संदर्भ:
पारंपरिक रूप से दंडात्मक उपायों के रूप में देखे जाने वाले यातायात जुर्माने को दुर्घटना की रोकथाम के लिए ‘प्रोएक्टिव टूल्स’ (सक्रिय उपकरण) के रूप में पुनः तैयार किया जा रहा है। चूँकि भारत वैश्विक सुरक्षा लक्ष्यों को पूरा करने का प्रयास कर रहा है, इसलिए ध्यान ‘दंड’ से हटकर ‘व्यवहार अनुकूलन’ और सड़क सुरक्षा को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के रूप में मानने पर केंद्रित हो गया है।
विकट वास्तविकता – एक सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक संकट:
- नुकसान का पैमाना: भारत में सड़क दुर्घटना में एक वर्ष में लगभग 1.7 लाख लोगों की मृत्यु होती है— प्रभावी रूप से प्रत्येक वर्ष एक छोटे शहर की आबादी समाप्त हो जाती है।
- गरीबी का जाल: विश्व बैंक के अनुसार, सड़क दुर्घटनाएँ गरीबी का एक प्रमुख चालक हैं। परिवार के प्राथमिक आय अर्जक व्यक्ति की मृत्यु, जीवित सदस्यों पर स्थायी वित्तीय तथा मानसिक पीड़ा का दंश आरोपित करती है।
- सड़क उपयोगकर्ता: बंगलूरू जैसे शहरों में, 60% पीड़ित मोटरसाइकिल सवार और 30% पैदल यात्री हैं, जो बंद वाहन सुरक्षा के बिना उन लोगों द्वारा सामना किए जाने वाले अनुपातहीन जोखिम को उजागर करते हैं।
जुर्माने के माध्यम से व्यवहार अनुकूलन:
- निवारक प्रभाव: जुर्माना तेज गति या नशे में गाड़ी चलाने जैसे जोखिम युक्त व्यवहारों के लिए “वेक-अप कॉल” के रूप में कार्य करता है।
- सुरक्षा का मनोविज्ञान: दंड जारी करना एक ‘व्यवहार परिवर्तन तकनीक’ है। वित्तीय परिणाम एक निवारक के रूप में कार्य करता है, जो सड़क उपयोगकर्ताओं को कानूनों का पालन करने तथा सुविधा की बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता देने हेतु प्रोत्साहित करता है।
- सुरक्षा के रूप में पुलिसिंग: यह आधुनिक प्रवर्तन राजस्व के बारे में नहीं, बल्कि जीवन और सुरक्षा की संस्कृति को बनाए रखने के लिए समुदायों के साथ कार्य करके, जनता का विश्वास बनाए रखने के संबंध में है।
“कैलिब्रेटेड जुर्माने” (Calibrated Fines) की अवधारणा:
प्रवर्तन को प्रभावी और नैतिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए, जुर्माने को सावधानीपूर्वक संतुलित किया जाना चाहिए:
- रिश्वत-निवारक संतुलन: जुर्माने “कैलिब्रेटेड” होने चाहिए—उल्लंघन का वास्तविक भय उत्पन्न करने के लिए अधिक लेकिन इतने अधिक नहीं कि वे वहन न किए जा सकें।
- भ्रष्टाचार को रोकना: यदि जुर्माना अनुपातहीन रूप से अधिक है, तो नागरिकों द्वारा विधिक दंड का भुगतान करने की बजाय अधिकारियों को रिश्वत देने की अधिक संभावना हो सकती है। अंतिम लक्ष्य केवल वित्तीय सजा नहीं, बल्कि रोकथाम है।
- पारदर्शिता: प्रणाली निष्पक्ष और गैर-मनमाना होना चाहिए, ताकि वाहन चालक ठीक से समझ सकें कि उन्हें दंडित क्यों किया जा रहा है।
वैश्विक उदाहरण – फोर्टालेजा, ब्राजील:
- साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण: 2018 से 2021 के बीच, फोर्टालेजा शहर ने $1 मिलियन के संचार अभियान के साथ कठोर प्रवर्तन को शामिल किया।
- प्रभाव: तीव्र गति 22% से घटकर 11% हो गई, और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 39% की कमी आई।
- सार्वजनिक धारणा: अभियान ने संबंधित विमर्श को सफलतापूर्वक बदल दिया, जिससे नागरिकों को यह समझने में मदद मिली, कि यातायात नियम उनकी अपनी और उनके प्रियजनों के जीवन की सुरक्षा के लिए बनाए गए थे।
सड़क सुरक्षा के चार स्तंभ :
UN सेकंड डिकेड ऑफ एक्शन (2021-2030) के साथ एकीकरण और 2030 तक सड़क मृत्यु दर को 50% तक कम करने के लिए, भारत को एक बहुआयामी रणनीति अपनानी चाहिए:
- शिक्षा: साक्ष्य-आधारित संचार अभियानों के माध्यम से जन जागरूकता विस्तार।
- प्रवर्तन : ई-चालान और सीसीटीवी जैसी तकनीक का लाभ उठाते हुए निरंतर तथा दृश्यमान पुलिसिंग।
- इंजीनियरिंग: कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए फुटपाथ और साइकिल लेन के साथ सड़कों का डिजाइन तैयार करना।
- आपातकालीन देखभाल: “गोल्डन ऑवर” प्रतिक्रिया और दुर्घटना पश्चात चिकित्सा बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना।
आगे की राह:
- सुरक्षित प्रणाली डिजाइन: नगरपालिका संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए, कि सड़कें सुरक्षित पहुँच के लिए डिजाइन की गई हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि मानवीय त्रुटियों का परिणाम मृत्यु न हो।
- निरंतर कार्रवाई: मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम (MVAA), 2019 इसके लिए एक आधार प्रदान करता है, किन्तु दृश्यमान प्रवर्तन नीति और प्रभाव के बीच एक महत्त्वपूर्ण कड़ी आवश्यक है।
- परिप्रेक्ष्य में बदलाव: यातायात अनुपालन को विधिक बोझ की बजाय जीवन रक्षक उपाय के रूप में देखने संबंधी राष्ट्रीय विमर्श को परिवर्तित करना।
निष्कर्ष
सड़क सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकता है। रणनीतिक रूप से यातायात जुर्मानों को लागू करके तथा सुरक्षित अवसंरचना निर्माण में निवेश के माध्यम से, भारत अपने 2030 के लक्ष्यों की ओर बढ़ सकता है तथा अपने संवेदनशील नागरिकों को अनावश्यक हानि से बचा सकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. “यातायात जुर्माने को अक्सर निवारक हस्तक्षेपों की बजाय केवल दंडात्मक उपायों के रूप में देखा जाता है।” मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के आलोक में इस कथन का परीक्षण कीजिए। भारत में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या को कम करने के लिए, व्यापक उपायों को सुझाइए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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