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सार्वजनिक संपत्ति की चोरी

सार्वजनिक संपत्ति की चोरी 23 Jul 2026

संदर्भ

भारतीय रेलवे में यात्रियों द्वारा तौलिये, चादरें, कंबल तथा अन्य सुविधाओं की चोरी की घटनाएँ, जबकि इनमें कई शिक्षित एवं संपन्न वर्ग के लोग भी शामिल होते हैं, गंभीर नैतिक चिंताओं को जन्म देती हैं।

यह एक नैतिक मुद्दा क्यों है?

  • यह सत्यनिष्ठा (Integrity) का उल्लंघन है, क्योंकि व्यक्ति के घोषित मूल्यों और वास्तविक आचरण के बीच अंतर को दर्शाता है।
  • यह सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में प्रोबिटी (Probity) अर्थात् ईमानदारी एवं शुचिता का हनन करता है।
  • यह सार्वजनिक संस्थाओं में लोगों के विश्वास (Public Trust) को कमजोर करता है।
  • यह साझा राष्ट्रीय संपत्ति के प्रति नागरिक उत्तरदायित्व (Civic Responsibility) की कमी को दर्शाता है।

नैतिक आयाम

  • लालच बनाम आवश्यकता : संपन्न व्यक्तियों द्वारा चोरी आवश्यकता नहीं, बल्कि लालच, अधिकारबोध (Entitlement) और नैतिक उदासीनता का प्रतीक है।
  • नैतिक अंधापन : “सब ऐसा करते हैं” या “यह तो सरकार का सामान है” जैसे तर्क अनैतिक व्यवहार को सामान्य बना देते हैं।
  • सत्यनिष्ठा : वास्तविक नैतिक आचरण वही है जिसमें व्यक्ति बिना किसी निगरानी के भी सही कार्य करे।
  • सार्वजनिक जीवन में प्रोबिटी : सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग से सरकारी व्यय बढ़ता है और अंततः करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
  • सार्वजनिक विश्वास : ऐसी चोरी से सेवाओं की गुणवत्ता घटती है तथा सार्वजनिक संस्थानों पर लोगों का विश्वास कम होता है।
  • नागरिक चेतना : सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का मूलभूत कर्तव्य है।

नैतिक दृष्टिकोण 

  • अरस्तू का सद्गुण नैतिकशास्त्र : बार-बार किया गया अनैतिक आचरण व्यक्ति में बेईमानी और लालच जैसे दुर्गुणों को विकसित करता है तथा सद्गुणों को कमजोर करता है।
  • कांत का कर्तव्यवाद : चोरी नैतिक कर्तव्य का उल्लंघन है तथा सार्वभौमिकता के सिद्धांत (Universalisation Principle) पर भी खरी नहीं उतरती।
  • उपयोगितावाद (Bentham एवं Mill) : व्यक्ति को मिलने वाला छोटा निजी लाभ समाज को अधिक आर्थिक हानि पहुँचाता है, क्योंकि इससे सार्वजनिक व्यय बढ़ता है।
  • मैस्लो का आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत : संपन्न व्यक्तियों द्वारा चोरी यह दर्शाती है कि यह व्यवहार अपूर्ण आवश्यकताओं का नहीं, बल्कि लालच और स्वार्थ का परिणाम है।

क्या यह नैतिक दुविधा (Ethical Dilemma) है?

नहीं। यहाँ दो प्रतिस्पर्धी नैतिक मूल्यों के बीच कोई टकराव नहीं है। यह नैतिक अंधापन (Ethical Blindness) का मामला है, न कि नैतिक दुविधा का।

समाज पर प्रभाव 

  • आर्थिक प्रभाव: सामग्री के प्रतिस्थापन (Replacement) की लागत बढ़ती है तथा करदाताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है।
  • प्रशासनिक प्रभाव: सुरक्षा व्यवस्था पर अधिक खर्च करना पड़ता है, जिससे प्रशासनिक दक्षता प्रभावित होती है।
  • सामाजिक प्रभाव: ऐसे व्यवहार का सामान्यीकरण समाज में अनैतिक आचरण को बढ़ावा देता है तथा सामाजिक विश्वास को कमजोर करता है।
  • नैतिक प्रभाव: यह सत्यनिष्ठा, उत्तरदायित्व और सामूहिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों का क्षरण करता है।

आगे की राह 

  • नैतिक नागरिकता का विकास: मूल्य-आधारित शिक्षा को सुदृढ़ बनाया जाए।
  • व्यवहारगत हस्तक्षेप (Behavioural Interventions): जन-जागरूकता अभियान एवं व्यवहारगत प्रोत्साहन (Behavioural Nudges) अपनाए जाएँ।
  • उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना: कड़े प्रवर्तन (Enforcement) तथा सरल शिकायत एवं रिपोर्टिंग व्यवस्था विकसित की जाए।
  • नैतिक नेतृत्व को बढ़ावा देना: नेतृत्व स्तर पर सत्यनिष्ठा एवं जवाबदेही का उदाहरण प्रस्तुत किया जाए।
  • नागरिक चेतना का विकास: सार्वजनिक संपत्ति को साझा राष्ट्रीय धरोहर मानते हुए उसके संरक्षण की भावना विकसित की जाए।

निष्कर्ष

सार्वजनिक संपत्ति की चोरी, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, सत्यनिष्ठा, नागरिक उत्तरदायित्व और साझा संसाधनों के प्रति सम्मान में गिरावट का संकेत है। वास्तव में एक नैतिक समाज केवल बड़े स्तर के भ्रष्टाचार को रोकने से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक द्वारा दैनिक जीवन में ईमानदारी और नैतिक आचरण अपनाने से निर्मित होता है।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न: सार्वजनिक संपत्ति की चोरी केवल एक कानूनी अपराध नहीं, बल्कि सत्यनिष्ठा, प्रोबिटी एवं नागरिक उत्तरदायित्व के क्षरण का प्रतीक है।” इस कथन के आलोक में सार्वजनिक संपत्ति की चोरी के नैतिक आयामों का विश्लेषण कीजिए तथा इसे रोकने के लिए आवश्यक उपाय सुझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न: निम्नलिखित में से सदाचार (Integrity)’ का सर्वोत्तम अर्थ क्या है? (UPSC CSE Prelims 2013)

(a) केवल कानून का पालन करना।

(b) व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप ईमानदारी एवं निष्पक्षता के साथ कार्य करना।

(c) केवल आर्थिक लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखना।

(d) केवल वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पालन करना।

उत्तर: (b)

सार्वजनिक संपत्ति की चोरी

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