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भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के वित्तपोषण में वृद्धि

Lokesh Pal July 30, 2026 03:24 6 0

संदर्भ 

ट्रैक्सन (Tracxn) की “स्पेस टेक इन इंडिया” रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत के स्पेस-टेक क्षेत्र ने रिकॉर्ड 200 मिलियन डॉलर का वित्तपोषण प्राप्त किया किया है, जिसमें बंगलूरू प्रमुख स्पेस-टेक हब के रूप में उभरा और इस क्षेत्र के कुल वित्तपोषण का 57% यहाँ पर हुआ।

प्रमुख बिंदु

  • पारिस्थितिकी तंत्र: भारत में 285 स्पेस-टेक कंपनियाँ हैं (274 सक्रिय), जिनमें से 72 कंपनियों ने इक्विटी वित्तपोषण प्राप्त किया है।
  • कुल वित्तपोषण: इस क्षेत्र ने जुलाई 2026 तक 871 मिलियन डॉलर का वित्तपोषण जुटाया है।
  • वित्तपोषण प्रवृत्ति: वित्तपोषण वर्ष 2021 में 43 मिलियन डॉलर से बढ़कर वर्ष 2025 में 200 मिलियन डॉलर हो गया; वर्ष 2026 (वर्ष-दर-वर्ष) में अब तक 24 दौरों में 113 मिलियन डॉलर का वित्तपोषण दर्ज किया गया है।
  • वित्तपोषण का संकेंद्रण: शीर्ष 10 कंपनियों ने कुल वित्तपोषण का 548 मिलियन डॉलर से अधिक (60%+) हिस्सा प्राप्त किया है; केवल 10 कंपनियों ने 15 मिलियन डॉलर से अधिक का वित्तपोषण जुटाया है।
  • अपेक्षित समेकन: अगले 12–18 महीनों में पर्याप्त वित्तपोषण प्राप्त न कर पाने वाले स्पेस-टेक स्टार्ट-अप्स के बीच विलय (Mergers), रणनीतिक पुनर्गठन (Strategic Pivot) तथा परिचालन बंद होने (Shutdowns) की प्रवृत्ति देखने को मिल सकती है। यह परिदृश्य वर्ष 2023–24 में भारतीय फिनटेक क्षेत्र में हुए समेकन के समान रहने की संभावना व्यक्त की गई है।
  • स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace): भारत का पहला स्पेसटेक यूनिकॉर्न है, जिसने 150 मिलियन डॉलर का वित्तपोषण जुटाया है।
    • इसने विक्रम-1 (Vikram-1) विकसित किया, जो भारत का पहला निजी रूप से विकसित कक्षीय श्रेणी का रॉकेट है और जिसने 18 जुलाई, 2026 को सफलतापूर्वक निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में प्रवेश किया।

रिपोर्ट के अनुसार विकास के प्रमुख कारक

  • वर्ष 2020 के अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार: इन्होंने संपूर्ण अंतरिक्ष मूल्य शृंखला में निजी भागीदारी को सक्षम बनाया।
  • इसरो का प्रौद्योगिकी हस्तांतरण ढाँचा: यह स्टार्ट-अप्स को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों, परीक्षण सुविधाओं और मिशन विशेषज्ञता तक पहुँच प्रदान करता है।

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था

  • वर्तमान आकार: इसका मूल्य लगभग 8.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का लगभग 2% है।
  • वृद्धि लक्ष्य:
    • वर्ष 2033 तक: 44 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का लक्ष्य, जिसमें वैश्विक बाजार हिस्सेदारी का 8% लक्ष्य निर्धारित है।
    • वर्ष 2040 तक: 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का लक्ष्य, जिसमें वैश्विक बाजार हिस्सेदारी का 10% लक्ष्य निर्धारित है।

वैश्विक स्पेसटेक वित्तपोषण के साथ तुलना

  • भारत का वित्तपोषण: भारतीय स्पेसटेक स्टार्ट-अप्स ने पिछले 5 वर्षों में लगभग 354 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं।
  • वैश्विक वित्तपोषण: इसी अवधि के दौरान वैश्विक स्पेसटेक स्टार्ट-अप्स ने लगभग 28 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश आकर्षित किए।
  • वित्तपोषण अंतर: अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के निरंतर विस्तार के बावजूद, भारत में निजी स्पेस-टेक क्षेत्र को प्राप्त वित्तपोषण वैश्विक निवेश की तुलना में अभी भी सीमित है।
  • हालिया प्रवृत्ति: वर्ष 2024 में भारत में स्पेस टेक में प्राप्त वित्तपोषण घटकर 59.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया, जो वैश्विक वेंचर कैपिटल में आई मंदी को दर्शाता है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदम

  • अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार (वर्ष 2020): संपूर्ण अंतरिक्ष मूल्य शृंखला को निजी भागीदारी के लिए उपलब्ध कराया गया।
  • भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023: यह अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी और वाणिज्यीकरण को बढ़ाने के लिए नीतिगत ढाँचा प्रदान करती है।
  • IN-SPACe: निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, अधिकृत करने और पर्यवेक्षण करने के लिए ‘सिंगल विंडो’ एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया।
  • उदार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति (वर्ष 2024): निर्दिष्ट अंतरिक्ष गतिविधियों में स्वचालित मार्ग या सरकारी मार्ग के तहत 100% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति प्रदान करती है।
  • ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड: अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स को समर्थन देने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए IN-SPACe के अंतर्गत स्थापित किया गया।
  • प्रौद्योगिकी अंगीकरण फंड: स्टार्ट-अप्स और उद्योगों द्वारा विकसित स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के वाणिज्यीकरण को समर्थन प्रदान करता है।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं अवसंरचना तक पहुँच: निजी संस्थाओं को इसरो (ISRO) की प्रौद्योगिकियों, परीक्षण सुविधाओं और मिशन विशेषज्ञता तक पहुँच प्रदान करता है।

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