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राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA) द्वारा संरक्षण पहल

Lokesh Pal July 13, 2026 04:39 6 0

संदर्भ 

राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण ने चार प्रमुख संरक्षण प्रतीक (Flagship species) प्रजातियों के लिए नई संरक्षण परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की तथा आस्था वन संरक्षण योजना (Aastha Van Sanrakshan Yojana) का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य वनीकरण, पवित्र उपवनों  के संरक्षण तथा प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी को सुदृढ़ बनाना है।

आस्था वन संरक्षण योजना के बारे में

  • यह राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA) द्वारा अनुमोदित एक नई केंद्रीय योजना है, जिसका उद्देश्य भारत के पवित्र उपवनों का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन  करना है।
  • बजटीय परिव्यय: ₹3,000 करोड़।
  • क्रियान्वयन अवधि: वर्ष 2026–27 से वर्ष 2030–31।
  • प्रमुख प्रावधान
    • भारत के लगभग 15,000 पवित्र उपवनों का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन।
    • सांस्कृतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण वन क्षेत्रों का समुदाय-आधारित संरक्षण
    • अवक्रमित पवित्र वनों तथा जैव विविधता का पुनर्स्थापन।
    • पारंपरिक पारिस्थितिकी ज्ञान एवं जलवायु प्रत्यास्थता को बढ़ावा देना।

राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA) के बारे में

  • यह प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016 (वर्ष 2018 से प्रभावी) के अंतर्गत स्थापित एक वैधानिक प्राधिकरण है।
  • इसका कार्य गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि के विचलन के बदले एकत्रित निधियों का प्रबंधन करना है।
  • पृष्ठभूमि: इसकी उत्पत्ति उच्चतम न्यायालय के टी. एन. गोदावर्मन बनाम भारत संघ मामले से हुई।
  • प्रारंभ में वर्ष 2002 में अप्रयुक्त प्रतिपूरक वनीकरण निधियों के प्रबंधन हेतु इसे एक तदर्थ प्राधिकरण के रूप में स्थापित किया गया था।

संरचना

  • राष्ट्रीय CAMPA: यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अधीन कार्य करता है तथा राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि का प्रबंधन करता है।
  • राज्य CAMPA: प्रत्येक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में स्थापित किया जाता है तथा राज्य प्रतिपूरक वनीकरण निधि का प्रबंधन करता है।
  • दोनों निधियाँ ब्याज अर्जित करने वाली एवं अव्यपगत होती हैं।

वित्तपोषण तंत्र

  • वन भूमि का विचलन करने वाली उपयोगकर्ता एजेंसियों को:
    • प्रतिपूरक वनीकरण हेतु समतुल्य गैर-वानिकी भूमि उपलब्ध करानी होती है।
    • वनीकरण की संपूर्ण लागत वहन करनी होती है।
  • 90% निधि राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को हस्तांतरित की जाती है।
  • 10% निधि निगरानी एवं क्षमता निर्माण के लिए केंद्र सरकार के पास रखी जाती है।
  • यदि गैर-वानिकी भूमि उपलब्ध न हो, तो क्षरणग्रस्त वन क्षेत्र के दोगुने क्षेत्रफल में वनीकरण किया जाता है।
  • निधियों का वार्षिक लेखा परीक्षण भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा किया जाता है।

CAMPA के प्रमुख कार्य

  • वनीकरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन: प्रतिपूरक, अतिरिक्त एवं दंडात्मक वनीकरण तथा जलग्रहण क्षेत्र उपचार के माध्यम से क्षरणग्रस्त वन पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन।
  • जैव विविधता संरक्षण: प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम, आवास पुनर्स्थापन तथा मैंग्रोव पुनर्स्थापन, नगर वन योजना एवं अन्य जैव विविधता संरक्षण परियोजनाओं को समर्थन।
  • निगरानी एवं वित्तीय सुशासन: GIS-आधारित निगरानी, उपग्रह चित्रों, डिजिटल वार्षिक योजनाओं तथा CAG के वार्षिक लेखा परीक्षण के माध्यम से CAMPA-वित्तपोषित परियोजनाओं का पारदर्शी एवं वैज्ञानिक क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
  • हाल के CAMPA निर्णय: गंगा नदी डॉल्फिन, हिम तेंदुआ, जंगली भैंसा एवं भारतीय गैंडा के संरक्षण हेतु चार नई संरक्षण परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई, ताकि देशभर में प्रजाति पुनर्प्राप्ति एवं आवास संरक्षण को सुदृढ़ किया जा सके।
  • राष्ट्रीय CAMPA के शासी निकाय ने मणिपुर के ‘संगाई’ हिरण के संरक्षण हेतु निरंतर समर्थन को स्वीकृति दी। 

प्रजाति  प्रमुख विशेषताएँ  संरक्षण स्थिति / उपाय 
गंगा नदी डॉल्फिन (Platanista gangetica) भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव (2009); मीठे जल की प्रजाति; दृष्टि प्रया अत्यधिक सीमित; प्रतिध्वनि निर्धारण (Echolocation) पर निर्भर रहती है; नदी के स्वास्थ्य का संकेतक; स्थानीय नाम सूसु’ (Susu) IUCN: संकटग्रस्त; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-I; CITES: परिशिष्ट-I; CMS: परिशिष्ट-I; प्रोजेक्ट डॉल्फिन के अंतर्गत संरक्षित।
हिम तेंदुआ (Panthera uncia) ‘घोस्ट ऑफ द माउंटेन्स’ कहलाता है; हिमालय में 3,000–4,500 मीटर की ऊँचाई पर निवास; एकाकी; आनुवंशिक रूप से तेंदुए की अपेक्षा बाघ के अधिक निकट IUCN: सुभेद्य; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम: अनुसूची-I; CITES: परिशिष्ट-I; CMS: परिशिष्ट-I; प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड के अंतर्गत संरक्षित।
भारतीय गैंडा (Greater One-Horned Rhino) एशिया का सबसे बड़ा गैंडा; एक सींग; अत्यधिक कठोर त्वचा; भारत-नेपाल तराई के जलोढ़ घासभूमियों एवं आर्द्रभूमियों में निवास। IUCN: सुभेद्य; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम: अनुसूची-I; इंडियन राइनो विजन एवं आवास प्रबंधन कार्यक्रमों के अंतर्गत संरक्षित।
जंगली भैंसा (Bubalus arnee) विश्व का सबसे बड़ा जंगली गोवंशीय पशु; पालतू भैंस का पूर्व प्रजाति; आर्द्रभूमियों एवं घासस्थलों में निवास; मुख्यतः असम एवं छत्तीसगढ़ में पाया जाता है IUCN: संकटग्रस्त; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम: अनुसूची-I; राष्ट्रीय CAMPA ने अखिल भारतीय संरक्षण कार्ययोजना को स्वीकृति दी।
संगाई (मणिपुर का भूरे सींग वाला हिरण)

Sangai (Manipur Brow-antlered Deer)

यह केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान की स्थानिक प्रजाति है; जो तैरते हुए फुमदी  पर चलने के कारण ‘डांसिंग डियर’ कहलाता है। IUCN: संकटग्रस्त; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम: अनुसूची-I; CITES: परिशिष्ट-I; राष्ट्रीय CAMPA ने इसके संरक्षण हेतु निरंतर समर्थन को स्वीकृति दी।

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