अर्बन चैलेंज फंड (UCF)

16 Feb 2026

संदर्भ

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (UCF) के शुभारंभ को स्वीकृति दी है।

संबंधित तथ्य

  • यह केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित सरकार की उस परिकल्पना को क्रियान्वित करता है, जिसके अंतर्गत ‘शहरों को विकास केंद्र के रूप में स्थापित करने हेतु ‘शहरों के रचनात्मक पुनर्विकास’, और ‘जल एवं स्वच्छता’ से संबंधित प्रस्तावों को लागू किया जाना है।

अर्बन चैलेंज फंड के बारे में

  • यह आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसमें कुल केंद्रीय सहायता ₹1 लाख करोड़ है।
  • वित्तपोषण संरचना: परियोजना वित्तपोषण का न्यूनतम 50 प्रतिशत भाग बाजार स्रोतों से जुटाना होगा, जिसमें नगर निगम बॉण्ड, बैंक ऋण और सार्वजनिक–निजी भागीदारी शामिल हैं।
    • शेष भाग राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) या अन्य स्रोतों द्वारा दिया जा सकता है।
  • कवरेज: यह फंड निम्नलिखित को कवर करेगा:
    • वर्ष 2025 के अनुमान के अनुसार, 10 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले सभी शहर;
    •  उपरोक्त में शामिल न किए गए राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियाँ; तथा
    • 1 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले प्रमुख औद्योगिक शहर
    • इसके अतिरिक्त, पहाड़ी राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और 1 लाख से कम जनसंख्या वाले सभी ULBs, क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी योजना के अंतर्गत सहायता के लिए पात्र होंगे।

मुख्य विशेषताएँ

  • प्रतिस्पर्द्धी चुनौती मोड चयन: परियोजनाओं का चयन पारदर्शी और प्रतिस्पर्द्धी चुनौती मोड के माध्यम से किया जाएगा, जिससे उच्च-प्रभाव और सुधार-उन्मुख प्रस्तावों को समर्थन सुनिश्चित किया जाएगा।
  • सुधार-उन्मुख दृष्टिकोण: शहरी शासन, बाजार एवं वित्तीय प्रणालियों, परिचालन दक्षता और शहरी नियोजन में सुधारों पर विशेष बल दिया जाएगा।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा: संरचित जोखिम-साझाकरण ढाँचों और सेवा वितरण मानकों के बेंचमार्किंग के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • क्रेडिट संवर्धन तंत्र: ₹5,000 करोड़ का एक समर्पित कोष टियर-II और टियर-III शहरों सहित 4,223 शहरों की साख क्षमता को बढ़ाएगा, विशेष रूप से पहली बार बाजार वित्त तक पहुँच के लिए।
  • ULBs को बैंक योग्य बनाना: इसका उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को वित्तीय बाजार में एक विश्वसनीय और बैंक योग्य परिसंपत्ति वर्ग के रूप में स्थापित करना है।
  • सुधार-संलग्न वित्तपोषण ढाँचा: अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत वित्तपोषण एक व्यापक सुधार एजेंडा से जुड़ा होगा, जिसमें शामिल हैं:
    • शासन और डिजिटल सुधार;
    • साख क्षमता को मजबूत करने के लिए बाजार और वित्तीय सुधार;
    • बेहतर सेवा वितरण और उपयोगिता दक्षता के लिए परिचालन सुधार;
    • ट्रांजिट-उन्मुख विकास और हरित अवसंरचना सहित शहरी नियोजन और स्थानिक सुधार; तथा
    • परिभाषित प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPI), तृतीय-पक्ष सत्यापन और सतत् संचालन एवं रखरखाव तंत्र के साथ परियोजना-विशिष्ट सुधार।
  • अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत परियोजना क्षेत्र
    • शहरों को विकास केंद्र के रूप में: इसका उद्देश्य प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों और शहर क्षेत्रों की पहचान करना तथा एकीकृत नियोजन, कॉरिडोर-आधारित विकास, बेहतर शहरी गतिशीलता और प्रतिस्पर्द्धी अवसंरचना में तीव्र बढोतरी करना है।
    • शहरों का रचनात्मक पुनर्विकास: यह व्यावसायिक और विरासत क्षेत्रों के पुनरोद्धार, ब्राउनफील्ड स्थलों की पुनर्स्थापना, संक्रमण-उन्मुख विकास को बढ़ावा देने, जलवायु अनुकूलन बढ़ाने और विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी एवं पर्वतीय राज्यों में व्यस्तता कम करने पर केंद्रित है।
    • जल और स्वच्छता: इसका उद्देश्य जल आपूर्ति, सीवरेज और वर्षा जल प्रणालियों का उन्नयन, रर्बन अवसंरचना और जल ग्रिड का विकास, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करना तथा स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित करते हुए विरासत अपशिष्ट का निवारण करना है।

रर्बन (Ruraban) अवसंरचना क्या है?

रर्बन अवसंरचना से आशय ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित उस अवसंरचना से है, जिसमें शहरी जैसी सुविधाएँ होती हैं, ताकि ग्रामीण–शहरी अंतर को पाटा जा सके और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

इसमें सामान्यतः शामिल हैं

  • सभी मौसमों में उपयोग योग्य सड़कें और परिवहन संपर्क
  • पाइपयुक्त जल आपूर्ति और स्वच्छता प्रणालियाँ
  • विश्वसनीय विद्युत और डिजिटल संपर्क
  • ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन
  • कौशल केंद्र, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सुविधाएँ
  • मंडी यार्ड और कृषि-प्रसंस्करण इकाइयाँ।

यह अवधारणा श्यामा प्रसाद मुखर्जी रर्बन मिशन से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण चरित्र को बनाए रखते हुए शहरी स्तर की अवसंरचना प्रदान कर गाँवों के समूहों का विकास करना है।

महत्त्व

भविष्य उन्मुख शहरों का निर्माण: यह फंड लचीले, उत्पादक, समावेशी और जलवायु-संवेदनशील शहरों के निर्माण का लक्ष्य रखता है, जिससे वे देश के आर्थिक विकास के अगले चरण के प्रमुख प्रेरक बन सकें।

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