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संक्षिप्त समाचार

Lokesh Pal July 04, 2026 03:00 8 0

रुंग (या रंग) समुदाय (Rung community)

रुंग (या रंग) समुदाय ने ओम पर्वत के निकट कंकरीट के शिवलिंग की स्थापना का विरोध किया और अपने पवित्र प्राकृतिक परिदृश्य तथा पारंपरिक सांस्कृतिक मान्यताओं की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

रंग समुदाय के बारे में

  • परिचय: रंग समुदाय (जिसे रुंग या शौका भी कहा जाता है) उत्तराखंड की एक स्वदेशी अनुसूचित जनजाति (ST) है, जो व्यापक भोटिया जनजातीय समूह का हिस्सा है और अपनी अंतर-हिमालयी विरासत के लिए प्रसिद्ध है।
  • भौगोलिक वितरण: यह समुदाय मुख्यतः पिथौरागढ़ जिले की व्यास, दारमा और चौंदास घाटियों में निवास करता है, जो भारत–नेपाल–तिब्बत त्रि-जंक्शन के निकट कुमाऊँ हिमालय में स्थित हैं।
  • पारंपरिक आजीविका: ऐतिहासिक रूप से रंग समुदाय लिपुलेख जैसे उच्च हिमालयी दर्रों के माध्यम से तिब्बत के साथ अंतर-हिमालयी व्यापार करता था। वर्तमान में इसकी आजीविका मुख्यतः पशुपालन, हस्तशिल्प, औषधीय पौधों के संग्रहण तथा कृषि पर आधारित है।
  • संस्कृति एवं भाषा: यह समुदाय रंगलो (रंगकास), जो एक तिब्बती-बर्मी (Tibeto-Burman) भाषा है, बोलता है तथा प्रत्येक 12 वर्ष में कंदाली महोत्सव मनाता है, जो इसकी विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
  • धार्मिक मान्यताएँ: रंग समुदाय जीववाद (Animism) और हिंदू धर्म के समन्वित स्वरूप का पालन करता है। यह ओम पर्वत, आदि कैलाश, नदियों और हिमनदों को भगवान शिव का प्राकृतिक स्वरूप मानकर उनकी पूजा करता है, न कि मानव-निर्मित धार्मिक संरचनाओं के माध्यम से।
  • संरक्षण परंपराएँ: यह समुदाय मौसमी स्थानांतरण, भूमिगत बीज भंडारण तथा पवित्र प्राकृतिक स्थलों के संरक्षण जैसी सतत् परंपराओं का पालन करता है, जो हिमालयी जैव विविधता के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण योगदान देती हैं।

अदन की खाड़ी 

हाल ही में भारतीय नौसेना ने अदन की खाड़ी में एमवी गोल्डन आर्सेनल (MV Golden Arsenal) पर हुए समुद्री डकैती के प्रयास को विफल कर पश्चिमी हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ किया।

अदन की खाड़ी के बारे में

  • अदन की खाड़ी हिंद महासागर का एक सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण गहरे जल का बेसिन है, जो लाल सागर और अरब सागर के मध्य समुद्री कनेक्टिविटी का कार्य करता है।
  • अवस्थिति: यह खाड़ी अरब प्रायद्वीप और हॉर्न ऑफ अफ्रीका (Horn of Africa) के मध्य स्थित है। इसके उत्तर में यमन, दक्षिण में सोमालिया, पश्चिम में जिबूती तथा पूर्व में अरब सागर स्थित हैं।
    • यह बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab-el-Mandeb Strait) के माध्यम से लाल सागर से जुड़ती है तथा गार्डाफुई चैनल (Guardafui Channel) के माध्यम से सोमाली सागर में खुलती है।
  • भू-वैज्ञानिक विशेषताएँ: यह एक अपेक्षाकृत युवा रिफ्ट बेसिन (Rift Basin) है, जिसका निर्माण टेक्टॉनिक प्लेटों के अपसरण से हुआ है। इसके मध्य से शेबा रिज (Sheba Ridge), जो एक सक्रिय समुद्रतल प्रसारण केंद्र है, से होकर गुजरती है।
  • प्रमुख बंदरगाह: इस खाड़ी के प्रमुख बंदरगाहों में अदन और मुकल्ला (यमन), जिबूती सिटी (जिबूती), तथा बरबेरा और बोसासो (सोमालिया) शामिल हैं।
    • यह विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जिसके माध्यम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़े भाग का परिवहन किया जाता है तथा स्वेज नहर के जरिए यूरोप, एशिया और अफ्रीका के मध्य व्यापार सुगम होता है।

बोरजुली आर्द्रभूमि, जैव विविधता धरोहर स्थल घोषित

 

असम की बोरजुली आर्द्रभूमि को ओराइजा रूफिपोगोन (Oryza rufipogon) के संरक्षण के लिए जैव विविधता धरोहर स्थल (Biodiversity Heritage Site – BHS) के रूप में अधिसूचित किया गया है।

जैव विविधता धरोहर स्थल (BHS) के बारे में

  • यह विशिष्ट पारिस्थितिकीय, जैव विविधता, सांस्कृतिक अथवा सौंदर्यात्मक महत्त्व वाला एक स्पष्ट रूप से परिभाषित क्षेत्र होता है, जिसे जैव विविधता संरक्षण के लिए जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत अधिसूचित किया जाता है।
  • कानूनी प्रावधान: जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा-37 के अंतर्गत राज्य सरकार, स्थानीय निकायों से परामर्श के बाद, जैव विविधता की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को जैव विविधता धरोहर स्थल (BHS) घोषित कर सकती है।
  • भारत का पहला BHS: कर्नाटक के बंगलूरू स्थित नल्लूर इमली उपवन (Nallur Tamarind Grove) को वर्ष 2007 में भारत का पहला जैव विविधता धरोहर स्थल घोषित किया गया था।

ओराइजा रूफिपोगोन के बारे में

  • ओराइजा रूफिपोगोन खेती किए जाने वाले धान ओराइजा सटाईवा (Oryza sativa) की ही एक प्रजाति है।
    • यह एक बहुवर्षीय (Perennial) जंगली धान की प्रजाति है, जो बीजों तथा प्रकंदों (Rhizomes) दोनों के माध्यम से प्रजनन करती है।
    • यह दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया की मूल प्रजाति है तथा प्राकृतिक रूप से दलदलों, आर्द्रभूमियों, दलदली क्षेत्रों (Swamps) तथा उथले जलाशयों में पाई जाती है।
  • प्रमुख विशेषताएँ: कीटों एवं रोगों के प्रति प्रतिरोधी।
    • बाढ़ एवं लवणीय (Saline) परिस्थितियों को सहन करने में सक्षम।
  • कृषि महत्त्व: यह जलवायु-सहिष्णु, उच्च उत्पादकता तथा अधिक पोषणयुक्त धान की किस्मों के विकास के लिए एक अत्यंत मूल्यवान आनुवंशिक संसाधन है।

विक्रम-1 (Vikram-1)

स्काईरूट एयरोस्पेस ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से विक्रम-1 की पहली कक्षीय परीक्षण उड़ान ‘मिशन आगमन’ के लिए प्रक्षेपण समयावधि (Launch Window) की घोषणा की है।

विक्रम-1 के बारे में

  • विक्रम-1 भारत का पहला निजी क्षेत्र द्वारा विकसित कक्षीय श्रेणी (Orbital-class) का प्रक्षेपण यान है, जिसे निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit – LEO) में छोटे उपग्रहों को स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • इसका विकास हैदराबाद स्थित निजी अंतरिक्ष स्टार्ट-अप स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा भारत के उन्नत अंतरिक्ष क्षेत्र के अंतर्गत किया गया है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • उन्नत स्वदेशी प्रौद्योगिकी: इस रॉकेट में 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन (Liquid Engine), कार्बन कंपोजिट संरचनाएँ तथा मॉड्यूलर डिजाइन का उपयोग किया गया है, जिससे निर्माण समय, लागत एवं कुल प्रक्षेपण द्रव्यमान में कमी आती है।
    • कक्षीय श्रेणी का प्रक्षेपण यान: विक्रम-1 में पृथ्वी की कक्षा में पेलोड स्थापित करने हेतु आवश्यक प्रणोदन एवं वेग उत्पन्न करने की क्षमता है, जो इसे उप-कक्षीय (Suborbital) प्रक्षेपण यानों से अलग बनाती है।
    • लघु उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता: यह निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में 350 किलोग्राम तथा सूर्य-समकालिक कक्षा (SSO) में 260 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है, जिससे समर्पित उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं की बढ़ती वैश्विक माँग पूरी की जा सकती है।
      • सूर्य-समकालिक कक्षा (SSO) पृथ्वी के ध्रुवों के निकट की ऐसी कक्षा है, जिसमें उपग्रह प्रतिदिन पृथ्वी की किसी भी निर्धारित सतह के ऊपर समान स्थानीय सौर समय पर गुजरता है।
    • प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मिशन: मिशन आगमन (Mission Aagaman) के माध्यम से प्रणोदन प्रणाली, चरण पृथक्करण, मार्गदर्शन, नेविगेशन, नियंत्रण प्रणाली तथा प्रक्षेपण यान के समग्र प्रदर्शन का सत्यापन किया जाएगा, जिसके बाद वाणिज्यिक प्रक्षेपण किए जाएँगे।

iSLEEPS (इस्केमिक स्ट्रोक रोगियों में नींद विश्लेषण हेतु पॉलीसोमनोग्राफी डेटासेट)

हाल ही में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) और आईआईआईटी हैदराबाद (IIIT Hyderabad) ने इस्केमिक स्ट्रोक रोगियों के लिए एशिया का पहला ओपन-एक्सेस स्लीप डेटाबेस iSLEEPS लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य स्ट्रोक एवं नींद संबंधी अनुसंधान को आगे बढ़ाना है।

iSLEEPS (इस्केमिक स्ट्रोक रोगियों में नींद विश्लेषण हेतु पॉलीसोमनोग्राफी डेटासेट) के बारे में

  • iSLEEPS एशिया का पहला ओपन-एक्सेस डेटाबेस है, जिसमें इस्केमिक स्ट्रोक रोगियों की रात्रिकालीन नींद संबंधी जाँच का डेटा उपलब्ध है। इसका विकास राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS), बंगलूरू एवं आईआईआईटी हैदराबाद (IIIT Hyderabad) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है।
    • इस्केमिक स्ट्रोक तब होता है, जब रक्त का थक्का (Blood Clot) मस्तिष्क तक जाने वाली धमनी को अवरुद्ध या संकीर्ण कर देता है, जिससे मस्तिष्क को रक्त एवं ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है।
  • प्रकाशन: यह डेटासेट नेचर पोर्टफोलियो (Nature Portfolio) की पत्रिका साइंटिफिक डेटा (Scientific Data) में प्रकाशित किया गया है तथा इसमें वर्ष 2018–2021 के बीच एकत्र किए गए 100 रात्रिकालीन पॉलीसोमनोग्राफी (PSG) रिकॉर्ड शामिल हैं।
  • प्रमुख निष्कर्ष
    • व्यापक नींद डेटासेट: इसमें अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन (2017) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, चिह्नित नींद के चरण, श्वसन संबंधी घटनाएँ, ऑक्सीजन संतृप्ति में कमी के प्रकरण, अंगों की गतिविधियाँ तथा नैदानिक जानकारी शामिल हैं।
    • नींद संबंधी विकारों का उच्च बोझ: विश्लेषण में पाया गया कि 85% स्ट्रोक रोगी किसी-न-किसी स्तर के स्लीप एपनिया (Sleep Apnoea) से प्रभावित थे, जिससे स्ट्रोक के बाद नियमित नींद मूल्यांकन की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
    • इसमें 38% रोगियों में गंभीर, 23% में मध्यम, 24% में हल्का स्लीप एपनिया पाया गया, जबकि केवल 15% रोगियों की नींद के दौरान श्वसन सामान्य था। यह स्ट्रोक पुनर्वास में समय पर निदान एवं उपचार की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
    • स्लीप एपनिया एक नींद संबंधी विकार है, जिसमें सोते समय श्वसन बार-बार रुकता और पुनः प्रारंभ होता है, जिससे ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है तथा सामान्य पुनर्स्थापनात्मक नींद बाधित होती है।
    • AI-सक्षम अनुसंधान: इस डेटासेट का उपयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्वचालित नींद-चरण वर्गीकरण (Automated Sleep-stage Classification) मॉडल के मूल्यांकन के लिए किया गया है, जिससे स्वदेशी निदान उपकरणों के विकास को बढ़ावा मिलता है।
    • ओपन रिसर्च संसाधन: यह अनामीकृत (Anonymised) डेटाबेस सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, जिससे स्ट्रोक पुनर्वास, नींद चिकित्सा तथा तंत्रिका-विज्ञान (Neurological) अनुसंधान में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
  • महत्त्व
    • बेहतर स्ट्रोक देखभाल: यह डेटाबेस नींद संबंधी विकारों के शीघ्र निदान एवं उपचार में सहायता करेगा, जिससे तंत्रिका संबंधी सुधार बेहतर होगा तथा दोबारा स्ट्रोक (Recurrent Stroke) का जोखिम कम होगा।
    • चिकित्सा अनुसंधान को सुदृढ़ करना: यह AI-आधारित नींद अनुसंधान तथा साक्ष्य-आधारित स्ट्रोक-उपरांत देखभाल के लिए भारत का पहला मानकीकृत ओपन-एक्सेस संसाधन उपलब्ध कराता है।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) के बारे में

  • राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (National Institute of Mental Health and Neurosciences – NIMHANS) भारत का प्रमुख संस्थान है, जो मानसिक स्वास्थ्य, तंत्रिका विज्ञान, नैदानिक देखभाल, शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में कार्य करता है। यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत है।
  • स्थापना: NIMHANS की स्थापना 27 दिसंबर, 1974 को अखिल भारतीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (1954) तथा मानसिक चिकित्सालय, बंगलूरू (1847) के विलय से हुई थी।
    • इसे NIMHANS अधिनियम, 2012 के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित किया गया।

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