संदर्भ:
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने फुटपाथों पर सुरक्षित रूप से यात्रा के अधिकार (राइट टू वॉक) को अनुच्छेद 19(1)(d) और अनुच्छेद 21 का एक अभिन्न अंग माना है, तथा इस बात की पुष्टि की है कि पैदल यात्रियों के अधिकार संवैधानिक स्वतंत्रता, शहरी शासन और एक समावेशी सार्वजनिक क्षेत्र के लिए केंद्रीय हैं।
राइट टू वॉक की संवैधानिक मान्यता:
- मूल अधिकार : सर्वोच्च न्यायालय ने फुटपाथों पर सुरक्षित रूप से चलने के अधिकार को आवागमन की स्वतंत्रता [अनुच्छेद 19(1)(d)] और जीवन के अधिकार [अनुच्छेद 21] के एक अविभाज्य घटक के रूप में मान्यता दी है, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर पैदल यात्रियों के दावे को बल मिला है।
- सार्वजनिक स्थानों पर पुनः दावा: यह निर्णय शहरी नियोजन के वाहन-केंद्रित दृष्टिकोण को चुनौती देता है, और यह पुष्टि करता है कि फुटपाथ मुख्य रूप से पैदल यात्रियों के लिए हैं, न कि बुनियादी ढाँचे या अतिक्रमण के लिए बची हुई जगह के रूप में।
- समावेशी शहरी गतिशीलता को मजबूत करना: पैदल यात्रियों के अधिकारों को मान्यता देना समान पहुँच, सड़क सुरक्षा और समावेशी गतिशीलता को बढ़ावा देता है, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों, दिव्यांग व्यक्तियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए।
भारत के सभ्यतागत और राजनीतिक लोकाचार में राइट टू वॉक:
- सभ्यतागत महत्त्व: अनुष्ठानों में देवी लक्ष्मी के पदचिह्नों से लेकर सिद्धार्थ, गुरु नानक और चैतन्य की यात्राओं तक, यात्रा (वॉक) लंबे समय से भारत की सांस्कृतिक परंपराओं में समाहित रहा है, जो आध्यात्मिकता, अधिगम और सामाजिक एकीकरण का प्रतीक है।
- लोकतांत्रिक लामबंदी का साधन: महात्मा गांधी की दांडी यात्रा, सुभाष चंद्र बोस का “दिल्ली चलो” और अनगिनत विरोध मार्च जैसे ऐतिहासिक आंदोलन दर्शाते हैं, कि कैसे यात्रा करना – राजनीतिक भागीदारी और प्रतिरोध का एक शक्तिशाली साधन रहा है।
- साहित्य और कला में उपस्थिति: रवींद्रनाथ टैगोर की “एकला चलो रे”, जीवनानंद दास की ‘बनलता सेन’ और नंदलाल बोस की “बापूजी” जैसी रचनाएँ स्वतंत्रता, आत्म-खोज और नैतिक साहस के प्रतीक के रूप में यात्रा को प्रतिबिंबित करती हैं।
यात्रा और आधुनिक शहरी जीवन:
- आधुनिकता के प्रतीक के रूप में यात्रा: यात्रा चिंतन, सामाजिक संपर्क और सार्वजनिक स्थानों के साथ जुड़ाव को प्रोत्साहित करती है, जिससे शहर अधिक समावेशी, रहने योग्य और मानव-केंद्रित बनते हैं।
- वाहन-केंद्रित विकास : मोटर वाहनों पर अत्यधिक निर्भरता ने पैदल यात्रियों को हाशिए पर धकेल दिया है, जिससे शहरी सार्वजनिक स्थानों की सुलभता और सुरक्षा कम हो गई है।
- सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ: यात्रा की संस्कृति को बढ़ावा देने से सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, यातायात की भीड़ में कमी, वायु प्रदूषण में कमी और संधारणीय शहरी विकास में योगदान मिलता है।
पैदल यात्रियों के अधिकारों के समक्ष विद्यमान चुनौतियाँ:
- अपर्याप्त पैदल यात्री मूलभूत संरचना: अतिक्रमण वाले या खराब रखरखाव वाले फुटपाथ, असुरक्षित क्रॉसिंग और अपर्याप्त शहरी डिजाइन सुरक्षित पैदल यात्री आवाजाही को प्रतिबंधित करते हैं।
- कमजोर शहरी प्रशासन: यातायात नियमों का खराब प्रवर्तन, खंडित योजना और पैदल यात्री बुनियादी ढांचे में अपर्याप्त निवेश यात्रा के अधिकार के प्रभावी क्रियान्वयन को कमजोर करते हैं।
- बदलते सामाजिक दृष्टिकोण: मोटर वाहनों के प्रति बढ़ती प्राथमिकता ने सार्वजनिक स्थानों के समान उपयोगकर्ताओं के रूप में पैदल यात्रियों की पहचान को कम कर दिया है।
आगे की राह:
- पैदल यात्री-केंद्रित शहरी नियोजन : शहरी विकास नीतियों के तहत बेहतर फुटपाथ, सुरक्षित क्रॉसिंग, सार्वभौमिक सुलभता और यात्रा योग्य क्षेत्रों को प्राथमिकता देना।
- कानूनी और संस्थागत ढाँचे को मजबूत करना: बेहतर शहरी शासन, कठोर प्रवर्तन और शहर नियोजन में पैदल यात्रियों के अधिकारों के एकीकरण के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
- यात्रा की संस्कृति को बढ़ावा देना: संधारणीय गतिशीलता, सार्वजनिक जागरूकता और समावेशी शहरी डिजाइन को प्रोत्साहित करें, जो यात्रा को संवैधानिक स्वतंत्रता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता के एक महत्त्वपूर्ण घटक के रूप में मान्यता देता है।
निष्कर्ष
अर्थात समावेशी, सुरक्षित और निवास योग्य शहरों के निर्माण के लिए यात्रा के अधिकार की रक्षा करना आवश्यक है, जहाँ संवैधानिक स्वतंत्रता, मानव गरिमा और संधारणीय शहरी विकास एक दूसरे को मजबूत करते हैं।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: “राइट टू वॉक केवल परिवहन का मुद्दा नहीं, बल्कि आधुनिक शहरी परिदृश्यों में स्थानिक न्याय और मानव गरिमा का एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न है।” अनुच्छेद 21 का विस्तार करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
|