संदर्भ:
यह चर्चा हाल ही में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राजा सुब्रमण्यम को नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में नियुक्त किए जाने पर केंद्रित है।
- इस नियुक्ति ने इस पद के महत्व, इसके गठन के इतिहास तथा चयन के लिए सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली विशिष्ट प्रक्रियाओं पर एक चर्चा को जन्म दिया है।
CDS नियुक्तियों की घटनाक्रम
| समय-रेखा |
CDS नियुक्ति |
मुख्य तथ्य |
| जनवरी 2020 |
विपिन रावत |
सेना प्रमुख के रूप में कार्यकाल पूरा करने के बाद पहले CDS नियुक्त किए गए; दिसंबर 2021 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो गया। |
| लगभग 1 वर्ष का अंतराल |
पद रिक्त रहा |
इसे भारत की उच्च रक्षा नेतृत्व संरचना में एक बड़ी कमी माना गया। |
| सितंबर 2022 |
अनिल चौहान |
दूसरे CDS के रूप में नियुक्त किए गए; 4-स्टार अधिकारी का पदभार संभाला। |
| मई 2024 |
एन. एस. राजा सुब्रमणि |
तीसरे CDS के रूप में नियुक्त; इससे पहले सैन्य कमांडर और सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य कर चुके है। |
CDS पद की आवश्यकता और गठन
- एकल सैन्य सलाहकार की आवश्यकता: ऐतिहासिक रूप से, भारतीय सरकार को संघर्षों के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ा क्योंकि तीनों सेनाएँ (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) अक्सर अलग-अलग राय प्रस्तुत करती थीं। निर्णय-प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए “एकल सैन्य सलाहकार” की आवश्यकता कारगिल युद्ध के बाद अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई।
- सिफारिशें: दो प्रमुख समितियों—कारगिल समीक्षा समिति और नरेश चंद्र टास्क फोर्स—ने सरकार को सैन्य मामलों पर सलाह देने के लिए इस पद के सृजन की सिफारिश की थी।
- स्थापना: सरकार ने वर्ष 2019 में आधिकारिक रूप से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के पद का गठन किया।
मुख्य भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ: CDS तीन प्रमुख तकनीकी एवं सलाहकारी भूमिकाएँ निभाता है:
- एकल सैन्य सलाहकार: सरकार को एकीकृत सैन्य सलाह प्रदान करता है।
- सैन्य मामलों के विभाग के सचिव: रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सैन्य मामलों के विभाग में सचिव-स्तरीय अधिकारी के रूप में कार्य करना।
- चीफ ऑफ स्टाफ समिति के स्थायी अध्यक्ष: यह तीनों सशस्त्र सेवाओं के प्रमुखों वाली समिति का नेतृत्व करता है।
हाल की नियुक्तियों से जुड़ी चिंताएँ
लेखक द्वारा वर्त्तमान नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण चिंताएँ व्यक्त की गई हैं:
- सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति: परंपरागत रूप से सैन्य परंपराएँ सेवारत अधिकारियों को प्राथमिकता देती हैं। हालाँकि, जून 2022 में नियम परिवर्तन के बाद, सरकार ने इस चार-स्टार पद पर सेवानिवृत्त तीन-स्टार अधिकारियों की नियुक्ति शुरू की है, जिसे लेखक के अनुसार सेवारत अधिकारियों के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- राजनीतिकरण और “निकटता”: हाल के नियुक्त अधिकारी (जैसे अनिल चौहान और राजा सुब्रमण्यम) राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य कर चुके हैं। लेखक इस बात को लेकर चिंता व्यक्त करता है कि कार्यपालिका के साथ यह निकट संबंध सैन्य नियुक्तियों के राजनीतिकरण को जन्म दे सकता है, तथा इस बात पर जोर देता है कि चयन प्रक्रिया केवल वरिष्ठता पर नहीं बल्कि योग्यता पर आधारित होनी चाहिए, साथ ही यह प्रक्रिया पारदर्शी भी होनी चाहिए।
- सेवा पक्षपात (थल सेना का प्रभुत्व): अब तक सभी तीन CDS नियुक्तियाँ (जनरल विपिन रावत, अनिल चौहान और राजा सुब्रमण्यम) थल सेना से रहे हैं। लेखक का तर्क है कि चूँकि आधुनिक युद्ध बहुआयामी है—जिसमें साइबर और अंतरिक्ष युद्ध भी शामिल हैं—इसलिए नौसेना और वायु सेना के अधिकारियों को भी नेतृत्व का अवसर दिया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
- यद्यपि भारतीय सशस्त्र बलों में “संयुक्तता और पारस्परिक संचालन क्षमता” (Jointness and Interoperability) की दिशा में CDS पद का सृजन एक आवश्यक कदम था, तथापि सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति की वर्त्तमान प्रवृत्ति तथा चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कथित कमी विवाद के विषय हैं।
- लेखक का सुझाव है कि इस पद को प्रभावी बनाए रखने और सैन्य मनोबल को बनाए रखने के लिए सरकार को सेना की विभिन्न शाखाओं के बीच अधिक संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना चाहिए तथा सैन्य विशेषज्ञता और राजनीतिक प्रभाव के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना चाहिए।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के पद का सृजन भारत की उच्च रक्षा संगठन व्यवस्था में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर था। तथापि, नियुक्ति प्रक्रिया में बार-बार सामने आने वाली विसंगतियाँ तथा युद्ध क्षेत्र संबंधी कमांड्स के क्रियान्वयन में हो रही देरी गंभीर चिंताओं को जन्म देती हैं। समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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