वीरा पासी
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भारत के विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पूर्व रायबरेली में वीरा पासी की एक प्रतिमा का अनावरण किया है, जिसमें दलित प्रतीकों और वर्ष 1857 के विद्रोह में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया है।
वीरा पासी कौन थे?
- दलित स्वतंत्रता सेनानी: वीरा पासी पासी समुदाय के एक दलित योद्धा थे, जिन्होंने वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश शासन के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी।
- जन्म: उनका जन्म 11 नवंबर, 1835 को वर्तमान उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के लोधवारी गाँव में हुआ था।
- राणा बेनी माधव के साथ जुड़ाव: वीरा पासी ने शंकरपुर रियासत के शासक राणा बेनी माधव बख्श सिंह के एक विश्वसनीय कमांडर और साथी के रूप में कार्य किया।
- वर्ष 1857 के विद्रोह में भूमिका: स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, वीरा पासी ने विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना द्वारा बंदी बनाए जाने के बाद राणा बेनी माधव को मुक्त कराया था।
- ब्रिटिश इनाम: कथित तौर पर अंग्रेजों ने वीरा पासी की गिरफ्तारी की सूचना देने वाले को ₹50,000 का इनाम देने की घोषणा की थी।
- मृत्यु और विरासत: मौखिक परंपराओं के अनुसार, ब्रिटिश सेना से राणा बेनी माधव की रक्षा करते हुए वीरा पासी की मृत्यु हो गई थी।
- दलित अस्मिता के प्रतीक: वह उत्तर प्रदेश में दलित गौरव, आत्म-सम्मान और राजनीतिक पहचान के एक महत्त्वपूर्ण प्रतीक के रूप में उभरे हैं।
पासी समुदाय के बारे में
- यूपी में दलित समुदाय: उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति (SC) की आबादी में पासी समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 7% है, जिससे वे जाटवों के बाद दूसरा सबसे बड़ा दलित समूह बन जाते हैं।
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स्पर्म व्हेल की क्लिक्स में इंसानी बोली जैसे पैटर्न दिखे।
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एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि स्पर्म व्हेल (Sperm whale) की ध्वनियों में मानव ध्वनिविज्ञान (Phonology) के समान संरचनात्मक पैटर्न दिखाई देते हैं।
स्पर्म व्हेल कैसे संवाद करती हैं?
- कोडास (Codas): स्पर्म व्हेल “कोडास” नामक ‘क्लिक’ की ध्वनियों का उपयोग करके संवाद करती हैं, जो सामाजिक समूहों के भीतर आपस में साझा किए जाने वाले क्लिक के छोटे अनुक्रम होते हैं।
- सामाजिक समन्वय और नेविगेशन: ये कोडास जल के भीतर सामाजिक समन्वय, समूह की पहचान, नेविगेशन और संचार बनाए रखने में मदद करते हैं।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष
- स्वर-संबंधी भिन्नता (Tonal Variation): शोधकर्ताओं ने पाया कि स्पर्म व्हेल के कोडा न केवल समय के अंतराल में, बल्कि स्वर की गुणवत्ता और ध्वनिक संरचना (Acoustic Structure) में भी भिन्न होते हैं।
- क्लिक की दो श्रेणियाँ: व्हेल की क्लिक दो अलग-अलग ध्वनि श्रेणियों (“a” और “i” प्रकार) में आती हैं, जो मानव भाषण में स्वर-जैसी (vowel-like) बनावट से मिलती-जुलती हैं।
- लंबाई में अंतर: “a” कोडास आमतौर पर “i” कोडास की तुलना में लंबे होते हैं, जो मानव भाषाओं में दीर्घ और लघु स्वर के अंतर के समान हैं।
- संचार की बहुस्तरीय परतें: अलग-अलग क्लिक प्रकारों का उपयोग करके एक ही कोडा पैटर्न तैयार किया जा सकता है, जो संचार की कई परतों को दर्शाता है।
- व्यक्तिगत मुखर पहचान (Individual Vocal Signatures): अलग-अलग व्हेल थोड़े भिन्न कोडास उत्पन्न करती हैं, जो उनकी विशिष्ट मुखर पहचान या विशिष्टता को दर्शाता है।
- मानव ध्वनि विज्ञान के साथ समानता: अध्ययन से पता चलता है कि स्पर्म व्हेल के संचार में मानव ध्वनि विज्ञान के साथ संरचनात्मक समानताएँ हैं, हालाँकि इसे अभी तक एक भाषा नहीं माना गया है।
स्पर्म व्हेल के बारे में
- सबसे बड़ी दाँतेदार व्हेल: स्पर्म व्हेल (Physeter macrocephalus) दुनिया की सबसे बड़ी दांतेदार व्हेल है और इसका वैश्विक समुद्री वितरण सबसे व्यापक क्षेत्रों में से एक है।
शारीरिक विशेषताएँ
- सबसे बड़ा मस्तिष्क: इसके पास किसी भी ज्ञात जीव की तुलना में सबसे बड़ा मस्तिष्क होता है, जिसका वजन 9 किलोग्राम तक होता है।
- एंबरग्रीस (Ambergris): यह अपनी आँतों में एंबरग्रीस का उत्पादन करती है, जो इत्र को टिकाऊ बनाने वाला एक मूल्यवान पदार्थ है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत भारत में इसे अपने पास रखना अवैध है।
- कार्बन पंप की भूमिका: इसका आयरन युक्त मल फाइटोप्लांकटन (phytoplankton) को उपजाऊ बनाता है, जिससे यह महासागर के कार्बन पृथक्करण और समुद्री खाद्य शृंखलाओं के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
- संरक्षण की स्थिति: इसे IUCN की रेड लिस्ट में ‘सुभेद्य’ (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और CITES के परिशिष्ट I (Appendix I) के तहत संरक्षित किया गया है, जो इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रतिबंधित करता है।
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भारत-वियतनाम रक्षा संबंध
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भारत और वियतनाम ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की हनोई यात्रा के दौरान रक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत किया है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
- समुद्री सुरक्षा: दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा में सहयोग पर जोर दिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
- रक्षा उद्योग और प्रशिक्षण: भारत और वियतनाम ने रक्षा विनिर्माण, सैन्य प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और साइबर सुरक्षा में सहयोग पर चर्चा की।
- संयुक्त सैन्य जुड़ाव: दोनों पक्ष नियमित रक्षा संवादों, संयुक्त सैन्य अभ्यासों और अपने सशस्त्र बलों के बीच विनिमय कार्यक्रमों का विस्तार करने पर सहमत हुए।
- संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना (UN Peacekeeping) सहयोग: संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना अभियानों में सहयोग को द्विपक्षीय जुड़ाव के एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में पहचाना गया।
प्रौद्योगिकी और शिक्षा पहल
- लैंग्वेज लैब (Language Lab): भारतीय सहायता से वियतनाम के एयरफोर्स ऑफिसर्स कॉलेज में एक लैंग्वेज लैब की स्थापना की गई।
- AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी: भारत ने न्हा ट्रांग (Nha Trang) में दूरसंचार विश्वविद्यालय (Telecommunications University) में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लैब की घोषणा की।
- संस्थागत समझौता ज्ञापन (MoU): भारत के ‘मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस इंजीनियरिंग’ और वियतनाम के ‘टेलीकम्युनिकेशंस यूनिवर्सिटी’ ने एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
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इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार 2026
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लिन किंग द्वारा अनुवादित, यांग शुआंग-जी की कृति ‘ताइवान ट्रैवलॉग’ (Taiwan Travelogue) ने इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार 2026 जीता है।
ताइवान ट्रैवलॉग के बारे में
- मूल भाषा: मंदारिन ।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: यह कहानी ताइवान में जापानी औपनिवेशिक शासन के दौरान वर्ष 1938 की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
- मुख्य कथानक: यह कहानी एओयामा चिजुको नामक एक जापानी उपन्यासकार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सरकार द्वारा प्रायोजित साहित्यिक दौरे पर ताइवान आती हैं।
- वह एक ताइवानी दुभाषिया (इंटरप्रेटर) और कुशल रसोइया, चिजुरु के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित करती हैं।
- यह उपन्यास भोजन और यात्रा को माध्यम बनाकर निम्नलिखित का पता लगाता है:
- उपनिवेशवाद और शाही शक्ति,
- लिंग और वर्ग संबंध,
- पहचान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान,
- भावनात्मक अंतरंगता और दूरी।
- ऐतिहासिक उपलब्धि: यह अंग्रेजी में अनुवादित यांग शुआंग-जी की पहली रचना है और इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार जीतने वाला पहला मंदारिन (चीनी भाषा) अनुवाद है।
इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार के बारे में
- वार्षिक पुरस्कार: यह अनुवादित कथा साहित्य (फिक्शन) के लिए प्रतिवर्ष दिया जाता है।
- उत्पत्ति: इसकी स्थापना वर्ष 2005 में ‘मैन बुकर इंटरनेशनल प्राइज’ के रूप में हुई थी।
- क्षेत्र: यह अंग्रेजी में अनुवादित और यू.के. या आयरलैंड में प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ दीर्घकालिक कथा साहित्य (उपन्यास) या लघु-कहानी संग्रहों को सम्मानित करता है।
- अनुवादकों को मान्यता: £50,000 की पुरस्कार राशि लेखक और अनुवादक के बीच समान रूप से बाँटी जाती है।
- धनराशि: शॉर्टलिस्ट किए गए लेखकों और अनुवादकों में से प्रत्येक को £2,500 मिलते हैं।
- उद्देश्य: इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले अनुवादित कथा साहित्य को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है।
बुकर पुरस्कार और इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार के बीच मुख्य अंतर
- पात्र कार्य का प्रकार: बुकर पुरस्कार अंग्रेजी में लिखे गए मूल कथा साहित्य के लिए दिया जाता है, जबकि इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार मूल रूप से अन्य भाषाओं में लिखे गए और अंग्रेजी में अनुवादित कार्यों को मान्यता देता है।
- पुरस्कार के प्राप्तकर्ता: बुकर पुरस्कार केवल लेखक को दिया जाता है, जबकि इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार संयुक्त रूप से लेखक और अनुवादक को दिया जाता है।
- मान्यता का केंद्र: बुकर पुरस्कार अंग्रेजी भाषा के कथा साहित्य में उत्कृष्टता को सम्मानित करता है, जबकि इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार साहित्यिक गुणवत्ता और अनुवाद उत्कृष्टता दोनों को मान्यता देता है।
इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार के भारतीय विजेता:
- 2022 (हिंदी साहित्य): गीतांजलि श्री ने ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ (Tomb of Sand) के लिए यह पुरस्कार जीता, जिसका अनुवाद डेजी रॉकवेल ने किया था। यह पुरस्कार जीतने वाली यह पहली हिंदी रचना थी।
- 2025 (कन्नड़ साहित्य): बानू मुश्ताक ने ‘हार्ट लैंप’ (Heart Lamp) के लिए यह पुरस्कार जीता, जिसका अनुवाद दीपा भश्ती ने किया था। यह पुरस्कार प्राप्त करने वाली यह पहली कन्नड़ रचना थी।
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अभ्यास प्रगति 2026
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एक बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास प्रगति 2026 (PRAGATI 2026), मेघालय के उमरोई मिलिट्री स्टेशन में शुरू हुआ है, जिसमें भारत और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के 12 मित्र देश भाग ले रहे हैं।
प्रगति अभ्यास (Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region) के बारे में
- प्रतिभागी देश: भारत के साथ, इस अभ्यास में भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्याँमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम शामिल हैं।
- प्राथमिक उद्देश्य: इसका उद्देश्य प्रतिभागी सेनाओं के बीच व्यावसायिक आदान-प्रदान, अंतर-संचालनीयता और सैन्य सहयोग को बढ़ाना है।
- परिचालन फोकस: यह अभ्यास अर्द्ध-पर्वतीय और जंगली इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों पर केंद्रित है।
- प्रशिक्षण घटक: इसमें संयुक्त योजना अभ्यास, सामरिक अभ्यास और समन्वित क्षेत्र संचालन शामिल हैं।
- यह भारतीय सेना के प्रशिक्षण में द्विपक्षीय से समूहिक-शैली के जुड़ाव की ओर एक बदलाव को चिह्नित करेगा।
- मुख्य जोर: यह कठिन परिस्थितियों में शारीरिक फिटनेस, अनुशासन, सहनशक्ति, समन्वय और अनुकूलनशीलता पर ध्यान केंद्रित करता है।
- आत्मनिर्भर भारत घटक: अभ्यास के दौरान भारतीय रक्षा कंपनियाँ स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों और नवाचारों का प्रदर्शन कर रही हैं।
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एग्रीकोला पदक (Agricola Medal)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इटली के रोम में FAO मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित एग्रीकोला पदक (Agricola Medal) से सम्मानित किया गया है।
एग्रीकोला पदक के बारे में
- FAO का सर्वोच्च सम्मान: एग्रीकोला पदक खाद्य और कृषि संगठन द्वारा प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।
- स्थापना: इस पदक की स्थापना वर्ष 1977 में FAO द्वारा की गई थी।
- पुरस्कार का उद्देश्य: यह खाद्य सुरक्षा और सतत् कृषि में उत्कृष्ट योगदान की मान्यता में विशिष्ट व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है।
- पूर्व भारतीय प्राप्तकर्ता: वर्ष 2008 में, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को ‘भारत की कृषि को आधुनिक बनाने और भूखमरी व गरीबी को कम करने’ में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका के लिए इस पदक से सम्मानित किया गया था।
कार्यक्रम में रेखांकित किए गए भारत की कृषि से जुड़े प्रमुख बिंदु
- सांस्कृतिक लोकाचार के रूप में कृषि: यह कहा गया कि भारत में कृषि पृथ्वी और लोगों के बीच एक पवित्र बंधन का प्रतिनिधित्व करती है।
- सतत खेती पर ध्यान: भारत “प्रति बूंद अधिक फसल” (पर ड्रॉप मोर क्रॉप), सूक्ष्म सिंचाई और परिशुद्ध कृषि के माध्यम से जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा दे रहा है।
- उन्नत तकनीक का उपयोग: एआई-आधारित परामर्श प्रणाली, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग और डिजिटल बुनियादी ढांचे से कृषि उत्पादकता और आय में सुधार हो रहा है।
- जलवायु-अनुकूल फसल किस्में: भारत ने पिछले दशक में लगभग 3,000 जलवायु-अनुकूल फसलों की किस्में विकसित की हैं।
FAO के बारे में
- स्थापना: FAO की स्थापना 16 अक्टूबर, 1945 को क्यूबेक सिटी में 34 देशों द्वारा की गई थी।
- संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी: FAO संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है, जो भूखमरी से निपटने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व करती है।
- यह संयुक्त राष्ट्र (UN) की सबसे पुरानी स्थायी विशेष एजेंसी है।
- सदस्यता संख्या: FAO के वर्तमान में 195 सदस्य हैं, जिनमें 194 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं।
- भारत की स्थिति: भारत FAO का एक संस्थापक सदस्य है।
- शासन: यह संगठन द्विवार्षिक FAO सम्मेलन द्वारा शासित होता है, जहाँ सभी सदस्यों का प्रतिनिधित्व होता है।
- वित्त स्रोत: FAO को सदस्य देशों के योगदान के माध्यम से वित्तपोषित किया जाता है।
- विश्व खाद्य दिवस: वर्ष 1945 में FAO की स्थापना की स्मृति में प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है।
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