‘रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन’ (RELIEF )

20 Mar 2026

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संदर्भ

पश्चिम एशियाई संकट के मद्देनजर सरकार ने ‘रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन’ (RELIEF) योजना शुरू की है, जिसकी लागत ₹497 करोड़ है।

संबंधित तथ्य

  • इसे निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) के तहत मंजूरी मिल चुकी है।

RELIEF योजना के बारे में 

  • उद्देश्य: पश्चिम एशिया संकट के कारण फँसे माल के निर्यातकों को ऋण बीमा कवर प्रदान करना।
  • बीमा प्रीमियम: इस योजना के तहत बीमा प्रीमियम संकट-पूर्व दरों पर होंगे और इसका मुख्य उद्देश्य लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) लाभार्थियों को लाभ पहुँचाना होगा।
  • नोडल मंत्रालय: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (भारत सरकार)।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: ECGC लिमिटेड (पूर्व में एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड)।
    • यह सत्यापन, दावा प्रसंस्करण, वितरण और निगरानी के लिए जिम्मेदार है।
  • दायरा: इसमें पात्र पूर्व शिपमेंट और भावी निर्यात दोनों शामिल हैं, जिसमें MSME सहायता पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  • वित्तपोषण: यह हस्तक्षेप ईपीएम के तहत वित्तपोषित होगा और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के आधार पर समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाएगी।
  • क्षेत्रीय दायरा: यह योजना संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, इजरायल, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान और यमन के लिए या इन देशों से होकर गुजरने वाले सभी खेपों पर लागू होती है।

प्रमुख घटक

  • घटक I: मौजूदा शिपमेंट के लिए स्वचालित निर्यात दायित्व राहत और सुरक्षा
    • जोखिम दायरे में वृद्धि (पिछली शिपमेंट): 14 फरवरी से 15 मार्च, 2026 के बीच शिपमेंट के लिए मौजूदा ECGC कवर वाले निर्यातकों को संघर्ष से संबंधित अतिरिक्त नुकसान के लिए 100% तक जोखिम कवरेज प्राप्त होगा।
    • अनुमानित सहायता: 56 करोड़
  • घटक II: आगामी निर्यात के लिए बढ़ी हुई ECGC कवरेज
    • संभावित निर्यात के लिए सहायता: 16 मार्च से 15 जून, 2026 के बीच नियोजित शिपमेंट के लिए, निर्यातकों का विश्वास बनाए रखने के लिए सरकार 95% तक जोखिम कवरेज प्रदान करती है।
    • अनुमानित सहायता: ₹ 159 करोड़
  • घटक III: माल ढुलाई और बीमा संबंधी झटकों के लिए MSME सहायता
    • MSME प्रतिपूर्ति: गैर-बीमाकृत MSME निर्यातक प्रारंभिक व्यवधान माह के दौरान हुए असाधारण माल ढुलाई और बीमा अधिभारों के लिए 50% तक प्रतिपूर्ति (प्रति निर्यातक ₹50 लाख की सीमा तक) का दावा कर सकते हैं।
    • अनुमानित सहायता: ₹ 282 करोड़

RELIEF योजना क्यों शुरू की गई थी? 

  • पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने समुद्री मार्गों, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आस-पास के क्षेत्र को बाधित कर दिया।
  • सुरक्षा चिंताओं के कारण जहाजों के मार्ग बदले गए और शिपिंग मार्ग लंबे हो गए, जिससे पारगमन समय और अनिश्चितता बढ़ गई।
  • ट्रांसशिपमेंट केंद्रों पर भीड़भाड़ के कारण निर्यात खेपों में देरी हुई।
  • मार्ग परिवर्तन और सीमित शिपिंग उपलब्धता के कारण माल ढुलाई लागत में भारी वृद्धि हुई।
  • खाड़ी क्षेत्र में युद्ध संबंधी जोखिमों के कारण बीमा प्रीमियम बढ़ गए।
  • अप्रत्याशित लॉजिस्टिक्स स्थितियों के कारण निर्यातकों के लिए परिचालन अनिश्चितता बढ़ गई।
  • बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत के कारण भारतीय वस्तुओं की निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता खतरे में पड़ गई।

निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) के बारे में 

  • निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) भारत सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य भारत की निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाना और वैश्विक व्यापार में इसकी हिस्सेदारी को मजबूत करना है।
  • उद्देश्य: पश्चिम एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते क्षेत्रों के साथ व्यापार को बढ़ावा देकर निर्यात बाजारों में विविधता लाना।
    • विदेशी मुद्रा आय बढ़ाना और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करना।
  • संस्थागत ढाँचा: यह मिशन वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (भारत सरकार) के अधीन भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम जैसी एजेंसियों के समन्वय से कार्य करता है।

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