संदर्भ
संघवाद और पुलिसिंग के बीच टकराव तब उत्पन्न होता है जब कानून प्रवर्तन की कार्रवाई, जो अक्सर केंद्र या प्रतिद्वंद्वी राज्य सरकारों के प्रभाव में होती है, राज्यों की संवैधानिक रूप से सुनिश्चित स्वायत्तता में हस्तक्षेप करती है।
पुलिसिंग के बारे में
- परिभाषा: संयुक्त राष्ट्र के अनुसार पुलिसिंग केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक कार्य है।
- पुलिसिंग का दायरा: इसमें निवारक कार्य (अपराध होने से पहले उसे रोकना), निरोधक कार्य (परिणामों का भय उत्पन्न करना), और जाँच कार्य (अपराध के होने के बाद न्याय सुनिश्चित करना) शामिल हैं।
- मुख्य उद्देश्य: पुलिसिंग का अंतिम उद्देश्य सुरक्षा प्रदान करना और वैध प्राधिकरण के माध्यम से पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करना हैं।
अंतर-राज्यीय पुलिसिंग से संबंधित कानूनी अवधारणाएँ
- अधिकार-क्षेत्र (Jurisdiction): पुलिस का अधिकार संबंधित पुलिस स्टेशन या राज्य के क्षेत्राधिकार तक सीमित होता है; इस सीमा के बाहर शक्ति का प्रयोग करने के लिए कानूनी अनुमति आवश्यक है।
- अंतर-राज्यीय गिरफ्तारी प्रोटोकॉल: किसी अन्य राज्य में गिरफ्तारी करने से पहले स्थानीय पुलिस को सूचित करना अनिवार्य है।
- इसके अतिरिक्त, किसी भी तलाशी या जब्ती को क़ानूनी रूप से दो स्वतंत्र स्थानीय गवाहों की उपस्थिति में किया जाना चाहिए।
- ट्रांजिट रिमांड (CrPC सुरक्षा): यदि किसी आरोपी को दूसरे राज्य में गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करना और ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करना अनिवार्य है।
- आरोपी को ऐसी न्यायिक अनुमति के बिना ले जाना अवैध है।
- अनुच्छेद 246: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 246 सातवीं अनुसूची के माध्यम से संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करता है।
- तीन अनुसूची (The Three Lists): सातवीं अनुसूची में संघ सूची (97 विषय), राज्य सूची (66 विषय), और समानवर्ती सूची (47 विषय) शामिल हैं।
- राज्य सूची (प्रविष्टि 2): पुलिस राज्य का विषय है।
- इसका अर्थ है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है।
वर्त्तमान चुनौतियाँ
- राजनीतिक दुरुपयोग: राजनीतिक दल (केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर) अक्सर पुलिस बल का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को दबाने या डराने के लिए करते हैं।
- उदाहरण: 15 पुलिस अधिकारियों को छात्रों के प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करने के लिए राज्य की सीमाओं के पार भेजा गया, जबकि गंभीर अपराध और भ्रष्टाचार अक्सर अनसुलझे रह जाते हैं।
- प्रोटोकॉल की अनदेखी : उच्च-प्रोफ़ाइल मामलों में, राज्यों के बीच टकराव की स्थिति में पुलिस ने संवैधानिक सीमाओं की अनदेखी की और स्थानीय अधिकारियों को सूचित नहीं किया, जिससे विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई।
- पुलिस पेशेवरता में गिरावट: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा राजनीतिक नेतृत्व को खुश करने के लिए स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे पेशेवरता और निष्पक्षता में कमी आ रही है।
- औपनिवेशिक नियंत्रण संरचना: वर्ष 1861 का पुलिस अधिनियम अभी भी पुलिस पर राजनीतिक अधिकारियों को मजबूत नियंत्रण प्रदान करता है।
- डेविड बेले (David Bayley) के अनुसार, भारतीय पुलिस अक्सर कानून के शासन से अधिक राजनीतिक दबाव में कार्य करती है।
आगे की राह – सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्देशित पुलिस सुधार (2006)
- राज्य सुरक्षा आयोग: प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों के अनुसार, पुलिस के प्रदर्शन मानक तय करने और राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने के लिए स्वतंत्र आयोगों को सक्रिय किया जाए।
- नेतृत्व के लिए निश्चित कार्यकाल: सुरक्षा और स्वायत्तता को बढ़ावा देने के लिए पुलिस महानिदेशक (DGP) और अन्य प्रमुख अधिकारियों के लिए न्यूनतम दो वर्षीय कार्यकाल सुनिश्चित करना।
- जाँच और कानून-व्यवस्था का पृथक्करण: दक्षता और सजा दर बढ़ाने के लिए अपराध जाँच और कानून-व्यवस्था के कार्यों के लिए अलग-अलग शाखाएँ स्थापित करना।
- पुलिस शिकायत प्राधिकरण: सार्वजनिक/जन शिकायतों और पुलिस कदाचार को दूर करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर कार्यात्मक निगरानी निकाय स्थापित करना।
- विधायी सुधार: वर्ष 1861 के पुलिस अधिनियम को आधुनिक, जवाबदेही-आधारित कानून से बदलना और अंतर-राज्यीय समन्वय तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है।
निष्कर्ष
संघवाद और पुलिसिंग के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए संवैधानिक सीमाओं का कड़ाई से पालन, राजनीतिक हस्तक्षेप से पुलिस को मुक्त करना तथा पुलिस सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है, ताकि कानून के शासन (Rule of Law) को सुदृढ़ किया जा सके।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: संविधान के तहत सार्वजनिक व्यवस्था और पुलिस राज्य विषय हैं, फिर भी केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती भूमिका केंद्रीकरण में वृद्धि को दर्शाती है। अनुच्छेद 246 और सप्तम अनुसूची के संदर्भ में चर्चा करें।
(10 अंक, 150 शब्द)
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