संदर्भ:
जापान के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के समय भारत-जापान रणनीतिक तथा वैश्विक साझेदारी को सुदृढ़ किया है।
- दोनों देशों ने वैश्विक शक्ति संतुलन में परिवर्तन से स्वतंत्र होकर द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
- चीन की बढ़ती आक्रामकता और प्रमुख शक्तियों की बदलती रणनीतिक प्राथमिकताओं की पृष्ठभूमि में, भारत तथा जापान ने एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत (FOIP) के लिए एक अद्यतन दृष्टिकोण का अनावरण किया।
- यह पहल गहन द्विपक्षीय सहयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा, लचीली आपूर्ति शृंखलाओं और एक नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने का प्रयास करती है।
पृष्ठभूमि
- भारत और जापान ने 2014 में अपने संबंधों को एक विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का रूप दिया था।
- दोनों देश निम्नलिखित चिंताओं को साझा करते हैं:
- नौवहन की स्वतंत्रता
- चीन की बढ़ती समुद्री आक्रामकता
- आपूर्ति शृंखला लचीलापन
- ऊर्जा सुरक्षा
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता
- उनकी साझेदारी लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन और अंतरराष्ट्रीय कानूनों द्वारा निर्देशित है।
प्रमुख अवधारणाएँ:
- स्वतंत्र और खुला हिंद-प्रशांत (FOIP): FOIP एक रणनीतिक दृष्टिकोण है, जिसे मूल रूप से जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
- यह सुनिश्चित करना चाहता है:
- नौवहन की स्वतंत्रता
- अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान
- निर्बाध समुद्री व्यापार
- विवादों का शांतिपूर्ण समाधान
- अद्यतन FOIP बहुपक्षीय व्यवस्थाओं में अनिश्चितताओं के बावजूद द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के भारत तथा जापान के उद्देश्यों को दर्शाता है।
- क्वाड (Quad): चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (Quad) में शामिल हैं:
- भारत
- जापान
- संयुक्त राज्य अमेरिका
- ऑस्ट्रेलिया
- यह क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा तथा नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हुए एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देता है।
- बिम्सटेक (BIMSTEC): ‘बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन’ (BIMSTEC) दक्षिण एशिया को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ता है।
- यह आर्थिक एकीकरण, कनेक्टिविटी और समुद्री सहयोग के लिए एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय मंच के रूप में विकसित हुआ है।
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA):
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता का तात्पर्य समुद्री क्षेत्र में गतिविधियों से संबंधित जानकारी की प्रभावी निगरानी तथा साझाकरण से है।
- यह समुद्री डकैती, अवैध शिकार, तस्करी और शत्रुतापूर्ण नौसैनिक गतिविधियों के खिलाफ निगरानी को बढ़ाता है।
यात्रा के प्रमुख परिणाम
- ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना
- दोनों देश वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधानों के खिलाफ लचीलेपन में सुधार करने पर सहमत हुए।
- उन्होंने खाड़ी क्षेत्र से तेल तथा गैस के सुरक्षित और निर्बाध परिवहन पर बल दिया।
- समुद्री सहयोग
- भारत और जापान निम्नलिखित पर सहमत हुए:
- सुरक्षित समुद्री परिवहन गलियारे विकसित करना
- नौसैनिक सहयोग बढ़ाना
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता में सुधार करना
- निगरानी और अनुरक्षण अभियानों के लिए संयुक्त रूप से नौसैनिक प्लेटफॉर्म विकसित करना।
- रक्षा और सुरक्षा सहयोग
- दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दुहराई।
- उन्होंने पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर के घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की, तथा अंतर्राष्ट्रीय कानून के सम्मान पर बल दिया।
- पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी
- जापान ने भारत के पूर्वोत्तर में बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
- विस्तारित कनेक्टिविटी से भारत की एक्ट ईस्ट नीति के तहत पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों के साथ एकीकृत करने की उम्मीद है।
भारत के लिए रणनीतिक महत्त्व
- चीन की आक्रामकता का मुकाबला करना
- क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करने वाली एकतरफा कार्रवाइयों के जवाब में रणनीतिक समन्वय का विस्तार करता है।
- समुद्री संचार मार्गों (SLOCs) को सुरक्षित करना
- सुरक्षित समुद्री मार्गों के माध्यम से निर्बाध समुद्री व्यापार तथा ऊर्जा आयात सुनिश्चित करता है।
- आपूर्ति शृंखला विविधीकरण
- एकल-देश विनिर्माण नेटवर्क पर निर्भरता को कम करता है।
- लचीली और विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाओं को बढ़ावा देता है।
- बुनियादी ढाँचे का विकास
- जापानी निवेश विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास को मजबूत करता है।
- क्षेत्रीय स्थिरता
- अंतरराष्ट्रीय कानून और शांतिपूर्ण विवाद समाधान पर आधारित एक नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करता है।
संबंधित चुनौतियाँ
- चीन की बढ़ती सैन्य और समुद्री आक्रामकता।
- प्रमुख शक्तियों की बदलती रणनीतिक प्राथमिकताओं के कारण भू-राजनीतिक अनिश्चितता।
- वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की संवेदनशीलता।
- क्षेत्रीय संघर्ष, जो समुद्री वाणिज्य को प्रभावित करते हैं।
- द्विपक्षीय पहलों के निरंतर कार्यान्वयन की आवश्यकता।
आगे की राह
- नियमित संयुक्त अभ्यासों और खुफिया जानकारी साझा करने के माध्यम से, रक्षा तथा समुद्री सहयोग का विस्तार करना।
- उभरती प्रौद्योगिकियों, सेमीकंडक्टर, एआई और महत्त्वपूर्ण खनिजों में सहयोग का विस्तार करना।
- पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाली कनेक्टिविटी परियोजनाओं में तेजी लाना।
- अधिक औद्योगिक सहयोग के माध्यम से लचीली आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करना।
- निरंतर राजनयिक सहयोग के माध्यम से एक स्थिर, समावेशी तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. बदलती वैश्विक भू-राजनीति और बहुपक्षीय समूहों के आसपास की अनिश्चितताओं की पृष्ठभूमि में, भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में अपडेटेट ‘स्वतंत्र तथा खुले हिंद-प्रशांत (FOIP)’ रणनीति के महत्त्व का मूल्यांकन कीजिए। ऊर्जा सुरक्षा और पूर्वोत्तर भारत के विकास के विशेष संदर्भ में चर्चा कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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