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भारत में नौकरशाही के प्रदर्शन में सुधार

Lokesh Pal July 16, 2026 05:00 7 0

संदर्भ

हाल ही में कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने वरिष्ठ सरकारी सचिव से एक विचारोत्तेजक प्रश्न पूछा—

 “क्या आपके पास 30 वर्षों का अनुभव है, या आपने एक ही वर्ष के अनुभव को 30 बार दोहराया है?”

इस टिप्पणी ने नौकरशाही में ठहराव, प्रदर्शन मूल्यांकन तथा भारत की सिविल सेवाओं को परिणाम-आधारित (Outcome-Oriented) प्रशासन की ओर ले जाने की आवश्यकता पर पुनः बहस को जन्म दिया है ।

नौकरशाही के प्रदर्शन में सुधार की आवश्यकता क्यों?

  • नौकरशाही में ठहराव 
    • सिविल सेवक सामान्यतः कई वर्षों तक एक ही प्रकार के नियमित कार्य करते रहते हैं, जिससे नवाचार, सीखने और कौशल विकास के अवसर सीमित हो जाते हैं।
    • अनुभव परिवर्तनकारी (Transformative) बनने के बजाय दोहरावपूर्ण हो जाता है, जो उभरती शासन संबंधी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने की क्षमता को उजागर करता है।
  • परिणाम-आधारित के बजाय नियम-आधारित प्रशासन
    • वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था वास्तविक सार्वजनिक सेवा परिणामों के बजाय नियमों एवं प्रक्रियाओं के पालन को अधिक महत्त्व देती है।
    • यदि प्रक्रियाओं का पालन कर लिया जाए, तो खराब सेवा-प्रदाय या नीतियों के अप्रभावी क्रियान्वयन पर शायद ही कभी जवाबदेही तय होती है।
  • मिशन-उन्मुख शासन का अभाव
    • अधिकांश प्रशासनिक पदों के लिए स्पष्ट प्रदर्शन लक्ष्य निर्धारित नहीं होते, जिससे दक्षता एवं प्रभावशीलता का मूल्यांकन कठिन हो जाता है।
    • मापनीय लक्ष्यों के अभाव में अधिकारियों को उच्च प्रभाव वाले शासन सुधारों के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिलता।

प्रमुख संरचनात्मक चुनौतियाँ

  • अत्यधिक प्रक्रियात्मक अनुपालन 
    • जटिल नियम एवं विनियम अधिकारियों के विवेकाधिकार का उपयोग करने तथा नवाचार युक्त निर्णय लेने से हतोत्साहित करते हैं।
    • अधिकारी नागरिकों की समस्याओं के समाधान की अपेक्षा प्रक्रियात्मक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
  • जोखिम से बचने वाली प्रशासनिक संस्कृति 
    • जाँच, ऑडिट और कानूनी समीक्षा का भय अधिकारियों को साहसिक निर्णय लेने से रोकता है।
  • कुछ अधिकारी भविष्य में प्रक्रियात्मक उल्लंघन के आरोप से बचने हेतु निर्णय लेने के बजाय निष्क्रियता को प्राथमिकता देते हैं।
  • कमजोर प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली
    • वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) प्रणाली में दक्ष एवं कमज़ोर दोनों प्रकार के अधिकारियों को लगभग समान अंक प्रदान किए जाते हैं।
    • इस प्रकार का समान मूल्यांकन प्रेरणा को कम करता है, योग्यता-आधारित व्यवस्था (Meritocracy) को कमजोर करता है तथा उत्कृष्ट कार्य को उचित प्रोत्साहन नहीं देता।
  • बार-बार स्थानांतरण 
    • लगातार स्थानांतरण के कारण अधिकारी किसी क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित नहीं कर पाते और दीर्घकालिक सुधार अधूरे रह जाते हैं।
    • अनेक अधिकारियों का औसत कार्यकाल इतना कम होता है कि वे किसी नीति का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन एवं मूल्यांकन ही नहीं कर पाते हैं ।

परिणाम एवं प्रक्रिया: उदाहरण

शिक्षा क्षेत्र

  • प्रशासनिक सफलता का आकलन अक्सर सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio—GER) के आधार पर किया जाता है, न कि विद्यार्थियों के वास्तविक अधिगम परिणामों (Learning Outcomes) के आधार पर।
  • उच्च नामांकन का अर्थ यह नहीं कि शिक्षा की गुणवत्ता या बुनियादी साक्षरता में सुधार हुआ है।

अवसंरचना विकास

  • सड़कें निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हो सकती हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता एवं टिकाऊपन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
  • प्रदर्शन का मूल्यांकन अक्सर समय पर परियोजना पूर्ण करने पर आधारित होता है, न कि उसकी दीर्घकालिक उपयोगिता और गुणवत्ता पर।

मुख्य अवधारणाएँ (UPSC Mains के लिए महत्त्वपूर्ण)

  • नौकरशाही का ‘आयरन केज’ (Iron Cage of Bureaucracy)
    • मैक्स वेबर (Max Weber) के “आयरन केज ऑफ ब्यूरोक्रेसी” सिद्धांत से इस बात की पुष्टि होती है कि अत्यधिक प्रक्रियात्मक नियंत्रण नवाचार, लचीलापन और प्रभावी निर्णय-निर्माण को सीमित कर देता है।
    • परिणामस्वरूप, अधिकारी गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवाएँ प्रदान करने के बजाय स्वयं को सुरक्षित रखने पर अधिक ध्यान देते हैं।
  • नौकरशाही में जोखिम से बचाव 
    • पी. स्नेहा द्वारा लिखित Bureaucratic Indecision and Risk Aversion in India के अनुसार, अधिकारी भविष्य में कानूनी या सतर्कता (Vigilance) संबंधी कार्रवाई के भय से महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने से बचते हैं।
    • यह संस्कृति प्रशासनिक जड़ता को बढ़ावा देती है तथा सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में विलंब उत्पन्न करती है।

आगे की राह 

  • परिणाम-आधारित जवाबदेही अपनाना
    • प्रदर्शन मूल्यांकन, पदोन्नति एवं प्रोत्साहन को केवल प्रक्रियात्मक अनुपालन के बजाय मापनीय विकासात्मक परिणाम के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
    • प्रशासनिक सफलता का आकलन नागरिकों के कल्याण एवं सेवा-प्रदाय में सुधार के आधार पर किया जाना चाहिए।
  • न्यूनतम निश्चित कार्यकाल सुनिश्चित करना
    • अधिकारियों को 3–5 वर्ष का न्यूनतम निश्चित कार्यकाल दिया जाना चाहिए ताकि वे सुधार लागू कर सकें, संस्थागत ज्ञान विकसित कर सकें तथा नीतियों की निरंतरता बनाए रख सकें।
    • स्थिर पदस्थापन जवाबदेही को बढ़ाता है और दीर्घकालिक योजना को प्रोत्साहित करता है।
  • प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली में सुधार
    • वस्तुनिष्ठ एवं साक्ष्य-आधारित प्रदर्शन संकेतकों (Performance Indicators) को अपनाया जाए, जिससे उत्कृष्ट एवं कमजोर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों के मध्य स्पष्ट अंतर किया जा सके।
    • नागरिकों की प्रतिक्रिया, विभागीय उपलब्धियाँ तथा नवाचार को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ।
  • नवाचार एवं उत्तरदायी जोखिम लेने को प्रोत्साहन
    • प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से ऐसा वातावरण निर्मित किया जाना चाहिए, जहाँ कि जनहित में सद्भावना से लिए गए निर्णयों को संस्थागत संरक्षण प्राप्त हो।
    • बेहतर शासन के उद्देश्य से हुई त्रुटियों पर स्वतः दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
  • क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करना
    • पारंपरिक वरिष्ठता-आधारित प्रशासनिक संस्कृति के स्थान पर निरंतर प्रशिक्षण, विषय-विशेषज्ञता (Domain Specialisation) तथा नेतृत्व विकास को बढ़ावा दिया जाए।
    • अधिकारियों को प्रौद्योगिकी, लोक नीति, डेटा विश्लेषण तथा साक्ष्य-आधारित शासन संबंधी कौशल से सुसज्जित किया जाना चाहिए ।
  • मिशन-मोड शासन अपनाना
    • प्रत्येक विभाग के लिए स्पष्ट लक्ष्य, समय-सीमा, मापनीय परिणाम तथा जवाबदेही तंत्र निर्धारित किया जाए।
  • मिशन-उन्मुख शासन से विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता तथा सार्वजनिक सेवा वितरण में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।

निष्कर्ष

निष्कर्षतः भारत की सिविल सेवाएँ देश की सबसे महत्त्वपूर्ण शासन संस्थाओं में से एक हैं, किंतु उनकी पूर्ण क्षमता का उपयोग करने के लिए संरचनात्मक सुधार की आवश्यक हैं। नियम-आधारित प्रशासन से परिणाम-उन्मुख शासन की ओर झुकाव, निश्चित कार्यकाल, प्रभावी प्रदर्शन मूल्यांकन, नवाचार को प्रोत्साहन तथा क्षमता निर्माण के माध्यम से नौकरशाही को अधिक उत्तरदायी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। इससे सुशासन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

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