संदर्भ:
हाल ही में कोचिंग सेंटर्स, होटलों और छोटे वाणिज्यिक भवनों में लगी आग ने एक गहन शहरी सुरक्षा संकट को उजागर किया है। यह समस्या केवल घातक दुर्घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कमजोर प्रवर्तन, असुरक्षित भूमि-उपयोग परिवर्तन, खराब ऑडिट तथा अपर्याप्त आपातकालीन तैयारियों को भी दर्शाती है।
पृष्ठभूमि
- बार-बार होने वाले अग्नि जोखिम: आग लगने की कई घटनाएँ उन इमारतों में होती हैं, जिन्हें मूल रूप से कम अधिभोग (lower occupancy) या आवासीय उपयोग के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन बाद में उनका उपयोग वाणिज्यिक, शैक्षिक या उच्च फुटफॉल (high-footfall) वाली गतिविधियों के लिए किया जाने लगा।
- मिश्रित-उपयोग विकास : मिश्रित उपयोग स्वाभाविक रूप से अवैध नहीं है, क्योंकि मास्टर प्लान और बिल्डिंग बाय-लॉ (भवन उपनियम) अक्सर इसकी अनुमति देते हैं, बशर्ते कि इमारतें निर्धारित अग्निसुरक्षा मानदंडों का पालन करती हों।
- भीड़भाड़ वाले स्थान: उच्च फुटफॉल वाले प्रतिष्ठान तेजी से शहरी गाँवों, अनधिकृत कॉलोनियों और टियर-II या टियर-III शहरों के क्षेत्रों में चल रहे हैं, जहाँ संकरी सड़कें अक्सर दमकल गाड़ियों के प्रवेश को रोकती हैं।
- छोटे भवनों की संवेदनशीलता: उपहार सिनेमा जैसी घटनाओं के बाद बड़े सार्वजनिक भवनों में अग्निसुरक्षा प्रवर्तन में सुधार हुआ है, लेकिन छोटे भवन अभी भी खराब तरीके से विनियमित तथा अपर्याप्त रूप से तैयार हैं।
शहरी भारत में अग्निसुरक्षा का महत्त्व
- शहरी शासन संबंधी मुद्दा: अग्निसुरक्षा केवल एक तकनीकी चिंता नहीं, बल्कि योजना, प्रवर्तन, सामर्थ्य (affordability) तथा बुनियादी ढाँचे से जुड़ी एक शासन संबंधी विफलता है।
- सार्वजनिक सुरक्षा जोखिम: कोचिंग सेंटर, होटल और छोटे वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अक्सर उच्च फुटफॉल को आकर्षित करते हैं, जिससे असुरक्षित इमारतों में बड़े पैमाने पर हताहतों का जोखिम बढ़ जाता है।
- समावेशी योजना की आवश्यकता: अनधिकृत बस्तियों पर बुलडोजर चलाना समस्या का समाधान नहीं है, क्योंकि लोग महंगे औपचारिक आवास तथा किफायती विकल्पों की कमी के कारण इन क्षेत्रों में निवास हेतु बाध्य हैं।
प्रमुख चिंताएँ
- असुरक्षित पहुँच मार्ग : कई इमारतें ऐसे क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं जहाँ सड़कों की चौड़ाई छह मीटर से कम है, जिससे आग लगने के दौरान आपातकालीन पहुँच कठिन हो जाती है।
- कमजोर प्रवर्तन: प्रशासनिक एजेंसियाँ अक्सर नियमित रूप से अग्निसुरक्षा ऑडिट या आपातकालीन-प्रतिक्रिया आवश्यकताओं को लागू करने में विफल रहती हैं।
- कम जन जागरूकता: भवन मालिक, निवासी और आगंतुक अक्सर फायर ड्रिल, निकासी योजनाओं (evacuation plans), शरण क्षेत्रों, फायर स्टेयरकेस (अग्निरोधक सीढ़ियों) और बुनियादी उपकरणों की आवश्यकताओं से अनजान होते हैं।
- विनियामक ढील/लापरवाही: ईज-ऑफ-डूइंग-बिजनेस सुधारों ने कम अधिभोग वाले भवनों के लिए अनुपालन को सरल बना दिया है, लेकिन मालिक अभी भी राष्ट्रीय भवन संहिता (National Building Code – NBC) के अग्निसुरक्षा प्रावधानों को पूरा करने हेतु उत्तरदायी हैं।
- अवसंरचनात्मक घाटा: महंगे औपचारिक आवास के कारण शहरी गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में बड़ी आबादी रहती है, लेकिन योजना एजेंसियाँ पर्याप्त बुनियादी ढाँचा प्रदान करने में विफल रही हैं।
- भ्रष्टाचार और पुराने नियम: भवन निर्माण की स्वीकृतियों में भ्रष्टाचार, भवन बीमा के प्रति निम्न जागरूकता और पुराने भवन नियम इस संकट को और गंभीर बना देते हैं।
- खराब रखरखाव संस्कृति: कई छोटे भवनों में अग्निशामक यंत्रों, आपातकालीन निकास, ड्रिल और परिचालन सुरक्षा प्रणालियों की कमी होती है, जिससे रोकी जा सकने वाली घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
आगे की राह
- नियमित सुरक्षा ऑडिट: स्थानीय निकायों को विशेष रूप से छोटे वाणिज्यिक और मिश्रित-उपयोग वाले भवनों में समय-समय पर अग्निसुरक्षा निरीक्षण करना चाहिए।
- जन जागरूकता अभियान: नगर पालिकाओं को भवन स्वामियों तथा निवासियों को अग्निशामक यंत्रों, निकासी मार्ग, शरण क्षेत्रों और आपातकालीन अभ्यासों (emergency drills) के बारे में शिक्षित करना चाहिए।
- NBC का अनुपालन: भवन स्वामियों को राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए, जिसमें पहुँच मार्ग की चौड़ाई, फायर स्टेयरकेस, शरण क्षेत्र तथा अग्निसुरक्षा उपकरण शामिल हैं।
- बुनियादी ढाँचे का उन्नयन: शहरी गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में सड़कों को चौड़ा करने, हाइड्रेंट्स (hydrants), आपातकालीन पहुँच योजना तथा मूलभूत नागरिक बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता है।
- संतुलित विनियमन: अधिकारियों को केवल सीलिंग या डिमोलिशन (ध्वस्तीकरण) अभियानों पर भरोसा करने की बजाय किफायती आवास और बुनियादी ढाँचागत योजना के साथ कठोर सुरक्षा प्रवर्तन को जोड़ना चाहिए।
- जवाबदेही तंत्र: भवन की मंजूरी, अधिभोग परिवर्तन तथा अग्नि अनापत्ति प्रमाणपत्र को पारदर्शी, भ्रष्टाचार-प्रतिरोधी तथा समय-समय पर समीक्षा के अधीन बनाया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
भारत की बार-बार होने वाली अग्नि त्रासदियाँ – योजना, प्रवर्तन और जागरूकता में रोकी जा सकने वाली विफलताओं को दर्शाती हैं। केवल मुआवजे, सीलिंग ड्राइव और आपदा के बाद की प्रतिक्रियाओं से आगे बढ़कर एक सतत सुरक्षा संस्कृति, नियमित ऑडिट तथा बुनियादी ढाँचे के प्रति संवेदनशील शहरी शासन समय की माँग है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. “अनियोजित शहरीकरण और नीतिगत विरोधाभासों ने भारत में मिश्रित-उपयोग वाले वाणिज्यिक भवनों को संभावित ‘फायर ट्रैप’ में बदल दिया है।” इस कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए तथा तात्कालिक प्रतिक्रियाओं के स्थान पर दीर्घकालिक संरचनात्मक तथा प्रशासनिक समाधान सुझाइए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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