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Lokesh Pal
July 15, 2026 05:15
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सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता ने अनेक शिक्षकों को कंटेंट क्रिएटर (Content Creator) और इन्फ्लुएंसर (Influencer) के रूप में स्थापित कर दिया है।
यद्यपि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने शिक्षा को अधिक रोचक, आकर्षक और सुलभ बनाया है, लेकिन इसके साथ ही शिक्षक–छात्र के पारंपरिक संबंधों की सीमाएँ भी धुंधली हो गई हैं, जिससे व्यावसायिक नैतिकता, बाल सुरक्षा, निजता (Privacy) और जवाबदेही से संबंधित चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।
अर्थात प्रौद्योगिकी में शिक्षा को रूपांतरित करने की अपार क्षमता है, किंतु शिक्षकों को इन्फ्लुएंसर बनने से पहले एक शिक्षक बने रहना चाहिए। व्यावसायिक नैतिकता, बाल सुरक्षा, डिजिटल निजता तथा शिक्षण-पद्धति की गुणवत्ता (Pedagogical Integrity) को बनाए रखना आवश्यक है, ताकि डिजिटल नवाचार शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने के बजाय उसे और अधिक सशक्त बना सके।
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