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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal July 30, 2026 03:29 3 0

एंड्रोमेडा आकाशगंगा कामिडिल एजमें प्रवेश 

खगोलविदों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) से प्राप्त आँकड़ों के आधार पर पिछले 500 मिलियन वर्षों में एंड्रोमेडा आकाशगंगा के अधिकांश भाग में तारों के निर्माण का अब तक का सबसे स्पष्ट मानचित्र तैयार किया है।

एंड्रोमेडा आकाशगंगा के बारे में

  • एंड्रोमेडा आकाशगंगा (M31 या Messier 31 के नाम से भी ज्ञात) एक विशाल ‘बार्ड सर्पिलआकाशगंगा (Barred Spiral Galaxy) है, जो आकार में मिल्की वे के समान है।
  • स्थान: यह एंड्रोमेडा तारामंडल में पृथ्वी से लगभग 2.5 मिलियन प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित है।
  • निकटतम प्रमुख आकाशगंगा: यह मिल्की वे के सबसे निकटतम प्रमुख आकाशगंगा है और अनुकूल अंधकारमय आकाशीय परिस्थितियों में इसे नग्न आँखों से देखा जा सकता है।
  • संरचना: यह एक सर्पिल आकाशगंगा है, जिसकी विशेषता इसके केंद्र में तारों द्वारा निर्मित दंडाकार संरचना (Bar-like Structure) है।
  • आकाशगंगा की ओर गति: यह लगभग 110 किमी./सेकंड की गति से आकाशगंगा (Milky Way) की ओर बढ़ रही है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • तारों के निर्माण में गिरावट: एंड्रोमेडा आकाशगंगा में तारों के निर्माण की दर लगातार कम हो रही है, विशेष रूप से पिछले 40 मिलियन वर्षों में इसमें उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है।
  • वलयाकार संरचनाओं में केंद्रित तारों का निर्माण: हाल के तारों का निर्माण आकाशगंगा की वलयाकार संरचनाओं (Ring Structures) में केंद्रित पाया गया है, जहाँ यह गिरावट सबसे अधिक स्पष्ट है।
  • M32 के निकटमृत क्षेत्र’ (Dead Zone): खगोलविदों ने एंड्रोमेडा की एक छोटी उपग्रह आकाशगंगा M32 के निकट एक मृत क्षेत्र की पहचान की है, जहाँ नए तारों का निर्माण लगभग पूरी तरह रुक चुका है।
  • मध्य आयु’ (Middle Age) की ओर संक्रमण: एंड्रोमेडा आकाशगंगा एक सक्रिय, तारों का निर्माण करने वाली आकाशगंगा से शांत (Quiescent) आकाशगंगा में परिवर्तित हो रही है, जिसकी पहचान तारों के निर्माण में लगातार गिरावट से होती है।

हबल स्पेस टेलीस्कोपके बारे में:

  • यह नासा (NASA) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) द्वारा संयुक्त रूप से संचालित एक अंतरिक्ष-आधारित खगोलीय वेधशाला है।
  • प्रक्षेपण: इसे 24 अप्रैल, 1990 को स्पेस शटल डिस्कवरी (STS-31) के माध्यम से ‘लो अर्थ ऑर्बिट’ (LEO) में प्रक्षेपित किया गया।
  • नामकरण: इसका नाम खगोलविद एडविन हबल (Edwin Hubble) के सम्मान में रखा गया, जिन्होंने ब्रह्मांड के विस्तार को स्थापित किया था।
  • अवलोकन सीमा: यह पराबैंगनी, दृश्य और निकट-अवरक्त तरंगदैर्घ्य में ब्रह्मांड का अवलोकन करती है।
  • प्रमुख विशेषता: यह उच्च-रिजॉल्यूशन अवलोकनों के लिए 2.4 मीटर प्राथमिक दर्पण से सुसज्जित है।

समरसता संकल्प अभियान

संत गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में समरसता संकल्प अभियान को राष्ट्रव्यापी अभियान के रूप में प्रारंभ किया जाएगा।

संत गुरु रविदास महाराज के बारे में

  • संत गुरु रविदास महाराज 15वीं शताब्दी के भक्ति संत, कवि और समाज सुधारक थे।
  • जन्मस्थान: उनका जन्म सीर गोवर्धनपुर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के निकट हुआ था।
  • भक्ति आंदोलन: वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में से एक थे, जिन्होंने कर्मकांड के स्थान पर भक्ति को महत्त्व दिया।
  • मूल शिक्षाएँ: उन्होंने समानता, सामाजिक न्याय, मानव गरिमा और सार्वभौमिक बंधुत्व का संदेश दिया तथा जाति-आधारित भेदभाव का विरोध किया।
  • साहित्यिक योगदान: उनके भक्ति पद गुरु ग्रंथ साहिब, जो सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ है, में शामिल हैं।
  • दर्शन: उन्होंने निर्गुण भक्ति शाखा को बढ़ावा दिया तथा बेगमपुरा की कल्पना की, जो दुःख, भय और भेदभाव से मुक्त एक आदर्श समाज था।
  • मीराबाई से संबंध: माना जाता है कि मीराबाई ने गुरु रविदास को अपना आध्यात्मिक गुरु स्वीकार किया था।
  • विरासत: उनकी शिक्षाएँ आज भी भारत में सामाजिक समानता, सद्भाव और आध्यात्मिक भक्ति से जुड़े आंदोलनों को प्रेरित करती हैं।

क्यूशू (दक्षिणी जापान)

हाल ही में जापान के दक्षिणी तटीय क्षेत्र क्यूशू तट के पास 7.1 तीव्रता का भूकंप आया।

प्रमुख बिंदु:

  • अधिकेंद्र: यह भूकंप क्यूशू के तट के पास आया, जिसका अधिकेंद्र समुद्र तल के नीचे 10 किमी. की गहराई पर स्थित था।
  • सुनामी चेतावनी: जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने एरियाके सागर और यात्सुशिरो सागर के तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की, जिसमें 1 मीटर तक ऊँची लहरों की संभावना जताई गई।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: प्रभावित क्षेत्र वर्ष 2016 के कुमामोटो भूकंप से भी प्रभावित हुआ था, जिसके कारण भारी जनहानि और व्यापक क्षति हुई थी।

क्यूशू (Kyushu)

  • क्यूशू जापान के चार प्रमुख द्वीपों में से सबसे दक्षिणी द्वीप है (ओकिनावा को छोड़कर)
  • यहाँ कई सक्रिय ज्वालामुखी स्थित हैं, जिनमें माउंट आसो और सकुराजिमा प्रमुख हैं।
  • यह एक अत्यधिक भूकंपीय सक्रिय क्षेत्र में स्थित है।

जापान में भूकंप की अधिकता के कारण

  • स्थान: जापान पैसिफिक रिंग ऑफ फायरके किनारे स्थित है, जो विश्व के सबसे अधिक भूकंपीय सक्रिय क्षेत्रों में से एक है।
  • टेक्टॉनिक प्लेटों का अभिसरण: यह प्रशांत प्लेट, फिलीपीन सागर प्लेट, यूरेशियन प्लेट (अमूर) और उत्तरी अमेरिकी प्लेट (ओखोट्स्क) के अभिसरण क्षेत्र में स्थित है।
  • भूकंपीय गतिविधियों की निरंतरता: इन टेक्टॉनिक प्लेटों के परस्पर संपर्क के कारण यहाँ बार-बार भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और सुनामी जैसी घटनाएँ होती हैं।

भारत में डेंगू का प्रकोप

ICMR-VRDL नेटवर्क द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि भारत के अधिकाँश हिस्सों में अब डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप का सह संचरण हो रहा है।

  • यह स्थिति गंभीर रोग के जोखिम को बढ़ा रही है और भविष्य में डेंगू टीकाकरण कार्यक्रमों के संचालन के लिए नई चुनौतियाँ उत्पन्न कर रही है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • व्यापक सह-संचरण: भारत के कई हिस्सों में अब सभी चार सीरोटाइप एक साथ सक्रिय हैं, जो केवल किसी एक प्रमुख ‘स्ट्रेन’ की उपस्थिति नहीं बल्कि बढ़ती महामारी संबंधी जटिलता (Epidemiological Complexity) को दर्शाता है।
  • गंभीरता का बढ़ा जोखिम: दो या अधिक डेंगू सीरोटाइप के सह-संक्रमण (Co-infection) से ग्रस्त रोगियों में गंभीर डेंगू का जोखिम अधिक पाया गया। इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
    • खतरनाक रूप से कम प्लेटलेट संख्या (Thrombocytopenia)
    • रक्तस्राव संबंधी जटिलताएँ।
    • गंभीर जोड़ों का दर्द।

टीका लागू करने से संबंधित प्रभाव

  • भारत में वर्तमान में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में कोई डेंगू टीका शामिल नहीं है।
  • हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय रूप से स्वीकृत डेंगू टीके को भारत में आयात और बिक्री के लिए नियामकीय स्वीकृति प्राप्त हुई है (यह जापान में विकसित टाकेडा (Takeda) के क्यूडेंगा (QDENGA) टीके को संदर्भित करता है)।
  • विभिन्न डेंगू स्ट्रेन के विरुद्ध टीके की प्रभावशीलता अलग-अलग होती है। यदि समय के साथ प्रमुख रूप से प्रसारित होने वाले सीरोटाइप में परिवर्तन  आता है, तो यह प्रकोप की तीव्रता और टीके के प्रदर्शन दोनों को प्रभावित कर सकता है।

डेंगू के बारे में

  • कारक: डेंगू वायरस (DENV), जो एक फ्लेविवायरस है और इसके चार सीरोटाइप होते हैं — DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4
  • संचरण: संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर और कुछ मामलों में एडीज एल्बोपिक्टस (Aedes albopictus) के काटने से।
  • लक्षण: तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते; गंभीर मामलों में डेंगू रक्तस्रावी ज्वर (Dengue Haemorrhagic Fever) या डेंगू शॉक सिंड्रोम (Dengue Shock Syndrome) विकसित हो सकता है।
  • रोकथाम: मच्छर नियंत्रण, मच्छरों के प्रजनन स्थलों का उन्मूलन, व्यक्तिगत सुरक्षा उपाय और अनुशंसित परिस्थितियों में टीकाकरण।

डेंगू सीरोटाइप

  • डेंगू वायरस के चार अलग-अलग सीरोटाइप होते हैं- DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4
  • रोग की गंभीरता स्वयं सीरोटाइप की तुलना में अधिकतर द्वितीयक संक्रमण पर निर्भर करती है, जिसमें पहले डेंगू संक्रमण के बाद किसी अन्य सीरोटाइप से संक्रमण होता है। हालाँकि, ऐतिहासिक रूप से DENV-2 को गंभीर प्रकोपों से अधिक जोड़ा गया है।
  • एक ही क्षेत्र या जनसंख्या में एक साथ कई सीरोटाइप के प्रसार को हाइपरएंडेमिसिटी (Hyperendemicity) या डेंगू हाइपर-एंडेमिक संचरण (Dengue Hyper-endemic Transmission) कहा जाता है।

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