UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

यूरोप हीटवेव्स – एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या

यूरोप हीटवेव्स – एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या 4 Jul 2026

संदर्भ:

वर्तमान में यूरोप इतिहास में अपने सबसे गंभीर हीट वेव (लू) की समस्या का अनुभव कर रहा है। सड़कें पिघल रही हैं, रेलवे ट्रैक विकृत हो रहे हैं, परिवहन प्रणालियाँ बाधित हैं और हजारों लोगों की मौत हो रही है। यह संकट दर्शाता है, कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का जोखिम नहीं बल्कि वर्तमान की वास्तविकता है।

पृष्ठभूमि

  • 2003 की यूरोपीय हीट वेव को कभी पीढ़ी में एक बार होने वाली घटना माना जाता था।
  • हालाँकि, विगत पाँच वर्षों में 4 बार गंभीर हीट वेव की समस्या देखी गई है।
  • यूरोप विश्व का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन गया है।
  • वैज्ञानिक सहमति इस प्रवृत्ति का कारण, बढ़ते ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तथा ग्लोबल वार्मिंग को मानती है।

प्रमुख प्रभाव

  • मानवीय प्रभाव: वर्तमान ग्रीष्म ऋतु के दौरान 2,000 से अधिक मौतों की सूचना प्राप्त हुई थी।
  • अवसंरचनात्मक हानि:
    • सड़कें पिघल रही हैं।
    • रेलवे ट्रैक मुड़ रहे हैं।
    • परिवहन में व्यवधान
    • जर्मनी और यूके जैसे देशों ने लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी।
  • एयर कंडीशनिंग पर चर्चा: यूरोप को “एयर-कंडीशंड सोसायटी” बनाने को लेकर एक राजनीतिक बहस प्रारंभ हो गई है।
    • वर्तमान स्थिति: लगभग 20% यूरोपियन लोगों के पास एयर कंडीशनर हैं।
    • पर्यावरणीय चिंताएण: एयर कंडीशनिंग से बिजली की खपत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ता है।
    • हालाँकि, स्पेस हीटिंग (कमरा गर्म करने की प्रणाली) वैश्विक उत्सर्जन में लगभग 10% का योगदान देती है। स्पेस कूलिंग (कमरा ठंडा करने की प्रणाली) लगभग 3% का योगदान देती है। यह चर्चा यूरोप की नीतिगत असंगति को उजागर करती है, क्योंकि इसने ऐतिहासिक रूप से हीटिंग प्रणाली पर भारी निर्भरता रखते हुए अत्यधिक एसी प्रयोग को हतोत्साहित किया।
  • ऊर्जा गरीबी (Energy Poverty): ऊर्जा गरीबी से तात्पर्य घरों की आवश्यक ऊर्जा सेवाओं को वहन करने में असमर्थता से है।
    • चुनौतियाँ:
      • बिजली की उच्च कीमतें
      • कूलिंग (ठंडा करने) की बढ़ती माँग
      • पावर ग्रिड पर दबाव
    • लेख किफायती एवं संधारणीय कूलिंग समाधानों का समर्थन करता है।
  • जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढाँचा:
    • यूरोप का बुनियादी ढाँचा मुख्य रूप से ठंडे मौसम के लिए डिजाइन किया गया था।
    • हाल की घटनाएँ बुनियादी ढाँचे को निम्नलिखित का सामना करने में सक्षम बनाने की आवश्यकता को प्रकट करती हैं:
      • हीट वेव
      • बाढ़
      • अन्य चरम जलवायु परिस्थितियाँ
  • भारत की पहल: भारत ने 2019 में आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन (CDRI) की शुरुआत की।
    • उद्देश्य: ऐसा बुनियादी ढाँचा विकसित करना, जो जलवायु से जुड़ी आपदाओं के दौरान भी कार्यात्मक बना रहे।
  • कृषि पर प्रभाव: जलवायु परिवर्तन ने कृषि क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
    • उदाहरण: फ्रांस ने अत्यधिक गर्मी के कारण अपने मक्का उत्पादन का लगभग एक तिहाई हिस्सा खो दिया।
    • पशुधन को हीट स्ट्रेस का सामना करना पड़ रहा है।
    • किसानों को अत्यधिक तापमान के घंटों के दौरान प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है।

आगे की राह

  • फसल विविधीकरण: किसानों को अधिक जल की खपत वाली और जलवायु-संवेदनशील फसलों से हटकर सूखा-प्रतिरोधी, उच्च-मूल्य वाली फसलों जैसे- मोटे अनाज, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों की ओर रुख करना चाहिए। यह जलवायु जोखिम को कम करता है, जल संरक्षण तथा किसानों की आय में वृद्धि करता है।
  • ऊष्मा-प्रतिरोधी फसल किस्मों को अपनाना: अनुसंधान और जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से ऐसी फसल किस्मों को विकसित और बढ़ावा देना, जो उच्च तापमान, सूखे और अनियमित वर्षा को सहन कर सकें। ये जलवायु-सहिष्णु बीज बदलते जलवायु परिवेश में कृषि उत्पादकता बनाए रखने में सहायता करते हैं।
  • जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियाँ: संधारणीय प्रथाओं को अपनाना, जैसे- सूक्ष्म सिंचाई, संरक्षण कृषि, कृषि वानिकी, वर्षा जल संचयन और मौसम आधारित परामर्श। ये उपाय जल के उपयोग की दक्षता में सुधार करते हैं, मृदा स्वास्थ्य में वृद्धि तथा चरम जलवायु परिस्थितियों के खिलाफ अनुकूलन बढ़ाते हैं।

निष्कर्ष

  • अत्यधिक तापमान “नया सामान्य” बन गया है। यूरोप को आपातकालीन प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर निम्नलिखित में निवेश करना चाहिए:
    • जलवायु अनुकूलन
    • लचीली अवसंरचना प्रणालियाँ
    • संधारणीय कूलिंग प्रौद्योगिकियाँ
    • दीर्घकालिक योजना
  • जलवायु परिवर्तन विकास के स्तर की चिंता किए बिना सभी देशों को प्रभावित करता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तथा बेहतर विकास आवश्यक हो जाता है।

मुख्य परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण शब्दावलियाँ

  • जलवायु लचीलापन: विभिन्न समुदायों, पारिस्थितिक तंत्र तथा बुनियादी ढाँचे की जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सहने, उनके साथ समायोजन तथा उनसे बाहर निकलने की क्षमता।
  • आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना: प्राकृतिक या जलवायु-प्रेरित आपदाओं के दौरान तथा बाद में कार्यात्मक रहने के लिए डिजाइन किया गया बुनियादी ढाँचा।
  • ऊर्जा गरीबी (Energy Poverty): घरों की विश्वसनीय, स्वच्छ और आधुनिक ऊर्जा सेवाओं तक पहुँचने या उन्हें वहन करने में असमर्थता।
  • संधारणीय शीतलन : ऐसे कूलिंग समाधान, जो ऊर्जा के उपयोग और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को न्यूनतम करते हुए तापीय आराम/अनुकूलन प्रदान करते हैं।
  • हीट एक्शन प्लान (HAP): प्रारंभिक चेतावनी, तैयारियों और सार्वजनिक जागरूकता के माध्यम से हीटवेव से होने वाली मौतों तथा आर्थिक नुकसान को कम करने की एक समन्वित रणनीति।
  • जलवायु अनुकूलन : संवेदनशीलता को कम करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए प्राकृतिक या मानव प्रणालियों में समायोजन।
  • जलवायु-लचीली कृषि : खेती के ऐसे तरीके, जो जलवायु परिवर्तनशीलता के अनुकूल होने और जलवायु से जुड़े जोखिमों को कम करते हुए उत्पादकता में वृद्धि करते हैं।
  • ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापन): मुख्य रूप से ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में होने वाली दीर्घकालिक वृद्धि।
  • चरम मौसमी घटनाएँ: जलवायु परिवर्तन से जुड़ी असामान्य रूप से गंभीर मौसमी घटनाएँ, जैसे- हीटवेव, बाढ़, सूखा, चक्रवात या तीव्र वर्षा।
  • लचीला बुनियादी ढाँचा: तीव्र प्रभावों को सहन करने, तेजी से समायोजन और प्रतिकूल परिस्थितियों में आवश्यक सेवाएँ प्रदान करना जारी रखने के लिए नियोजित, निर्मित तथा प्रबंधित बुनियादी ढाँचा।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. “जलवायु अनुकूलन में, वैश्विक दक्षिण अब केवल सूचना प्राप्तकर्ता नहीं बल्कि सूचना दाता बन गया है।” यूरोप के हालिया हीटवेव के अनुभव के आलोक में इस कथन का परीक्षण कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

यूरोप हीटवेव्स – एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या

Explore UPSC Foundation Batches

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.