी जैसे चट्टानी ग्रह और नेप्च्यून जैसे ‘गैस जिआंट’ के बीच सेतु का कार्य करते हैं।
- विविध संरचना: कुछ चट्टानी हैं, कुछ महासागरों से ढके हैं, जबकि कुछ में मोटी हाइड्रोजन-हीलियम वायुमंडल हैं।
- परिवर्ती रहने योग्य क्षेत्र: कुछ ‘सुपर-अर्थ’ रहने योग्य क्षेत्रों में परिक्रमा करते हैं, जैसे केपलर-452b और प्रोक्सिमा सेंटॉरी b, जहाँ तरल पानी मौजूद हो सकता है।
- मजबूत गुरुत्वाकर्षण: उच्च द्रव्यमान का अर्थ है अधिक गुरुत्वाकर्षण, जो बेहतर वायुमंडलीय धारण को सक्षम कर सकता है।
- महत्त्व
- ‘सुपर-अर्थ’ पहले की धारणाओं को चुनौती देते हैं कि अन्य ग्रह प्रणाली हमारे सौर मंडल जैसी होती हैं।
- इनकी प्रचुरता ग्रह निर्माण के सिद्धांतों को पुनः आकार देती है और पृथ्वी के बाहर जीवन खोज के दायरे को विस्तारित करती है।
- जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप जैसे उन्नत वेधशालाएँ अब इनके वायुमंडलों का विश्लेषण बायोसिग्नेचर्स के लिए कर रही हैं, जिससे ये भविष्य के जीवन विज्ञान अनुसंधान के लिए केंद्रीय हो गए हैं।
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प्रोजेक्ट वॉल्ट
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फरवरी 2026 में, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट वॉल्ट (Project Vault) लॉन्च किया गया है।
प्रोजेक्ट वॉल्ट के बारे में
- ऐतिहासिक दृष्टांत: वर्ष 1973 के अरब तेल निषेध (एंबार्गो) के बाद, अमेरिका द्वारा स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (1975) की स्थापना की गई, ताकि अपनी अर्थव्यवस्था को ऊर्जा संकट से सुरक्षित रखा जा सके।
- 21वीं सदी में, महत्त्वपूर्ण खनिज, तेल के सामान ही रणनीतिक महत्त्व रखते हैं।
- उद्देश्य: संयुक्त राज्य अमेरिका में महत्त्वपूर्ण खनिजों का एक रणनीतिक घरेलू भंडार निर्मित करना।
- संस्थागत ढाँचा: स्वतंत्र रूप से संचालित सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) के रूप में संरचित।
- सहयोग
- संयुक्त राज्य अमेरिका के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक (EXIM) से 10 अरब डॉलर का वित्तपोषण।
- निजी क्षेत्र से अतिरिक्त 2 अरब डॉलर का वित्तीय योगदान।
- खनिजों के कवरेज का दायरा
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- संयुक्त राज्य अमेरिका के भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण 2025 की क्रिटिकल मिनरल्स सूची में शामिल 60 महत्त्वपूर्ण खनिजों पर ध्यान केंद्रित करना।
- मुख्य उद्देश्य: नागरिक या सिविल उद्योग (Civilian Industries) की आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों की स्थिति में अनुकूलन को मजबूत करना।
- महत्त्व: प्रोजेक्ट वॉल्ट केवल एक औद्योगिक नीति नहीं बल्कि एक नई रणनीतिक सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें महत्त्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा तत्त्व केवल वस्तुएँ नहीं बल्कि रणनीतिक संपत्तियाँ हैं, जो समग्र राष्ट्रीय शक्ति को आधार प्रदान करती हैं।
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