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Lokesh Pal
July 16, 2026 05:15
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हाल ही में ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य बढ़ते तनाव तथा ईरान के यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) कार्यक्रम को लेकर जारी मतभेदों ने एक बार फिर परमाणु अप्रसार (Nuclear Non-Proliferation) के मुद्दे को वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वर्तमान वार्ताएँ वैश्विक सुरक्षा, राज्य की संप्रभुता तथा अंतरराष्ट्रीय अप्रसार व्यवस्था की प्रभावशीलता के मध्य संतुलन स्थापित करने की व्यापक चुनौती को दर्शाती हैं।
परमाणु अप्रसार से आशय उन वैश्विक प्रयासों से है जिनका उद्देश्य—
यह व्यवस्था मुख्यतः परमाणु अप्रसार संधि (Treaty on the Non-Proliferation of Nuclear Weapons—NPT) द्वारा संचालित होती है, जिसका उद्देश्य परमाणु संघर्ष के जोखिम को कम करना तथा शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग को प्रोत्साहित करना है।
अर्थात परमाणु अप्रसार की सबसे बड़ी चुनौती राष्ट्रीय सुरक्षा, राज्य की संप्रभुता तथा वैश्विक शांति के मध्य संतुलन स्थापित करना है। यद्यपि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना अत्यंत आवश्यक है, किंतु दीर्घकालिक स्थिरता तभी संभव है जब अंतरराष्ट्रीय नियम भेदभाव-रहित, परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रयास विश्वसनीय तथा कूटनीतिक संवाद निरंतर बने रहें। एक न्यायसंगत, नियम-आधारित और समावेशी वैश्विक परमाणु व्यवस्था ही दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की आधारशिला सिद्ध होगी।
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