संदर्भ
भारत और फ्राँस ने वैश्विक कर मानकों के अनुरूप भारत-फ्राँस दोहरे कराधान निवारण सम्मेलन (1992) को अद्यतन करने के लिए एक संशोधन प्रोटोकॉल (23 फरवरी 2026) पर हस्ताक्षर किए।
भारत-फ्राँस दोहरे कराधान निवारण सम्मेलन (1992) में प्रमुख संशोधन
- संशोधित पूँजीगत लाभ कराधान: यह प्रोटोकॉल कंपनी के कर आधार, निवासी देश को शेयरों की बिक्री से प्राप्त पूँजीगत लाभ पर पूर्ण कराधान संबंधीअधिकार प्रदान करता है।
- MFN प्रावधान का निष्कासन: मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) प्रावधान को हटाया गया है, जिससे व्याख्यात्मक विवादों का समाधान हुआ है और संधि की स्पष्टता में वृद्धि हुई है।
- MFN का प्रावधान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और संधि कानून का एक मूल सिद्धांत है, जिसके अंतर्गत देशों को अपने सभी व्यापारिक साझेदारों के साथ समान व्यवहार करना होता है।
- संशोधित लाभांश कर संरचना: पूर्व की एकसमान 10% दर को विभाजित दर से प्रतिस्थापित किया गया है- कम-से-कम 10% इक्विटी रखने वाले शेयरधारकों के लिए 5% और अन्य मामलों में 15%।
- वैश्विक मानकों के साथ सामंजस्य: यह तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क की परिभाषा को संशोधित करता है (भारत-अमेरिका DTAA के अनुरूप)।
- यह स्थायी प्रतिष्ठान (सेवा स्थायी प्रतिष्ठान सहित) के दायरे का विस्तार करता है, सूचना के आदान-प्रदान संबंधी प्रावधानों को सुदृढ़ करता है, कर संग्रह में सहायता का प्रावधान प्रस्तुत करता है तथा लाभ आधार क्षरण और स्थानांतरण (BEPS) बहुपक्षीय उपकरण प्रावधानों को शामिल करता है।
- लाभ आधार क्षरण और स्थानांतरण (BEPS) से तात्पर्य कर के माध्यम से लाभ को कृत्रिम रूप से कम या शून्य कर वाले स्थानों पर स्थानांतरित करने से है, जहाँ आर्थिक गतिविधि नगण्य होती है, जिससे उच्च कर वाले क्षेत्राधिकारों का कर आधार क्षीण हो जाता है।
दोहरे कराधान के बारे में
- दोहरे कराधान की स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब एक ही आय पर दो देशों में कर लगाया जाता है, सामान्यतः एक स्रोत देश (Source Country) और दूसरा निवास देश (Country of Residence) होता है।
- व्यापार एवं निवेश पर प्रभाव: दोहरे कराधान से कर भार में वृद्धि होती है, जिससे सीमापार व्यापार हतोत्साहित होता है, पूँजी की गतिशीलता सीमित होती है तथा निवेशकों का विश्वास कम होता है।
दोहरा कराधान निवारण अभिसमय का महत्त्व
- कर निश्चितता में वृद्धि: स्पष्ट एवं सुव्यवस्थित प्रावधान विवादों को कम करते हैं और व्यवसायों तथा निवेशकों के लिए कर व्यवस्था में पूर्वानुमेयता (Predictability) सुनिश्चित करते हैं।
- आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करना: अद्यतन मानदंड भारत और फ्राँस के बीच निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा पेशेवरों की गतिशीलता को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलती है।