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असम सरकार का ह्मार और कुकी समूहों के साथ समझौता

17 Mar 2026

संदर्भ

असम सरकार ने ह्मार और कुकी उग्रवादी समूहों के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य उग्रवाद समाप्त करना तथा कल्याण परिषदों और पुनर्वास उपायों के माध्यम से विकास को बढ़ावा देना है।

समझौते की मुख्य विशेषताएँ 

  • त्रिपक्षीय वार्ता: असम सरकार, भारत सरकार और चार विद्रोही समूहों—एचपीसी-डी, यूकेडीए, केआरए और केएलओ के बीच त्रिपक्षीय वार्ता के बाद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

संगठन मुख्य माँगें/उद्देश्य
ह्मार पीपुल्स कन्वेंशन – डेमोक्रेटिक (HPC-D) (1995) ह्मार-बहुल क्षेत्रों के लिए स्वायत्त क्षेत्रीय परिषद या अधिक स्वायत्तता की माँग, विशेष रूप से असम और आस-पास के क्षेत्रों में
यूनाइटेड कुकीगाम डिफेंस आर्मी (UKDA) (2010) कुकी समुदाय के हितों और भूमि अधिकारों की रक्षा तथा कुकी-बहुल क्षेत्रों में प्रशासनिक स्वायत्तता की माँग
कुकी रिवॉल्यूशनरी आर्मी (KRA) (2000) अलग कुकी मातृभूमि या प्रशासनिक इकाई की स्थापना तथा कुकी पहचान और क्षेत्रीय अधिकारों की सुरक्षा
कुकी मुक्ति संगठन (सशस्त्र शाखा: कुकी मुक्ति सेना) (केएलओ) (1992) पूर्वोत्तर भारत में कुकी जनजाति के अधिकारों की अधिक राजनीतिक स्वायत्तता और संरक्षण की मांग।

  • कल्याण विकास परिषदों का गठन: ह्मार कल्याण विकास परिषद और कुकी कल्याण विकास परिषद नामक दो स्वायत्त निकायों का गठन किया जाएगा, जो अपने-अपने समुदायों की विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करेंगे।
    • विकास परिषद में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी सदस्य, कार्यकारी सदस्य और असम सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य शामिल होंगे।
    • दोनों परिषदों का मुख्यालय गुवाहाटी में होगा और इनका बजट इनकी आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जाएगा और परिवर्तन एवं विकास विभाग को प्रस्तुत किया जाएगा।
  • पूर्व कार्यकर्ताओं का पुनर्वास: पूर्व उग्रवादियों का पुनर्वास सरकारी योजनाओं के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें वित्तीय सहायता और आजीविका सहायता शामिल है। यह पुनर्वास स्थापित आत्मसमर्पण और पुनर्वास प्रक्रियाओं का पालन करते हुए किया जाएगा।
  • सशस्त्र उग्रवाद का अंत: समूहों ने वर्ष 2012 में ही संचालन निलंबन समझौते पर हस्ताक्षर कर हथियार डाल दिए थे, जिससे वर्तमान समझौते तक पहुँचने के लिए वार्ता संभव हो सकी।

समझौता ज्ञापन (MoS) का महत्त्व 

  • पूर्वोत्तर में शांति सुदृढ़ीकरण: यह समझौता असम में जातीय उग्रवाद को समाप्त करने तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है।
  • समावेशी विकास: विकास परिषदें ह्मार और कुकी-बहुल क्षेत्रों में लक्षित कल्याणकारी कार्यक्रमों तथा अवसंरचना विकास को आगे बढ़ाएँगी।
  • पूर्व उग्रवादियों का एकीकरण: पुनर्वास संबंधी उपाय पूर्व उग्रवादियों को मुख्यधारा में लाने में सहायक होंगे, जिससे पुनः उग्रवाद की संभावना कम होगी।

ह्मार जनजाति के बारे में

  • ह्मार, चिन–कुकी–मिजो भाषायी-नृजातीय समूह की एक अनुसूचित जनजाति है, जिनका ऐतिहासिक प्रव्रजन सिनलुंग से म्याँमार होते हुए पूर्वोत्तर भारत तक हुआ।
  • संस्कृति और समाज: ह्मार समाज पितृसत्तात्मक और कुल-आधारित है, जिसका पारंपरिक संचालन ‘लाल’ कहलाने वाले ग्राम प्रमुखों द्वारा होता रहा है तथा इनमें झूम की परंपरा रही है।
  • वितरण: यह समुदाय मुख्यतः मणिपुर, मिजोरम, असम, मेघालय और त्रिपुरा में निवास करता है, जबकि इनके संबंधित समूह म्याँमार और बांग्लादेश में भी पाए जाते हैं।
  • विरासत: इनके पास समृद्ध मौखिक परंपरा है, जो इनके उद्गम को ‘सिनलुंग’ नामक पौराणिक स्थल से जोड़ती है, जहाँ से ये सदियों में चीन से बर्मा होते हुए भारत आए।

कुकी जनजाति के बारे में

  • कुकी, पूर्वोत्तर भारत का एक प्रमुख तिब्बती-बर्मी नृजातीय समूह है, जो ऐतिहासिक रूप से स्वतंत्र पहाड़ी समुदायों और अनेक कुलों के लिए जाना जाता है।
  • संस्कृति और सामाजिक संरचना: कुकी समाज प्रथागत कानूनों तथा वंशानुगत मुखियापन (chieftainship) का पालन करता है, जहाँ भूमि स्वामित्व प्रायः मुखिया के वंश के माध्यम से स्थानांतरित होता है।
  • भौगोलिक वितरण और संबंधित समूह: ये मुख्यतः मणिपुर, मिजोरम, असम और त्रिपुरा में पाए जाते हैं तथा भारत, म्याँमार और बांग्लादेश में चिन और मिजो समूहों से सांस्कृतिक संबंध रखते हैं।
  • सांस्कृतिक विरासत: कुकी समुदाय समृद्ध हथकरघा परंपरा, ‘चापचर कुट’ और ‘मिम कुट’ जैसे उत्सवों तथा सशक्त योद्धा परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जबकि इनमें से अनेक ने ईसाई धर्म को अपनाया है।
असम सरकार का ह्मार और कुकी समूहों के साथ समझौता

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