पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS)
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द लैंसेट में प्रकाशित एक वैश्विक चिकित्सीय सहमति के अनुसार, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) का नाम आधिकारिक रूप से परिवर्तित कर पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) कर दिया गया है।
PCOS का नाम बदलकर PMOS किए जाने के बारे में
- PMOS वही स्थिति है, जिसे पहले PCOS कहा जाता था; केवल नाम बदला गया है, निदान संबंधी मानदंडों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
- नाम परिवर्तन का कारण: विशेषज्ञों ने पाया कि “पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम” (PCOS) शब्द भ्रामक है, क्योंकि इस स्थिति से ग्रस्त अनेक महिलाओं में वास्तव में ओवरी में गाँठ (सिस्ट) नहीं पाए जाते।
- अविकसित फॉलिकल्स: अपरिपक्व या अवरुद्ध फॉलिकल्स सही प्रकार से विकसित नहीं हो पाते और अल्ट्रासाउंड में सिस्ट जैसे दिखाई देते हैं।
- नाम परिवर्तन का महत्त्व: PMOS शब्द बेहतर जागरूकता को बढ़ावा देता है तथा इस स्थिति को संपूर्ण शरीर को प्रभावित करने वाले अंतःस्रावी–चयापचयी विकार के रूप में रेखांकित करता है।
पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) क्या है?
- PMOS महिलाओं को प्रभावित करने वाला एक हार्मोनल एवं चयापचयी विकार है, जिसकी विशेषताएँ अनियमित अंडोत्सर्जन, हार्मोनल असंतुलन, इंसुलिन प्रतिरोध तथा प्रजनन संबंधी जटिलताएँ हैं।
- PMOS का अर्थ
- पॉलीएंडोक्राइन: शरीर की अनेक हार्मोनल प्रणालियाँ प्रभावित होती हैं।
- मेटाबोलिक: यह स्थिति इंसुलिन प्रतिरोध, मोटापा, मधुमेह एवं मेटाबोलिक सिंड्रोम से गहराई से जुड़ी है।
- ओवेरियन: यह अंडोत्सर्जन, मासिक धर्म एवं प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है।
- सिंड्रोम: यह परस्पर जुड़े लक्षणों एवं दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों के समूह को दर्शाता है।
- सामान्य लक्षण: अनियमित मासिक धर्म, मुहाँसे, चेहरे पर अत्यधिक बाल, वजन बढ़ना तथा बाँझपन।
- मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: PMOS चिंता, अवसाद, भावनात्मक तनाव एवं जीवन की गुणवत्ता में कमी से भी जुड़ा हुआ है।
- दीर्घकालिक जोखिम: PMOS से ग्रस्त महिलाओं में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, फैटी लिवर रोग एवं नींद संबंधी विकारों का जोखिम अधिक होता है।
- उपचार की पद्धति: इसका प्रबंधन जीवनशैली में सुधार, व्यायाम, संतुलित आहार, तनाव में कमी, हार्मोनल थेरेपी तथा इंसुलिन-संवेदनशीलता बढ़ाने वाली दवाओं के माध्यम से किया जाता है।
- वैश्विक प्रसार: यह विकार विश्व स्तर पर लगभग प्रत्येक आठ में से एक महिला को प्रभावित करता है।
- भारत से संबंधित विशेष चिंता: भारत में इस नाम परिवर्तन का विशेष महत्त्व है, क्योंकि विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 16–18% महिलाएँ इस स्थिति से प्रभावित हो सकती हैं।
- भारत में निष्क्रिय जीवनशैली, मोटापा, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन, तनाव तथा खराब नींद की आदतों के कारण PMOS के मामलों में वृद्धि हो रही है।
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राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2026
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भारत के राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार, 2026 प्रदान किए।
राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2026 के बारे में
- उद्देश्य: ये पुरस्कार नर्सिंग पेशेवरों द्वारा समाज के लिए प्रदान की गई उत्कृष्ट एवं समर्पित सेवाओं को मान्यता देने हेतु दिए जाते हैं।
- पुरस्कार प्राप्तकर्ता: स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्ट योगदान के लिए कुल 15 नर्सों एवं सहायक नर्स दाइयों (ANMs) को सम्मानित किया गया।
- स्थापना: इन पुरस्कारों की स्थापना वर्ष 1973 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा की गई थी।
- महत्त्व: ये पुरस्कार नर्सों की करुणा, समर्पण एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में उनके योगदान को सम्मानित करते हैं।
- अवसर: ये पुरस्कार प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर प्रदान किए जाते हैं, जो 12 मई को मनाया जाता है।
- नर्सों की भूमिका: नर्सें अग्रिम पंक्ति की आवश्यक स्वास्थ्यकर्मी हैं, जो निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक एवं पुनर्वास संबंधी स्वास्थ्य सेवाओं में महत्त्वपूर्ण योगदान देती हैं।
फ्लोरेंस नाइटिंगेल के बारे में
- फ्लोरेंस नाइटिंगेल एक ब्रिटिश नर्स एवं समाज सुधारक थीं, जिन्हें आधुनिक नर्सिंग की आधारभूत दार्शनिक के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- क्रीमियन युद्ध में सेवा: उन्होंने क्रीमियन युद्ध (1853–1856) के दौरान घायल सैनिकों का उपचार कर तथा सैन्य अस्पतालों में स्वच्छता व्यवस्था में सुधार कर वैश्विक पहचान प्राप्त की।
- “लेडी विद द लैंप”: रात में दीपक लेकर घायल सैनिकों से मिलने जाने के कारण वे “लेडी विद द लैम्प” के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार: नाइटिंगेल ने वैज्ञानिक स्वच्छता, स्वास्थ्यकर व्यवस्था एवं अस्पताल प्रबंधन की ऐसी पद्धतियाँ विकसित कीं, जिनसे मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई।
- विरासत: उनके जन्मदिवस के उपलक्ष्य में तथा विश्वभर की नर्सों के योगदान को सम्मानित करने हेतु प्रत्येक वर्ष 12 मई को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है।
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IMD की नई ब्लॉक-स्तरीय मानसून पूर्वानुमान प्रणाली
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भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक नई उच्च-रिजॉल्यूशन पूर्वानुमान प्रणाली शुरू की है, जो भारत के प्रमुख वर्षा-आधारित क्षेत्रों में ब्लॉक स्तर पर मानसून पूर्वानुमान प्रदान करने में सक्षम है।
IMD की नई ब्लॉक-स्तरीय मानसून पूर्वानुमान प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ
- ब्लॉक-स्तरीय पूर्वानुमान: IMD लगभग 3,196 ब्लॉकों में मानसून पूर्वानुमान प्रदान करेगा, जो 15 राज्यों एवं 1 केंद्रशासित प्रदेश को कवर करेगा।
- यह पहली बार है जब मानसून आगमन का पूर्वानुमान ब्लॉक स्तर पर लगाया गया है।
- अत्यंत स्थानीयकृत पूर्वानुमान: इस प्रणाली का उद्देश्य अत्यधिक स्थानीय स्तर पर पूर्वानुमान उपलब्ध कराना है, क्योंकि एक ही जिले के भीतर भी वर्षा में उल्लेखनीय भिन्नता हो सकती है।
- मुख्य फोकस क्षेत्र: वर्तमान में यह पूर्वानुमान मॉडल भारत के मानसून कोर जोन को कवर करता है, जिसमें वे कृषि क्षेत्र शामिल हैं, जो वर्षा पर अत्यधिक निर्भर हैं।
- पूर्वानुमान अवधि: यह प्रणाली अगले चार सप्ताह के लिए संभाव्य पूर्वानुमान जारी कर सकती है, जिससे किसानों एवं प्रशासकों को अग्रिम तैयारी में सहायता मिलेगी।
- प्रयुक्त प्रौद्योगिकी एवं मॉडल
- संयुक्त पूर्वानुमान प्रणाली: पूर्वानुमान ढाँचा समग्र सटीकता बढ़ाने हेतु दो मौसम मॉडलों की भविष्यवाणियों को संयोजित करता है।
- AI आधारित विश्लेषण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग IMD के सौ वर्ष पुराने मौसम संबंधी डेटाबेस एवं वैश्विक मौसम मॉडलों के साथ किया जा रहा है।
- विकासकर्ता: यह संयुक्त पूर्वानुमान ढाँचा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) द्वारा विकसित किया गया है।
- भारत पूर्वानुमान प्रणाली: यह पहल अधिक सटीक वर्षा पूर्वानुमान प्रदान करने हेतु विकसित उन्नत भारत पूर्वानुमान प्रणाली का हिस्सा है।
- कृषि के लिए महत्त्व
- किसानों को सहायता: यह प्रणाली किसानों को स्थानीय मानसून आगमन के आधार पर बुवाई कार्यों का अधिक सटीक समय निर्धारण करने में सक्षम बनाएगी।
- वर्षा-आधारित कृषि को लाभ: यह विशेष रूप से उन वर्षा-आधारित कृषि क्षेत्रों के लिए उपयोगी है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून पर अत्यधिक निर्भर हैं।
अतिरिक्त विकास
- 1 किमी. पूर्वानुमान मॉडल: IMD ने उत्तर प्रदेश के लिए 1 किमी. स्थानिक रिजॉल्यूशन एवं 10-दिवसीय वैधता वाला उच्च-रिजॉल्यूशन मौसम पूर्वानुमान मॉडल भी लॉन्च किया है।
- मिथुन मौसम मॉडल: उत्तर प्रदेश प्रणाली में ‘मिथुन’ मॉडल का उपयोग किया गया है, जो प्रारंभ में 12.5-किमी. रि़जॉल्यूशन पर संचालित होता था और बाद में इसे घटाकर 1 किमी. कर दिया गया।
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किम्बर्ले प्रोसेस अंतर-सत्रीय बैठक 2026

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हाल ही में भारत ने अपनी अध्यक्षता के अंतर्गत मुंबई में किम्बर्ले प्रोसेस अंतर-सत्रीय बैठक 2026 की मेजबानी की।
किम्बर्ले प्रोसेस (Kimberley Process) के बारे में
- किम्बर्ले प्रोसेस ‘कन्फलिक्ट डायमंड’ अथवा ‘ब्लड डायमंड्स’ के व्यापार को रोकने हेतु एक अंतरराष्ट्रीय पहल है।
- कन्फलिक्ट डायमंड वे अपरिष्कृत हीरे होते हैं, जिन्हें युद्धग्रस्त क्षेत्रों में खनन कर सरकारों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्षों के वित्तपोषण के लिए बेचा जाता है।
- उद्देश्य: इसका उद्देश्य शांति एवं सुरक्षा की रक्षा करना, हीरा उत्पादक क्षेत्रों के समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा प्राकृतिक हीरा आपूर्ति शृंखला की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करना है।
- स्थायी सचिवालय: गाबोरोन, बोत्सवाना।
- वैश्विक सदस्यता: इसमें में 60 प्रतिभागी शामिल हैं, जो 86 देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यूरोपीय संघ एवं उसके सदस्य देशों को एकल प्रतिभागी के रूप में गिना जाता है।
- नागरिक समाज एवं उद्योग जगत “पर्यवेक्षक” के रूप में भाग लेते हैं।
- विश्व हीरा परिषद (WDC) वैश्विक हीरा उद्योग का आधिकारिक प्रतिनिधि है।
- शासन व्यवस्था
- किम्बर्ले प्रोसेस की अध्यक्ष: इसका संचालन किसी प्रतिभागी देश के सरकारी प्रतिनिधि द्वारा किया जाता है, जिसका कार्यकाल 1 जनवरी से प्रारंभ होकर एक वर्ष का होता है।
- उपाध्यक्ष: प्रतिभागियों द्वारा चुना एवं अनुमोदित उपाध्यक्ष अगले वर्ष स्वतः किम्बर्ले प्रोसेस का अध्यक्ष बन जाता है।
- बैठकें: प्रतिवर्ष दो आधिकारिक बैठकें आयोजित की जाती हैं: अंतर-सत्रीय बैठक तथा पूर्ण अधिवेशन बैठक।
किम्बर्ले प्रोसेस प्रमाणन योजना (KPCS) के बारे में
- किम्बर्ले प्रोसेस प्रमाणन योजना का उद्देश्य संघर्ष हीरों को मुख्यधारा के अपरिष्कृत हीरा बाजार में प्रवेश करने से रोकना है।
- स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 2003 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 55/56 (2000) के अनुसार की गई थी।
- प्रमाणन-आधारित व्यापार तंत्र: KPCS के अंतर्गत सहभागी देश यह प्रमाणित करते हैं कि अपरिष्कृत हीरों का निर्यात संघर्ष-मुक्त है।
भारत और किम्बर्ले प्रोसेस 2026
- भारत ने अध्यक्षता संभाली: भारत ने 1 जनवरी, 2026 से किम्बर्ले प्रोसेस की अध्यक्षता ग्रहण की।
- भारत की अध्यक्षता की थीम: भारत की 2026 अध्यक्षता की थीम 3Cs [विश्वसनीयता (Credibility), अनुपालन (Compliance) और उपभोक्ता विश्वास (Consumer Confidence)] पर आधारित है।
मुंबई अंतर-सत्रीय बैठक 2026 की प्रमुख विशेषताएँ
- विचार-विमर्श के प्रमुख क्षेत्र: निगरानी और अनुपालन तंत्र, किम्बर्ले प्रक्रिया प्रमाणन योजना को सुदृढ़ करना, पारंपरिक और ‘अलुवियल डायमंड’ (Alluvial Diamonds) उत्पादन, व्यापार सांख्यिकी और प्राकृतिक हीरा मूल्य शृंखला में विश्वास पर चर्चा हुई।
- पारंपरिक हीरे: वे हीरे जो छोटे स्तर के खनिकों द्वारा सीमित तकनीक एवं निवेश के साथ हाथों या साधारण उपकरणों से निकाले जाते हैं। ये खदानें श्रम-प्रधान होती हैं और विकासशील देशों में सामान्यतः पाई जाती हैं।
- ‘अलुवियल डायमंड’ (Alluvial Diamonds): मूल चट्टान स्रोतों (किम्बरलाइट पाइप) से प्राकृतिक रूप से अपरदन के बाद नदी तल, समुद्र तटों या तलछट निक्षेपों में पाए जाने वाले हीरे, जिन्हें समय के साथ जल द्वारा स्थानांतरित किया जाता है।
भारत के लिए महत्त्व
- हीरा उद्योग में प्रमुख भूमिका: भारत विश्व के प्रमुख हीरा तराशना एवं पॉलिशिंग केंद्रों में से एक है।
- उत्तरदायी हीरा व्यापार को बढ़ावा: भारत की अध्यक्षता वैश्विक हीरा क्षेत्र में जिम्मेदार स्रोत-प्राप्ति, पारदर्शिता एवं सततता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।
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समग्र शिक्षा तथा पीएम पोषण योजना

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केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं- समग्र शिक्षा तथा पीएम पोषण को 30 सितंबर, 2026 तक अस्थायी विस्तार प्रदान किया है।
समग्र शिक्षा के बारे में
- पृष्ठभूमि: इसे वर्ष 2018 में विद्यालयी शिक्षा के लिए एक एकीकृत केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में प्रारंभ किया गया था।
- यह सर्व शिक्षा अभियान (SSA), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA) शिक्षक शिक्षा (TE) योजनाओं के एकीकरण से बनाई गई थी।
- कवरेज: यह योजना प्री-स्कूल से कक्षा 12 तक की शिक्षा को कवर करती है तथा सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों दोनों पर लागू होती है।
- दृष्टिकोण: पूर्व-प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक स्कूली शिक्षा को समग्र रूप में देखना।
- मंत्रालय: इसका कार्यान्वयन शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education – MoE) द्वारा किया जाता है।
- मुख्य फोकस क्षेत्र: आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता, अनुभवात्मक अधिगम, शिक्षकों की उपलब्धता, कौशल विकास तथा विद्यालयों में बुनियादी अवसंरचना।
पीएम पोषण (प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण) के बारे में
- पूर्व नाम: इसे पहले मध्याह्न भोजन योजना के नाम से जाना जाता था, जिसे वर्ष 2021 में बदलकर पीएम पोषण किया गया।
- उद्देश्य: सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों के बच्चों को पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना।
- मंत्रालय: इसका कार्यान्वयन शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
- मुख्य लक्ष्य: पोषण स्तर में सुधार, विद्यालयों में नामांकन एवं उपस्थिति बढ़ाना तथा विद्यालय छोड़ने की दर कम करना।
- प्रमुख विशेषताएँ
- भोजन में मोटे अनाज (श्री अन्न) को शामिल करना।
- पोषण वाटिकाओं एवं स्थानीय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देना।
- सामाजिक अंकेक्षण एवं सामुदायिक सहभागिता।
- विद्यालय बंद होने जैसी आपात स्थितियों में DBT/खाद्य सुरक्षा भत्ता का उपयोग।
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