100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

भारत की अफ्रीका नीति: समय-समय पर होने वाले शिखर सम्मेलनों के बजाय निरंतर सहभागिता की आवश्यकता

Lokesh Pal May 16, 2026 05:15 5 0

संदर्भ:

यह विश्लेषण भारत-अफ्रीका संबंधों का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत करता है, जिसमें आगामी शिखर सम्मेलन तथा दोनों के बीच रणनीतिक साझेदारी के ढाँचे पर चर्चा की गई है।

  • जिस अफ्रीका को कभी “अंधकारमय महाद्वीप” कहा जाता था, आज उसे उसकी तीव्र आर्थिक वृद्धि, विशाल बाज़ार और बड़ी युवा आबादी के कारण “आशा का महाद्वीप” माना जाता है।
  • परिणामस्वरूप, वैश्विक शक्तियाँ वहाँ प्रभाव के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। भारत मई 2026 के अंत में चौथे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन(IAFS) की मेजबानी की तैयारी कर रहा है, जो वर्ष 2015 के बाद लंबे अंतराल के पश्चात उच्च-स्तरीय सहभागिता की एक महत्वपूर्ण वापसी को दर्शाता है।

IAFS – मुख्य तथ्य और पृष्ठभूमि

IAFS क्या है?

  • भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन (IAFS) वह आधिकारिक मंच है जहाँ विभिन्न अफ्रीकी देशों के नेता भारतीय नेतृत्व, विशेषकर प्रधानमंत्री, के साथ सहयोग और साझा हितों पर चर्चा करते हैं।

प्रमुख सम्मेलन 

  • पहला शिखर सम्मेलन (2008): नई दिल्ली में आयोजित।
  • दूसरा शिखर सम्मेलन (2011): अदीस अबाबा, इथियोपिया में आयोजित।
  • तीसरा शिखर सम्मेलन (2015): नई दिल्ली में आयोजित।
  • चौथा शिखर सम्मेलन (2026): मई 28–31, 2026 को निर्धारित है, जिसे कोविड -19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण वर्ष 2020 से स्थगित कर दिया गया था।

भारत का मार्गदर्शक सिद्धांत

  • भारत की नीति कम्पाला सिद्धांतों (Kampala Principles) पर आधारित है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वर्ष 2018 में युगांडा की संसद में व्यक्त किया था। अन्य शक्तियों के विपरीत, भारत की सहभागिता अफ्रीका की अपनी प्राथमिकताओं द्वारा निर्देशित होती है। भारत बाह्य एजेंडा थोपने के बजाय, अफ्रीकी देशों की विकास आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोग करना चाहता है।

महत्वपूर्ण शब्दावली

  • अफ़्रीकी संघ आयोग (AUC): 55 देशों वाले अफ्रीकी संघ का सचिवालय, जो महाद्वीपीय स्तर पर दैनिक निर्णयों का संचालन करता है।
  • स्थायी प्रतिनिधि समिति (PRC): अफ्रीकी संघ के सदस्य देशों के राजदूतों और राजनयिकों की समिति।
  • क्षेत्रीय आर्थिक समुदाय (RECs): अफ्रीका के भीतर ऐसे क्षेत्रीय गुट, जैसे ECOWAS या SADC, जो व्यापार को बढ़ाने का कार्य करते हैं।
  • ट्रैक 1.5 कूटनीति: ऐसा जुड़ाव जिसमें न केवल सरकारी अधिकारी (ट्रैक 1) शामिल होते हैं, बल्कि थिंक टैंक, शिक्षाविद और उद्योग जगत के नेता भी शामिल होते हैं।
  • FOCAC: चीन-अफ्रीका सहयोग मंच (The Forum on China-Africa Cooperation), जो IAFS का चीन का अधिक संस्थागत और सुव्यवस्थित संस्करण है।

भारत-अफ्रीका संबंधों की मुख्य समस्याएँ

  • सहभागिता में महत्वपूर्ण अंतराल: तीसरे और चौथे शिखर सम्मेलनों के बीच 11 वर्षों का अंतराल नियमित संपर्क बनाए रखने में एक बड़ी विफलता के रूप में देखा जाता है।
  • प्रतिस्पर्धी परिदृश्य: भारत को चीन, यूरोपीय संघ (EU), जर्मनी, फ्रांस और दक्षिण कोरिया से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जो सभी अफ्रीका के साथ साझेदारी को आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रहे हैं।
  • चीन का संरचनात्मक लाभ: भारत की तुलना में चीन की सहभागिता अधिक संस्थागत और निरंतर है, जिसके कारण कई अफ्रीकी देश बीजिंग के साथ संबंधों को प्राथमिकता देते हैं।
  • वितरण अंतराल: भारत की अक्सर “नाटकीयता” या उच्च-स्तरीय बयानबाज़ी के लिए आलोचना की जाती है, क्योंकि बुनियादी ढाँचे और प्रशिक्षण संबंधी वादों को समय पर पूरा नहीं किया जाता।
  • सद्भावना पर घटता प्रतिफल: यद्यपि भारत और अफ्रीका उपनिवेशवाद से मुक्ति के एक साझा इतिहास को साझा करते हैं, फिर भी यह ऐतिहासिक सद्भावना अब अन्य देशों द्वारा दिए जा रहे ठोस संसाधनों के मुकाबले पर्याप्त नहीं रह गई है।

समाधान – प्रक्रिया-आधारित साझेदारी का निर्माण

  • त्रि-स्तरीय ढाँचा: भारत को द्विपक्षीय (व्यक्तिगत देशों के साथ), क्षेत्रीय (व्यापारिक समूहों/क्षेत्रीय आर्थिक समुदायों के साथ) और पैन-अफ्रीकी (India Africa Forum Summit) स्तरों पर सहभागिता को पुनर्जीवित करना चाहिए।
  • वार्षिक उच्च-स्तरीय दौरे: भारत को अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष को प्रतिवर्ष आमंत्रित करना चाहिए, जिससे महाद्वीप के साथ नियमित सहभागिता सुनिश्चित हो सके और साथ ही अध्यक्ष के गृह देश के साथ भी संबंध मजबूत हों।
  • रणनीतिक संवाद: नीति-निर्माताओं और निजी क्षेत्र को एक साथ लाने के लिए ट्रैक 1.5 संवादों का उपयोग करना, ताकि व्यावहारिक रूप से लागू किए जा सकने वाले परियोजनाओं की पहचान की जा सके।
  • प्रतिबद्धताओं का संस्थानीकरण: प्रगति की निगरानी के लिए नियमित परामर्श स्थापित करना और यह सुनिश्चित करना कि सभी प्रतिबद्धताएँ समय पर पूरी हों, ताकि भारत की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया जा सके।

अफ्रीका के लिए भारत का महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव

  • क्षमता निर्माण: चीन के संसाधन निष्कर्षण और “ऋण-जाल” पर केंद्रित दृष्टिकोण के विपरीत, भारत अफ्रीकी लोगों की क्षमताओं के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI): भारत UPI और आधार जैसी प्रणालियों में विशेषज्ञता प्रदान करता है, जिन्हें मॉरीशस और नामीबिया जैसे देशों द्वारा पहले ही अपनाया जा चुका है।
  • ITEC कार्यक्रम: भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम अफ्रीकी युवाओं को निःशुल्क व्यावसायिक और पेशेवर प्रशिक्षण प्रदान करता है।
  • हरित ऊर्जा: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के माध्यम से, भारत सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करता है और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ऋण प्रदान करता है।
  • क्षेत्रीय विशेषज्ञता: भारत कृषि (जिस पर कई अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाएँ निर्भर हैं) और आतंकवाद-रोधी उपायों में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करता है।

निष्कर्ष

  • भारत के पास साझेदारी का एक विशिष्ट, गैर-निर्देशात्मक (non-prescriptive) मॉडल है, जो अफ्रीकी आवश्यकताओं और मानव पूँजी को प्राथमिकता देता है।
    • हालाँकि, “भीड़भाड़ वाले (crowded)” अफ्रीका में प्रासंगिक बने रहने के लिए भारत को अपने वादों और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच की खाई को कम करना होगा।
  • यदि भारत अनियमित शिखर सम्मेलनों के बजाय एक संस्थागत और प्रक्रिया-आधारित साझेदारी विकसित करता है, तो वह अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और ऐतिहासिक संबंधों के माध्यम से अफ्रीका के साथ वास्तव में स्थायी और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध स्थापित कर सकता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न: 

प्रश्न: अफ्रीका में अत्यधिक प्रतिस्पर्धी भू-राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में, भारत की अफ्रीका नीति में ‘घोषणात्मक कूटनीति (Declaratory Diplomacy)’ से ‘प्रक्रिया-आधारित साझेदारी’ की ओर आवश्यक बदलाव का मूल्यांकन कीजिए। इस सहभागिता को सतत बनाए रखने हेतु संरचनात्मक उपाय सुझाइए।

(15 अंक, 250 शब्द)

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.