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‘भारतीय वैज्ञानिक सेवा’ के माध्यम से एक खाई को पाटना

Lokesh Pal February 16, 2026 05:00 10 0

संदर्भ:

शासन व्यवस्था के भीतर वैज्ञानिक विशेषज्ञता को संस्थागत रूप देने के उद्देश्य से एक समर्पित भारतीय वैज्ञानिक सेवा (ISS) स्थापित करने का प्रस्ताव सामने आया है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और सुधार की आवश्यकता

  • 1947 के बाद का “स्टील फ्रेम”: स्वतंत्रता के पश्चात भारत ने ब्रिटिश कालीन सिविल सेवाओं को बनाए रखा, जिन्हें सरदार वल्लभभाई पटेल ने प्रसिद्ध रूप से भारत का “स्टील फ्रेम” कहा था, ताकि राष्ट्रीय एकता, प्रशासनिक निरंतरता और संस्थागत स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
  • सामान्यवादी मॉडल: प्रारंभिक राष्ट्र-निर्माण के दौर में सामान्यवादी प्रशासन उपयुक्त था, जहाँ अधिकारी विभिन्न विभागों का दायित्व संभालते थे।
  • समकालीन चुनौतियाँ: जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और महामारियों जैसी उभरती चुनौतियाँ पारंपरिक सामान्यवादी प्रशासन की क्षमता से परे विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता को रेखांकित करता हैं।

वर्त्तमान शासन का विरोधाभास

  • संस्थागत बाधा: सरकारी वैज्ञानिक सामान्य सिविल सेवा नियमों के तहत आते हैं, फिर भी तकनीकी क्षेत्रों में उन्हें उचित निर्णय-निर्माण अधिकार अक्सर प्राप्त नहीं होते।
  • सांस्कृतिक असंगति: नौकरशाही प्रणाली पदानुक्रम और प्रक्रियात्मक अनुशासन पर बल देती है, जबकि वैज्ञानिक कार्यप्रणाली प्रश्न पूछने, साक्ष्य-आधारित तर्क और खुले मतभेद पर आधारित होती है।
  • नीति-निर्माण में सीमित प्रभाव: कई संस्थानों में वैज्ञानिक सलाह केवल परामर्शात्मक और गैर-बाध्यकारी होती है, जिससे विशेषज्ञों की भूमिका निर्णय-निर्माता के बजाय सलाहकार तक सीमित रह जाती है।

विज्ञान का प्रतिक्रियात्मक बनाम सक्रिय उपयोग

  • प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण: वैज्ञानिक इनपुट अक्सर संकट के बाद सक्रिय किया जाता है, जैसे पर्यावरणीय आपदाओं या सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान।
  • पूर्वानुमेय शासन की आवश्यकता: नीति-निर्माण के प्रारंभिक चरण में वैज्ञानिकों को संस्थागत रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि दीर्घकालिक, साक्ष्य-आधारित और जोखिम-सूचित निर्णय सुनिश्चित किया जा सकें।

प्रस्तावित भारतीय वैज्ञानिक सेवा (ISS) का ढाँचा

  • नई अखिल भारतीय सेवा: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय विदेश सेवा (IFS) जैसी मौजूदा सेवाओं के साथ भारतीय वैज्ञानिक सेवा (ISS) की स्थापना।
  • विशेषीकृत चयन प्रक्रिया: सामान्य प्रतियोगी परीक्षा के बजाय शोध उपलब्धियों और क्षेत्रगत विशेषज्ञता के सहकर्मी मूल्यांकन के माध्यम से भर्ती।
  • पूरक शासन मॉडल: प्रशासक समन्वय और कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करें, जबकि ISS अधिकारी तकनीकी मूल्यांकन, साक्ष्य-आधारित विश्लेषण और दीर्घकालिक जोखिम आकलन प्रदान करें।

वैश्विक सर्वोत्तम पद्धति/प्रथाएँ

  • समर्पित वैज्ञानिक कैडर: संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे देशों ने सरकार के भीतर वैज्ञानिक सेवाओं को संस्थागत रूप प्रदान किया है।
  • वैज्ञानिक अखंडता ढाँचा: संयुक्त राज्य अमेरिका में वैज्ञानिक अखंडता नीतियाँ शोधकर्ताओं को राजनीतिक हस्तक्षेप से सुरक्षा प्रदान करती हैं और वैज्ञानिक सलाह के दस्तावेजीकरण में पारदर्शिता अनिवार्य करती हैं।

निष्कर्ष

जैसे-जैसे भारत तकनीकी रूप से गहन शासन की ओर अग्रसर हो रहा है, तदर्थ परामर्श समितियों के बजाय स्थायी और संरचनात्मक संस्थागत सुधार की आवश्यकता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: भारत की शासन व्यवस्था पारंपरिक रूप से सामान्यवादी प्रशासकों पर आधारित रही है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरण से जुड़ी उभरती चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में, साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को सुदृढ़ करने हेतु एक भारतीय वैज्ञानिक सेवा (ISS) की आवश्यकता का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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