संदर्भ
भारत ने 14 वर्ष की बालिकाओं के लिए एक राष्ट्रव्यापी एकल-खुराक (Single-Dose) मानव पैपिलोमा वायरस (HPV) टीकाकरण कार्यक्रम की घोषणा की है। इसका उद्देश्य गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की रोकथाम करना है, जो एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है।
गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर के बारे में
- कारण: सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा (गर्भाशय का मुख) को प्रभावित करता है और यह मानव पैपिलोमा वायरस (HPV) के लगातार संक्रमण के कारण होता है।
- मुख्य कारण (वायरस प्रकार): HPV के 100 से अधिक प्रकार हैं, लेकिन प्रकार 16 और 18 भारत में लगभग 80% सर्वाइकल कैंसर मामलों के लिए उत्तरदायी हैं।
- रोकथाम की संभावना: यह उन कुछ कैंसरों में से एक है जिसे समय पर टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से लगभग 100% तक रोका जा सकता है, और यदि प्रारंभिक अवस्था में पता चल जाए तो यह पूरी तरह उपचार योग्य है।
- चिंताजनक आँकड़े:
- दक्षिण-पूर्व एशिया में इस कैंसर से मृत्यु दर विश्व में दूसरी सबसे अधिक है, जिसमें भारत का योगदान SEARO (दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र) के कुल मामलों का लगभग 65% है।
- यह भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है।
- केवल वर्ष 2022 में भारत में लगभग 1,27,000 नए मामले और लगभग 80,000 मौतें दर्ज की गईं।
- स्क्रीनिंग की कमी: 30–49 वर्ष आयु वर्ग की केवल 1.9% महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर के लिए स्क्रीनिंग की गई थी।
राष्ट्रीय HPV टीकाकरण योजना
- उद्देश्य: भारत 90 से अधिक देशों की श्रेणी में शामिल होने के लिए राष्ट्रव्यापी योजना शुरू कर रहा है, जो HPV टीका प्रदान कर कैंसर की दर को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।
- लक्षित समूह: यह टीका 14 वर्ष की बालिकाओं को दिया जाएगा, क्योंकि यह यौन सक्रिय होने से पहले दिया जाए तो सबसे अधिक प्रभावी होता है।
- खुराक: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिशों के अनुसार, सरकार एकल खुराक प्रदान करेगी।
- प्रशासन: सुरक्षा और नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए, यह टीका केवल सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध होगा और इसे प्रशिक्षित चिकित्सकीय अधिकारियों या कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की टीम द्वारा लगाया जाएगा।
वैश्विक टीका-विरोधी भावना
- टीकाकरण-विरोधी रुझान में वृद्धि: टीकाकरण के प्रति विरोधी दृष्टिकोण वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे हैं, जिसका मुख्य कारण गलत जानकारी और वैज्ञानिक संस्थाओं पर विश्वास का अभाव है।
- केस स्टडी – संयुक्त राज्य अमेरिका: टीका लगाने में हिचकिचाहट के कारण खसरे का प्रकोप 26 राज्यों में फैल गया है, जबकि पहले यह बीमारी लगभग समाप्त हो चुकी थी।
- विज्ञान पर घटता विश्वास: रोकथाम योग्य बीमारियों का पुनः उभरना यह दर्शाता है कि कई विकसित देशों में विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर जनता का विश्वास व्यापक रूप से कम हो रहा है।
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सुरक्षा सुनिश्चित करना और विश्वास निर्माण
- ऐतिहासिक संदर्भ: सरकार कड़ी निगरानी बनाए हुए है क्योंकि 2009–10 में आंध्र प्रदेश और गुजरात में HPV टीका परीक्षण के दौरान सात लड़कियों की टीका लगने के बाद मृत्यु हो गई थी।
- हालाँकि ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की जाँच में यह निष्कर्ष निकला कि मौतें टीका के कारण नहीं हुई थीं, फिर भी इस घटना ने जनविश्वास को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
- AEFI प्रोटोकॉल: कार्यक्रम में अब टीकाकरण के बाद होने वाली प्रतिकूल घटनाओं (Adverse Events Following Immunisation – AEFI) की सख्त निगरानी भी शामिल है।
- टीका लगने के बाद लड़कियों को निगरानी में रखा जाएगा, और किसी भी दुष्प्रभाव को संभालने के लिए कुशल चिकित्सकीय दल मौजूद रहेगी।
- AEFI का अर्थ: टीकाकरण के बाद होने वाली कोई भी अवांछित चिकित्सीय घटना — जैसे बुखार, चक्कर आना या कोई गंभीर प्रतिक्रिया। इन सभी घटनाओं की सावधानीपूर्वक निगरानी, रिपोर्टिंग और विस्तृत जाँच आवश्यक है।
- पारदर्शिता: सरकार को संभावित दुष्प्रभावों के बारे में पारदर्शी रहना होगा तथा किसी भी प्रतिकूल घटना की सूक्ष्म रिपोर्टिंग और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करनी होगी।
- ICMR की सिफारिश: ICMR ने अनुशंसा की है कि प्रत्येक AEFI मामले की पहचान कर उसकी गहन जाँच की जाए। वर्ष 2009 की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी टीकाकरण कार्यक्रम में कोई भी प्रतिकूल घटना, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, नजरअंदाज नहीं की जा सकती।
राष्ट्रव्यापी HPV टीकाकरण कार्यक्रम की सफलता के लिए आवश्यक शर्तें
- कोल्ड चेन प्रबंधन: चूँकि यह वैक्सीन तापमान-संवेदनशील है, इसलिए इसकी प्रभावशीलता बनाए रखने हेतु निर्माण स्थल से लेकर टीकाकरण केंद्र तक मजबूत कोल्ड चेन प्रणाली सुनिश्चित करनी होगी।
- द्वि-आयामी (Two-Pronged) रणनीति: सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि युवा पीढ़ी का टीकाकरण किया जाए और साथ ही बुजुर्ग महिलाओं के लिए स्क्रीनिंग और निगरानी क्षमता को बढ़ाया जाए ताकि उन्हें इस बीमारी से बचाया जा सके।
निष्कर्ष
राष्ट्रव्यापी HPV टीकाकरण कार्यक्रम एक संभावित जीवन-रक्षक पहल है, जो भारत में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मृत्यु दर को उल्लेखनीय रूप से कम कर सकता है।
- हालाँकि, इसकी सफलता वैज्ञानिक संचार, पारदर्शी AEFI रिपोर्टिंग, मजबूत लॉजिस्टिक्स और लगातार सार्वजनिक विश्वास पर निर्भर करती है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न: भारत में निवारक स्वास्थ्य सेवा (Preventive Healthcare) को सुदृढ़ करने में मानव पैपिलोमा वायरस (HPV) टीकाकरण कार्यक्रम के महत्व पर चर्चा कीजिए।
(10 अंक, 150 शब्द)
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