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प्रत्येक भारतीय के लिए वित्तीय स्वास्थ्य का भविष्य

Lokesh Pal July 11, 2026 05:30 3 0

संदर्भ

जून 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के वित्तीय स्वास्थ्य के विशेष अधिवक्ता ने भारत का दौरा किया, ताकि देश में वित्तीय समावेशन तथा वित्तीय लचीलेपन की दिशा में हुई प्रगति का अध्ययन किया जा सके।

  • इस मूल्यांकन में वित्तीय सेवाओं तक पहुँच का विस्तार करने में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों की सराहना की गई, साथ ही इस बात पर बल दिया गया कि अब केवल वित्तीय समावेशन तक सीमित रहने के बजाय वित्तीय स्वास्थ्य की दिशा में आगे बढ़ना आवश्यक है।
  • इसका मुख्य संदेश यह था कि केवल बैंक खाता होना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति में बचत करने, निवेश करने, बीमा का लाभ लेने, वित्तीय झटकों का सामना करने तथा दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा प्राप्त करने की क्षमता भी होनी चाहिए।

वित्तीय स्वास्थ्य क्या है?

  • वित्तीय स्वास्थ्य से तात्पर्य किसी व्यक्ति की उस क्षमता से है, जिसके माध्यम से वह दैनिक वित्तीय आवश्यकताओं का प्रभावी ढंग से प्रबंधन कर सके, अप्रत्याशित वित्तीय झटकों का सामना कर सके, भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त कर सके तथा अपने वित्तीय भविष्य के प्रति आत्मविश्वास महसूस कर सके।
  • यह केवल वित्तीय सेवाओं तक पहुँच को मापने का सूचक नहीं है, बल्कि वित्तीय कल्याण का एक गुणात्मक मापदंड है।
  • वित्तीय स्वास्थ्य व्यक्तियों को केवल वित्तीय अस्तित्व तक सीमित रहने के बजाय वित्तीय लचीलापन और समृद्धि की ओर अग्रसर होने में सक्षम बनाता है।

वित्तीय समावेशन बनाम वित्तीय स्वास्थ्य 

वित्तीय समावेशन

वित्तीय स्वास्थ्य

वित्तीय समावेशन का मुख्य उद्देश्य बैंक खाते, बीमा, पेंशन तथा डिजिटल भुगतान जैसी वित्तीय सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराना है। वित्तीय स्वास्थ्य का मुख्य उद्देश्य इन वित्तीय सेवाओं का प्रभावी एवं नियमित उपयोग करके दीर्घकालिक वित्तीय कल्याण सुनिश्चित करना है।
इसका प्राथमिक उद्देश्य औपचारिक वित्तीय संस्थानों तक लोगों की पहुँच सुनिश्चित करना है। इसका प्राथमिक उद्देश्य वित्तीय लचीलापन, आत्मविश्वास तथा दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा का निर्माण करना है।
इसकी सफलता का आकलन खोले गए बैंक खातों की संख्या के आधार पर किया जाता है। इसकी सफलता का आकलन व्यक्तियों द्वारा प्राप्त वास्तविक वित्तीय परिणामों के आधार पर किया जाता है।
उदाहरण: प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के अंतर्गत बैंक खाता खोलना। उदाहरण: जन धन खाते का उपयोग बीमा, पेंशन, बचत तथा ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए करना।

अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण के माध्यम से अंतर

  • अमर्त्य सेन का क्षमता दृष्टिकोण इस बात पर बल देता है कि केवल संसाधनों का स्वामित्व होने मात्र से किसी व्यक्ति का कल्याण सुनिश्चित नहीं होता।
  • व्यक्तियों के पास उन संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमता भी होनी चाहिए।
  • इसी प्रकार, केवल बैंक खाता खोलना अपने-आप वित्तीय कल्याण में सुधार नहीं करता, जब तक कि व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए वित्तीय उत्पादों का सक्रिय रूप से उपयोग न करे।
  • इसलिए, वित्तीय समावेशन लोगों को अवसर प्रदान करता है, जबकि वित्तीय स्वास्थ्य उन अवसरों को सार्थक परिणामों में परिवर्तित करने में सक्षम बनाता है।

वित्तीय स्वास्थ्य का महत्त्व 

  • गरीबी की रोकथाम : वित्तीय झटकों के बाद परिवारों को गरीबी में गिरने से बचाता है।
  • समावेशी विकास को बढ़ावा : बचत, निवेश तथा जिम्मेदार उधारी को प्रोत्साहित करता है।
  • जीवन-स्तर में सुधार: वित्तीय तनाव को कम करता है तथा जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।
  • अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना: व्यापक आर्थिक स्थिरता एवं सतत विकास को समर्थन देता है।

भारत का वित्तीय परिवर्तन 

  • वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय प्रगति: ग्लोबल फिनडेक्स के अनुसार बैंक खातों का स्वामित्व 56% से बढ़कर लगभग 89% हो गया है।
  • JAM ट्रिनिटी : जन-धन, आधार और मोबाइल (JAM) के माध्यम से बैंकिंग, डिजिटल भुगतान तथा कल्याणकारी योजनाओं तक लोगों की पहुँच का विस्तार हुआ है।
  • डिजिटल वित्त में अग्रणी: भारत ने लाखों लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में सफलता प्राप्त की है।

विकसित भारत 2047 में योगदान 

  • समावेशी विकास को गति: वित्तीय रूप से सशक्त एवं लचीले समाज का निर्माण करता है।
  • कल्याण से समृद्धि की ओर : वित्तीय आत्मनिर्भरता तथा परिसंपत्ति निर्माण को बढ़ावा देता है।
  • विकसित भारत के लक्ष्य को समर्थन : वित्तीय स्वास्थ्य, विकसित भारत 2047 की परिकल्पना का एक प्रमुख आधार है।

भारत से अध्ययन-प्रकरण 

दिल्ली: असंगठित श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक पेंशन 

  • संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रतिनिधिमंडल ने पाया कि दिल्ली में असंगठित क्षेत्र के श्रमिक बड़ी संख्या में पेंशन योजनाओं में नामांकन करा रहे हैं।
  • सेवानिवृत्ति बचत तक पहुँच ने वृद्धावस्था में परिवार के सदस्यों पर निर्भरता को कम किया तथा वित्तीय गरिमा को बढ़ावा दिया।
  • यह पहल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने के व्यापक उद्देश्य को सुदृढ़ करती है।

मुंबई: कार्यस्थल पर वित्तीय स्वास्थ्य 

  • एक फिनटेक कंपनी ने अस्पतालों के साथ मिलकर नर्सों को उत्तरदायी ऋण, किफायती ऋण सुविधाएँ तथा व्यक्तिगत वित्तीय परामर्श उपलब्ध कराया।
  • कर्मचारियों का वित्तीय स्वास्थ्य आकलन भी किया गया, जिससे उन्हें धन प्रबंधन में सुधार करने और वित्तीय तनाव को कम करने में सहायता मिली।
  • इस पहल ने यह प्रदर्शित किया कि नियोक्ता और फिनटेक कंपनियाँ बेहतर वित्तीय कल्याण के माध्यम से कार्यबल की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती हैं।

वित्तीय स्वास्थ्य को समर्थन देने वाली सरकारी पहलें 

  • वित्तीय समावेशन 
    • प्रधानमंत्री जन धन योजना : औपचारिक बैंकिंग प्रणाली तथा बुनियादी वित्तीय सेवाओं तक लोगों की पहुँच का विस्तार करती है।
    • JAM ट्रिनिटी: जन धन, आधार और मोबाइल को एकीकृत कर निर्बाध डिजिटल वित्तीय सेवाएँ तथा कल्याणकारी लाभों का प्रभावी वितरण सुनिश्चित करती है।
    • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण : सरकारी लाभों के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करते हुए लीकेज को कम करता है।
  • सामाजिक सुरक्षा 
    • अटल पेंशन योजना : असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सुनिश्चित पेंशन सुरक्षा प्रदान करती है।
    • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY): निम्न आय वाले परिवारों को किफायती जीवन बीमा उपलब्ध कराती है।
    • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY): कम प्रीमियम पर दुर्घटना बीमा प्रदान कर वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करती है।
    • राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS): स्वैच्छिक पेंशन अंशदान के माध्यम से दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति बचत को प्रोत्साहित करती है।
  • असंगठित श्रमिकों के लिए समर्थन 
    • ई-श्रम पोर्टल: असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करता है, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा एवं विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराया जा सके।

चुनौतियाँ 

  • विशाल असंगठित कार्यबल :भारत के लगभग 90% कार्यबल का रोजगार असंगठित क्षेत्र में है, जहाँ स्थिर आय, पेंशन तथा बीमा जैसी वित्तीय सुरक्षा सुविधाओं तक पहुँच अभी भी सीमित है।
  • निष्क्रिय वित्तीय खाते : वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय सफलता के बावजूद, कई बैंक खाते निष्क्रिय बने हुए हैं और उनका नियमित उपयोग नहीं हो रहा है।
  • निम्न वित्तीय साक्षरता : वित्तीय जागरूकता की कमी के कारण अनेक परिवार बीमा, पेंशन, निवेश तथा डिजिटल वित्तीय सेवाओं का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाते।
  • आय में अस्थिरता : असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की आय प्रायः अनियमित होती है, जिससे नियमित बचत और दीर्घकालिक वित्तीय योजना बनाना कठिन हो जाता है।
  • सीमित सामाजिक सुरक्षा कवरेज : अनेक कमज़ोर एवं संवेदनशील परिवार अभी भी व्यापक वित्तीय सुरक्षा तंत्र के दायरे से बाहर हैं, जिससे वे वित्तीय जोखिमों के प्रति अधिक असुरक्षित बने रहते हैं।

आगे की राह 

  • जन धन 2.0 का विकास : प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) को एक एकीकृत वित्तीय लचीलापन मंच के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), पीएम-किसान (PM-KISAN), ई-श्रम (e-Shram), अटल पेंशन योजना (APY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) तथा मनरेगा (MGNREGA) के भुगतान को आपस में जोड़ा जाए।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) को सुदृढ़ बनाना : भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) का विस्तार किया जाए, ताकि प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, किफायती एवं समावेशी वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुँच उपलब्ध हो सके।
  • डेटा-आधारित नीति-निर्माण को बढ़ावा : घरेलू वित्तीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण तथा प्रशासनिक आँकड़ों का उपयोग कर लक्षित एवं साक्ष्य-आधारित वित्तीय नीतियाँ तैयार की जानी चाहिए।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को प्रोत्साहन: सरकार, फिनटेक कंपनियों, नियोक्ताओं तथा वित्तीय संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाए, ताकि वित्तीय साक्षरता, किफायती ऋण, बीमा तथा सेवानिवृत्ति योजना को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न: “भारत की वित्तीय समावेशन की यात्रा को अब केवल बैंक खातों के स्वामित्व तक सीमित न रहकर परिवारों के वित्तीय स्वास्थ्य एवं वित्तीय लचीलेपन की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।” समालोचनात्मक चर्चा कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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