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सबमरीन केबलों का भू-राजनीतिक महत्त्व : स्वामित्व और मरम्मत

सबमरीन केबलों का भू-राजनीतिक महत्त्व : स्वामित्व और मरम्मत 11 Jul 2026

संदर्भ

  • हाल ही में सबमरीन केबलें भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया क्षेत्र बनकर उभरी हैं, क्योंकि इनके माध्यम से विश्व के लगभग 99% इंटरनेट ट्रैफिक का संचार होता है और यह वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था के एक स्तंभ के रूप में भी है।
  • लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने समुद्र के भीतर बिछे संचार नेटवर्कों की संवेदनशीलता और असुरक्षा को उजागर किया है।
  • अब चर्चा का केंद्र तेल और ऊर्जा की भू-राजनीति से आगे बढ़कर डिजिटल अवसंरचना की भू-राजनीति पर आ गया है।

सबमरीन केबलें क्या हैं?

  • सबमरीन केबलें समुद्र की तलहटी (Seabed) पर बिछाई जाने वाली फाइबर-ऑप्टिक संचार केबलें हैं, जिनका उपयोग महाद्वीपों के मध्य इंटरनेट, वॉयस कॉल, वित्तीय लेन-देन तथा क्लाउड डेटा के तीव्र संचार के लिए किया जाता है।
  • ये केबलें विश्व के विभिन्न देशों को एक उच्च गति वाले संचार नेटवर्क के साथ से जोड़ती हैं और लगभग पूरे वैश्विक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र (Digital Ecosystem) को सहायता प्रदान करती हैं।
  • लोकप्रिय धारणा के विपरीत, उपग्रह (Satellites) वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक का केवल एक छोटा हिस्सा वहन करते हैं, जबकि लगभग 99% अंतरराष्ट्रीय डेटा का संचार सबमरीन केबलों के माध्यम से होता है।
  • ये वैश्विक अर्थव्यवस्था के डिजिटल नर्वस सिस्टम के रूप में कार्य करती है तथा बैंकिंग, ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान, क्लाउड कंप्यूटिंग और अंतरराष्ट्रीय संचार जैसी सेवाओं को सक्षम बनाती हैं।

सबमरीन (पनडुब्बी) केबलों का सामरिक महत्त्व 

  • वैश्विक वित्तीय प्रणाली: वास्तविक समय में बैंकिंग लेन-देन तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निपटान के लिए वैश्विक वित्तीय प्रणालियाँ निर्बाध सबमरीन केबल कनेक्टिविटी पर निर्भर करती हैं।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग: क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाएँ विश्वभर के डेटा केंद्रों के मध्य तीव्र गति से डेटा स्थानांतरण सुनिश्चित करने के लिए इन केबलों पर निर्भर रहती हैं।
  • डिजिटल भुगतान: UPI जैसे डिजिटल भुगतान प्लेटफ़ॉर्म सीमा-पार (Cross-border) लेन-देन के लिए सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय संचार अवसंरचना की आवश्यकता रखते हैं, जिसका प्रमुख आधार सबमरीन केबलें हैं।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा एवं शासन: सरकारें, रक्षा प्रतिष्ठान तथा व्यावसायिक संस्थान सुरक्षित संचार और डेटा के आदान-प्रदान के लिए सबमरीन केबलों पर निर्भर करते हैं।
  • व्यापक प्रभाव: सबमरीन केबल कनेक्टिविटी में किसी भी प्रकार का व्यवधान राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता तथा डिजिटल शासन पर गंभीर और व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

प्रमुख वैश्विक सबमरीन केबल प्रणालियाँ

  • 2Africa Cable: 2अफ्रीका केबल विश्व की सबसे बड़ी सबमरीन केबल परियोजनाओं में से एक है। इसकी लंबाई लगभग तकरीबन 45,000 किमी है तथा इसकी डेटा वहन क्षमता लगभग 180 टेराबिट प्रति सेकंड है। यह अफ्रीका, यूरोप और एशिया को आपस में जोड़ती है।
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाली प्रमुख केबल प्रणालियाँ:
    • एएई-1 (Asia-Africa-Europe-1)
    • फॉल्कन 
    • जीबीआई
    • टीजीएन-गल्फ 

ये सबमरीन केबलें एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप के मध्य डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करती हैं तथा अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट एवं डेटा संचार की महत्त्वपूर्ण आधारभूत संरचना का निर्माण करती हैं।

सामरिक चोकपॉइंट्स और उभरते जोखिम

लाल सागर 

  • लाल सागर विश्व के सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल चोकपॉइंट्स में से एक है, जहाँ से लगभग 10 प्रमुख सबमरीन केबलें इस संकरे समुद्री मार्ग (Maritime Corridor) से होकर गुजरती हैं।
  • ये केबलें दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा मध्य पूर्व को यूरोप से जोड़ती हैं।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य 

  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य एक अन्य महत्वपूर्ण सामरिक चोकपॉइंट है, जहाँ से अनेक सबमरीन केबल प्रणालियाँ होकर गुजरती हैं।
  • इस क्षेत्र में क्षेत्रीय अस्थिरता या सशस्त्र संघर्ष वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकते हैं।

संभावित जोखिम

  • नौसैनिक संघर्ष
  • जहाजों के लंगर
  • विस्फोट
  • प्राकृतिक आपदाएँ
  • तोड़फोड़

इन सभी कारणों से सबमरीन केबलों को क्षति पहुँच सकती है।

सबमरीन केबलों में व्यवधान के संभावित प्रभाव

  • इंटरनेट सेवाओं का बाधित होना
  • बैंकिंग सेवाओं में व्यवधान
  • क्लाउड सेवाओं का विफल होना
  • संचार व्यवस्था का ठप पड़ना
  • प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों का ठहराव या आर्थिक पक्षाघात

सबमरीन केबलों का स्वामित्व पैटर्न

 कंसोर्टियम आधारित स्वामित्व

  • वैश्विक इंटरनेट अवसंरचना का स्वामित्व किसी एक संगठन के पास नहीं है।
  • लगभग 470 विभिन्न संस्थाएँ अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम के माध्यम से संयुक्त रूप से सबमरीन केबल प्रणालियों का स्वामित्व रखती हैं।
  • यह सहयोगात्मक मॉडल वित्तीय लागत तथा संचालन संबंधी जिम्मेदारियों को अनेक हितधारकों के मध्य विभाजित करता है।

पारंपरिक हितधारक 

  • ऐतिहासिक रूप से सबमरीन केबलों का स्वामित्व मुख्यतः दूरसंचार कंपनियों के पास रहा है, जिनमें प्रमुख हैं—
    • ऑरेंज (Orange)
    • ब्रिटिश टेलीकॉम
    • वोडाफोन
    • टेल्स्ट्रा (Telstra)
    • टाटा कम्यूनिकेशन
  • इन कंपनियों ने वैश्विक दूरसंचार सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए अनेक अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबल प्रणालियों में निवेश किया।

हाइपरस्केलर्स का बढ़ता प्रभाव

  • बड़े प्रौद्योगिकी निगम, जिन्हें हाइपरस्केलर्स कहा जाता है, अब सीधे सबमरीन केबल अवसंरचना में निवेश कर रहे हैं।
  • प्रमुख हाइपरस्केलर्स में शामिल हैं—
    • गूगल
    • ऐमज़ान
    • मेटा
  • ये कंपनियाँ अधिक नेटवर्क विश्वसनीयता , संचालनात्मक स्वतंत्रता तथा वैश्विक क्लाउड सेवाओं पर बेहतर नियंत्रण प्राप्त करने के उद्देश्य से निवेश कर रही हैं।

उदाहरण

  • गूगल की लगभग 34 सबमरीन केबल प्रणालियों में हिस्सेदारी है।
  • मेटा लगभग 19 सबमरीन केबल प्रणालियों में भागीदार है।

डिजिटल संप्रभुता और भू-राजनीति

  • डिजिटल युग में राष्ट्रीय संप्रभुता केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें डिजिटल अवसंरचना पर नियंत्रण भी शामिल हो गया है।
  • देश अब सबमरीन केबलों के स्वामित्व को अपनी सामरिक स्वायत्तता का एक आवश्यक घटक मानने लगे हैं।

अधिक स्वामित्व से प्राप्त होने वाले प्रमुख लाभ

  • डेटा सुरक्षा में वृद्धि
  • सामरिक लचीलापन को मजबूती
  • आपूर्ति शृंखला की विश्वसनीयता में सुधार
  • डिजिटल स्वतंत्रता को बढ़ावा

उभरती भू-राजनीतिक वास्तविकता

  • वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में डिजिटल नेटवर्कों पर नियंत्रण धीरे-धीरे सामरिक प्रभाव का पर्याय बनता जा रहा है।
  • अर्थात, जिस देश का डिजिटल अवसंरचना और संचार नेटवर्क पर अधिक नियंत्रण होगा, उसकी भू-राजनीतिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव भी उतना ही अधिक होगा।

मरम्मत एवं रखरखाव की चुनौतियाँ 

  • जटिल मरम्मत कार्य 
    • सबमरीन केबलों की मरम्मत तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन होती है, क्योंकि ये केबलें समुद्र की सतह से हजारों मीटर नीचे स्थित होती हैं।
    • समुद्र के भीतर मरम्मत कार्य के लिए विशेषीकृत उपकरण तथा उच्च प्रशिक्षित विशेषज्ञ कर्मियों की आवश्यकता होती है।
  • केबलों में बार-बार खराबी
    • विश्वभर में प्रतिवर्ष लगभग 150–200 सबमरीन केबल खराबियाँ दर्ज की जाती हैं।
    • इनकी मरम्मत में औसतन 55 दिन का समय लगता है, जबकि जटिल मामलों में यह अवधि इससे कहीं अधिक हो सकती है।
  • सीमित मरम्मत क्षमता 
    • विश्वभर में केवल लगभग 63 विशेषीकृत सबमरीन केबल मरम्मत पोत ही कार्यरत हैं।
    • इन जहाजों में उन्नत प्रौद्योगिकी तथा अत्यधिक कुशल चालक दल की आवश्यकता होती है।
    • यदि एक साथ कई स्थानों पर केबल क्षतिग्रस्त हो जाएँ, तो सीमित मरम्मत क्षमता के कारण उनकी बहाली (Restoration) में काफी विलंब हो सकता है।

उदाहरण 

  • वियतनाम और सिंगापुर के बीच स्थित AAE-1 (Asia-Africa-Europe-1) सबमरीन केबल की मरम्मत में कथित रूप से लगभग 177 दिन लगे, जो सबमरीन केबलों की बहाली प्रक्रिया की जटिलता को दर्शाता है।

सबमरीन केबलों की मरम्मत में अंतरराष्ट्रीय सहयोग 

  • विभिन्न देश क्षेत्रीय रखरखाव समझौतों में भाग लेते हैं, ताकि मरम्मत संबंधी संसाधनों और विशेषज्ञता को साझा किया जा सके।
  • भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया एवं हिंद महासागर केबल अनुरक्षण समझौते (SEAIOCMA) का सदस्य है।
  • यद्यपि यह सहयोगात्मक व्यवस्था शांतिकाल में प्रभावी ढंग से कार्य करती है, लेकिन भू-राजनीतिक संघर्ष की स्थिति में विभिन्न देशों की प्रतिस्पर्धी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के कारण मरम्मत सहायता में विलंब हो सकता है।

केबल सुरक्षा का आकलन 

  • स्वामित्व सूचकांक 
    • स्वामित्व सूचकांक किसी देश की सबमरीन केबल अवसंरचना पर नियंत्रण की मात्रा का आकलन उसके स्वामित्व हिस्से तथा केबल क्षमता के आधार पर करता है।
    • उच्च स्वामित्व हिस्सेदारी यह दर्शाता है कि संबंधित देश का डिजिटल अवसंरचना पर अधिक सामरिक नियंत्रण है।
  • मरम्मत सूचकांक
    • रिपेयर इंडेक्स यह मूल्यांकन करता है कि किसी देश के पास पर्याप्त केबल मरम्मत पोत उपलब्ध हैं या नहीं तथा उसके मरम्मत सहयोगी भू-राजनीतिक दृष्टि से अनुकूल हैं या नहीं।
    • जिन देशों की मरम्मत क्षमता अधिक मजबूत होती है, वे सबमरीन केबलों में व्यवधान की स्थिति में अधिक सरलता और शीघ्र पुनर्बहाली की क्षमता रखते हैं।

भारत के लिए निहितार्थ 

  • भारत की तीव्र गति से विकसित हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था सुरक्षित एवं लचीली सबमरीन केबल कनेक्टिविटी पर अत्यधिक निर्भर है।
  • डिजिटल इंडिया, UPI, क्लाउड कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा डेटा सेंटरों के तीव्र विस्तार के साथ समुद्र के भीतर स्थित संचार अवसंरचना पर भारत की निर्भरता और अधिक बढ़ेगी।
  • हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region – IOR) में भारत की सामरिक स्थिति उसे क्षेत्रीय डिजिटल कनेक्टिविटी हब के रूप में विकसित होने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।
  • हालाँकि, विदेशी स्वामित्व वाली डिजिटल अवसंरचना पर अत्यधिक निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा तथा डिजिटल संप्रभुता के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न करती है।

आगे की राह 

  • भारतीय स्वामित्व को बढ़ावा देना: टाटा कम्युनिकेशंस, रिलायंस जियो तथा भारती एयरटेल (Bharti Airtel) जैसी भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबल कंसोर्टियम में अपनी भागीदारी बढ़ानी चाहिए।
  • स्वदेशी मरम्मत क्षमता का विकास : विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत को विशेषीकृत सबमरीन केबल मरम्मत पोतों का अपना बेड़ा (Fleet) विकसित करना चाहिए।
  • सामरिक वैकल्पिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना : सीमित समुद्री चोकपॉइंट्स पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए अनेक वैकल्पिक सबमरीन केबल मार्ग विकसित किए जाने चाहिए।
  • आपातकालीन केबल भंडार का निर्माण : आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित मरम्मत सुनिश्चित करने के लिए सबमरीन केबलों के स्पेयर पार्ट्स का रणनीतिक भंडार तटीय लॉजिस्टिक्स केंद्रों पर बनाए रखा जाना चाहिए।
  • समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना : भारत को भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल तथा समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness – MDA) पहलों के माध्यम से महत्वपूर्ण समुद्र-तल डिजिटल अवसंरचना की निगरानी और सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विस्तार: भारत को क्वाड (Quad), हिंद महासागर रिम संघ (IORA) तथा अन्य हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) साझेदारियों के माध्यम से सहयोग को और गहरा करना चाहिए, ताकि समुद्र के भीतर स्थित डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा और संरक्षण को सुदृढ़ बनाया जा सके।

निष्कर्ष 

  • सबमरीन केबलें डिजिटल युग की सबसे महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं में शामिल हो गई हैं। औद्योगिक युग में जिस प्रकार तेल पाइपलाइनें वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा थीं, उसी प्रकार आज सबमरीन केबलें वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी हैं।
  • भविष्य में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र डिजिटल कनेक्टिविटी, डेटा संप्रभुता तथा महत्वपूर्ण संचार अवसंरचना की सुरक्षा पर अधिक केंद्रित रहेगा।
  • भारत के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और आत्मनिर्भर डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु सबमरीन केबलों में स्वामित्व बढ़ाना, स्वदेशी मरम्मत क्षमता विकसित करना तथा सामरिक लचीलापन को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक होगा।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न: वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए सबमरीन (पनडुब्बी) केबलें एक महत्वपूर्ण आधारभूत अवसंरचना के रूप में उभरी हैं, फिर भी उनका स्वामित्व और सुरक्षा भू-राजनीतिक व्यवधानों के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं। चर्चा कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

सबमरीन केबलों का भू-राजनीतिक महत्त्व : स्वामित्व और मरम्मत

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