संदर्भ:
वर्ष 2026-2027 की जनगणना भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना है। इसे कोविड-19 के कारण वर्ष 2021 में स्थगित किया गया था और यह महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसके आँकड़े भविष्य में परिसीमन (निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण) का आधार बनेंगे।
- जनगणना की प्रक्रिया और चरण: जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाती है:
-
- गृह सूचीकरण (House Listing)
- जनसंख्या गणना (Population Enumeration)
- गणना पद्धति: भारत “विस्तारित वास्तविक (Extended De-facto)” पद्धति का उपयोग करता है। इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति को उसकी सामान्य निवास स्थान पर तब गिना जाता है, यदि वह जनगणना से पहले पिछले 20 दिनों में कम से कम एक दिन वहाँ रहा हो, बजाय इसके कि उसे केवल उसी स्थान पर गिना जाए जहाँ वह जनगणना के दिन पाया जाता है।
- NRI संबंधी समस्या: वर्तमान में, अनिवासी भारतीयों (NRIs) को सामान्यतः जनगणना से बाहर रखा जाता है। इससे केरल या पंजाब जैसे राज्यों को संसदीय सीटें खोनी पड़ सकती हैं क्योंकि उनकी जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा (राष्ट्रीय स्तर पर 1.58 करोड़ से अधिक NRI) गणना में शामिल नहीं होता।
- डिजिटल चुनौतियाँ:
- तकनीकी साक्षरता: जनगणना कराने वाले लगभग 30 लाख शिक्षकों में से कई डिजिटल ऐप के उपयोग में कठिनाई का अनुभव कर सकते हैं, जिससे वे मैनुअल पेपर प्रविष्टियों का सहारा ले सकते हैं, जिससे त्रुटियों और गोपनीयता के उल्लंघन का जोखिम बढ़ सकता है।
- आँकड़ों की जटिलता: अत्यधिक जटिल मैनुअल (जैसे दिव्यांगता की परिभाषा के लिए छह पृष्ठों का मैनुअल) के कारण अक्सर शिक्षक विवरणों को छोड़ देते हैं, जिससे “अप्रासंगिक या गलत डेटा (Garbage data)” का एकत्रण हो जाता है।
- स्व-गणना (Self-Enumeration) के जोखिम: नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी भरने की अनुमति दी जा रही है। यदि लोग निर्देशों को ठीक से न पढ़ें, तो गलत या फर्जी प्रविष्टियाँ हो सकती हैं। इससे डेटा की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
निष्कर्ष
डिजिटल जनगणना को प्रभावी बनाने के लिए सरकार को:
- स्थानीय भाषाओं में सरल प्रश्न उपलब्ध कराने की आवश्यकता है |
- व्यापक फील्ड परीक्षण को सुविधाजनक बनाना |
- इसके अतिरिक्त NRI आबादी को शामिल करने की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।
तभी निष्पक्ष राजनीतिक प्रतिनिधित्व और विश्वसनीय जनसंख्या आँकड़े सुनिश्चित किए जा सकेंगे।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न: “2027 की पूर्णतः डिजिटल जनगणना अभूतपूर्व अवसर प्रदान करती है, किंतु यह पद्धतिगत एवं सामाजिक-तकनीकी चुनौतियों से भी घिरी हुई है।” विश्लेषण कीजिए।
( 10 अंक, 150 शब्द)
|