संदर्भ
भारत-बांग्लादेश सीमा पर दलदली और बिना बाड़ वाले इलाकों में निगरानी की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत नदी वाले खाली हिस्सों में ‘रेप्टाइल पेट्रोल’ (Reptile Patrols) शुरू करने पर विचार कर रहा है।
‘रेप्टाइल पेट्रोल’ पहल की मुख्य विशेषताएँ
- प्रस्ताव: नदी वाले उन इलाकों में, जहाँ बाड़ लगाना और गश्त का ढाँचा असरदार नहीं है, मगरमच्छों/साँपों जैसे प्राकृतिक शिकारियों का प्रयोग जैविक अवरोध के तौर पर करना।
- तर्क: इसका उद्देश्य कर्मचारियों की कमी, दुर्गम क्षेत्र और तस्करी/घुसपैठ के बढ़ते खतरों के बीच सीमा सुरक्षा को मजबूत करना है।
- चिंताएँ: इससे नैतिक, पर्यावरणीय और मानवाधिकार से जुड़े मुद्दे उठते हैं, जिनमें स्थानीय लोगों के लिए खतरा और संभावित अंतरराष्ट्रीय आलोचना शामिल है।
- नीति में परिवर्तन: यह ‘रुकावट को प्राथमिकता’ देने वाली और सीमा प्रबंधन की एक अलग तरह की रणनीति की ओर एक कदम दिखाता है, जो प्रकृति को सुरक्षा के साथ जोड़ती है।
भारत-बांग्लादेश सीमा के बारे में
- विशाल सीमा: यह सीमा लगभग 4,096 किलोमीटर लंबी है, जो इसे भारत की सबसे लंबी स्थलीय सीमा बनाती है; इसमें नदी, दलदली, कृषि योग्य और घनी आबादी वाले क्षेत्र शामिल हैं।
- छिद्रता और भू-भाग: इसका लगभग 175 किलोमीटर हिस्सा नदी वाला है, जिससे यहाँ बाड़ लगाना मुश्किल हो जाता है और अवैध रूप से सीमा पार करने की संभावना बढ़ जाती है।
मुख्य चिंताएँ
- छिद्रपूर्ण सीमाओं के कारण अवैध प्रवासन और घुसपैठ।
- तस्करी और मानव तस्करी के नेटवर्क।
- सीमा बलों से जुड़े बार-बार होने वाले तनाव और मानवाधिकार संबंधी चिंताएँ।
सीमा प्रबंधन के लिए उत्तरदायी प्रमुख निकाय
- गृह मंत्रालय (MHA): सीमा प्रबंधन नीतियों और समन्वय के लिए नोडल प्राधिकरण।
- सीमा सुरक्षा बल (BSF): ‘एक सीमा एक बल’ सिद्धांत के तहत भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमाओं की रक्षा करता है।
- असम राइफल्स: उग्रवाद-रोधी गतिविधियों पर विशेष ध्यान देते हुए भारत-म्याँमार सीमा को सुरक्षित करता है।
- भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP): सेना के साथ मिलकर भारत-चीन सीमा की रक्षा करता है।
- सशस्त्र सीमा बल (SSB): नेपाल और भूटान के साथ खुली सीमाओं का प्रबंधन करता है।
- भारतीय सेना: नियंत्रण रेखा (LoC) और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के लिए जिम्मेदार है।
- सीमा सड़क संगठन (BRO): रक्षा मंत्रालय के अधीन सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे का विकास करता है।
बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए वर्तमान पहलें
- व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS): वास्तविक समय की निगरानी के लिए सेंसर, निगरानी और खुफिया जानकारी को एकीकृत करती है।
- सीमा इलेक्ट्रॉनिक रूप से नियंत्रित QRT अवरोधन तकनीक (BOLD-QIT): यह एक स्मार्ट, सेंसर-आधारित निगरानी परियोजना है, जिसे असम के धुबरी जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर, विशेष रूप से ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर लागू किया गया है।
- सीमा अवसंरचना और प्रबंधन (BIM) योजना: बाड़बंदी, सड़कों, फ्लडलाइटिंग और सीमा चौकियों का विकास करती है।
- सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP): सीमावर्ती क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।
- एकीकृत जाँच चौकियाँ (ICPs): उन्नत अवसंरचना के साथ सुरक्षित व्यापार और आवागमन को सुगम बनाती हैं।
- हाई-टेक निगरानी (UAVs, सेंसर): दुर्गम इलाकों और उभरते खतरों की निगरानी को बढ़ाती है।
- वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम: सीमावर्ती गाँवों का विकास करता है ताकि वहाँ से लोगों के पलायन को कम किया जा सके और सुरक्षा की मौजूदगी को बेहतर बनाया जा सके।