100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

भारत के उच्च समुद्री मत्स्य संसाधनों के सतत् उपयोग हेतु राष्ट्रीय पहल

Lokesh Pal July 13, 2026 04:42 5 0

संदर्भ

हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति ने ओडिशा के भुवनेश्वर में भारत के उच्च समुद्री मत्स्य संसाधनों के सतत् दोहन हेतु प्राधिकरण-पत्र जारी करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

पहल की प्रमुख विशेषताएँ

  • प्राधिकरण-पत्र (LoAs) का राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ: सरकार ने उच्च समुद्र (दूरवर्ती समुद्री क्षेत्र) में संचालित भारतीय ध्वजांकित मत्स्य नौकाओं के लिए 3 वर्ष की वैधता वाले प्राधिकरण-पत्र जारी किए, जिससे वैध, सतत् एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मत्स्यन के लिए एक पारदर्शी नियामकीय ढाँचा स्थापित हुआ।
  • ओडिशा गहरे समुद्र में मत्स्यन मिशन: राज्य के गहरे समुद्र में मत्स्यन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने, अवसंरचना में सुधार तथा समुद्री संसाधनों के सतत् उपयोग को बढ़ावा देने हेतु ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन दस्तावेज का अनावरण किया गया।
  • प्रौद्योगिकी-संचालित मत्स्य क्षेत्र: यह पहल डिजिटल प्राधिकरण, पोत ट्रैकिंग प्रणाली तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाणीकरण मानकों को बढ़ावा देती है, जिससे निगरानी, अनुरेखणीयता तथा सतत् मत्स्य प्रबंधन में सुधार होगा।
  • महत्त्व
    • भारत के समुद्री संसाधनों की आर्थिक क्षमता का दोहन।
    • पारिस्थितिकीय सततता सुनिश्चित करना।
    • रोजगार सृजन को बढ़ावा देना।
    • तटीय समुदायों की आजीविका सुरक्षा को सुदृढ़ करना।

उच्च समुद्री मत्स्यन के बारे में

  • उच्च समुद्र से तात्पर्य उन समुद्री क्षेत्रों से है, जो किसी भी देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) से बाहर स्थित होते हैं तथा किसी एक राष्ट्र के अधिकार क्षेत्र के बजाय अंतरराष्ट्रीय विधि के अधीन संचालित होते हैं।
  • मत्स्य संसाधन: उच्च समुद्री मत्स्यन में मुख्यतः उच्च आर्थिक मूल्य वाली प्रवासी प्रजातियों, जैसे टूना, बिलफिश, स्क्विड तथा अन्य खुले समुद्र में रहने वाली प्रवासी प्रजातियों (पेलैजिक मछलियों) पर केंद्रित हैं।
  • विनियमन की आवश्यकता: दूरवर्ती समुद्री क्षेत्रों में मत्स्यन हेतु प्राधिकरण, निगरानी एवं अंतरराष्ट्रीय संरक्षण उपायों का अनुपालन आवश्यक है, ताकि अवैध, अप्रतिवेदित एवं अनियमित (IUU) मत्स्यन तथा समुद्री संसाधनों के अतिदोहन को रोका जा सके।

इस पहल का महत्त्व

  • सतत् समुद्री संसाधन प्रबंधन: समुद्री संसाधनों के उत्तरदायी उपयोग हेतु एक नियामकीय ढाँचा स्थापित करता है तथा दीर्घकालिक पारिस्थितिकीय सततता सुनिश्चित करता है।
  • ब्लू इकोनॉमी को सुदृढ़ करना: गहरे समुद्र में मत्स्यन, मूल्य संवर्द्धन, समुद्री खाद्य निर्यात तथा तटीय क्षेत्रों में रोजगार सृजन के माध्यम से आर्थिक अवसरों का विस्तार करता है।
  • समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा: भारत का समुद्री खाद्य निर्यात ₹73,000 करोड़ से अधिक हो चुका है तथा 120 से अधिक देशों तक पहुँच चुका है। सतत् प्रामाणीकरण एवं अनुरेखणीयता (मत्स्य उत्पादों की उत्पत्ति एवं आपूर्ति शृंखला का सत्यापन करने वाली व्यवस्था) वैश्विक बाजारों तक पहुँच को और सुदृढ़ कर सकते हैं।
  • उत्तरदायी मत्स्यन को बढ़ावा: डिजिटल प्राधिकरण, पोत निगरानी प्रणाली तथा प्रमाणीकरण मानक पारदर्शिता, जवाबदेही तथा अंतरराष्ट्रीय मत्स्य विनियमों के अनुपालन को सुदृढ़ करते हैं।
  • तटीय आजीविका को समर्थन: गहरे समुद्र में मत्स्यन के विस्तार से तटीय मत्स्य भंडारों पर दबाव कम होता है तथा मछुआरों के लिए नई आजीविका के अवसर सृजित होते हैं।

भारत की संबंधित पहलें

  • सागरमाला कार्यक्रम (2015): यह बंदरगाह-आधारित विकास की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, तटीय अवसंरचना को सुदृढ़ करना, समुद्री लॉजिस्टिक्स में सुधार तथा तटीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (2020): ₹20,050 करोड़ के निवेश के साथ प्रारंभ की गई यह योजना सतत् मत्स्यन, जलीय कृषि, मत्स्य अवसंरचना, मूल्य शृंखला विकास तथा मछुआरों के कल्याण को बढ़ावा देती है।
  • प्रारूप ब्लू इकोनॉमी नीति (2021): पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) द्वारा तैयार यह नीति आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण, आजीविका सृजन तथा एकीकृत महासागर शासन के लिए समुद्री संसाधनों के सतत् उपयोग को बढ़ावा देने हेतु बनाई गई है।
  • डीप ओशन मिशन (2021): ₹4,077 करोड़ के परिव्यय के साथ स्वीकृत यह मिशन गहरे समुद्र के अन्वेषण, महासागरीय प्रौद्योगिकियों, समुद्री जैव विविधता अनुसंधान तथा भारत के महासागरीय संसाधनों के सतत उपयोग को समर्थन प्रदान करता है।
  • समुद्री मत्स्य (विनियमन एवं प्रबंधन) विधेयक, 2024: इसका उद्देश्य भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मत्स्य संसाधनों के सतत् प्रबंधन हेतु एक समग्र कानूनी ढाँचा स्थापित करना है। इसके अंतर्गत पोत पंजीकरण, डिजिटल निगरानी, पोत ट्रैकिंग प्रणाली तथा अवैध, अप्रतिवेदित एवं अनियमित मत्स्यन (IUU Fishing) पर नियंत्रण के उपाय शामिल हैं।

निष्कर्ष

यह पहल सतत् गहरे समुद्री मत्स्यन तथा भारत के समुद्री संसाधनों के उत्तरदायी उपयोग की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। प्रौद्योगिकी-संचालित शासन, वैज्ञानिक संसाधन प्रबंधन तथा ब्लू इकोनॉमी के सिद्धांतों के समन्वय से यह तटीय आजीविका को सुदृढ़ करने, समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में प्रमुख योगदान दे सकती है।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.