संदर्भ:
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक वर्ष पश्चात, भारत इस ऑपरेशन को एक ऐतिहासिक क्षण के रूप में मना रहा है, जिसने इसके राष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांत, सैन्य रणनीति और स्वदेशी रक्षा आधुनिकीकरण को नया रूप दिया है।
ऑपरेशन सिंदूर के बारे में
- यह 22 अप्रैल, 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में 7 मई, 2025 को भारत द्वारा शुरू किया गया एक सैन्य अभियान था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे।
“डोजियर दृष्टिकोण” से “शून्य सहनशीलता” की ओर बदलाव
- डोजियर युग का अंत: इससे पूर्व, भारत व्यापक सीमा तक आतंकवादी हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय को साक्ष्य और राजनयिक डोजियर (Dossiers) प्रस्तुत करने पर निर्भर था।
- शून्य सहनशीलता की नीति : 2025 के पहलगाम हमले के बाद, भारत ने सीमा पार आतंकवाद को “युद्ध का कृत्य” (Act of War) मानकर एक अधिक सक्रिय सिद्धांत का संकेत दिया।
- प्रत्यक्ष निवारण (Direct Deterrence) की ओर बदलाव: यह दृष्टिकोण प्रतिक्रियाशील कूटनीति से सैन्य और रणनीतिक जवाब की ओर संक्रमण का प्रतीक है।
- परमाणु निवारण बाधा को तोड़ना: भारत ने संकेत दिया, कि पाकिस्तान की परमाणु मुद्रा अब पारंपरिक आतंकवाद-विरोधी अभियानों को नहीं रोकेगी।
- इस नीति का उद्देश्य आतंकवाद का प्रभावी रूप से नियंत्रित करने के लिए ‘एस्केलेशन रिस्क’ (तनाव बढ़ने का जोखिम) उठाने की तत्परता दिखाकर मजबूत निवारण स्थापित करना था।
ऑपरेशन सिंदूर का निष्पादन
- सटीक स्ट्राइक ऑपरेशन: पाकिस्तान और PoK में 9 पहचाने गए आतंकवादी बुनियादी ढाँचा स्थलों को लक्षित करते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था।
- सर्जिकल क्षमता का प्रदर्शन: पाकिस्तान की विस्तारित तैयारी के बावजूद भारतीय सेना ने सटीक निशाना लगाकर लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया।
- वायु शक्ति का प्रभावी उपयोग: ऑपरेशन ने भारत की उन्नत सटीक-स्ट्राइक और गहन लक्ष्य भेदने की क्षमताओं को उजागर किया।
- त्रि-सेवा समन्वय : थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने मजबूत परिचालन सामंजस्य और एकीकृत योजना का प्रदर्शन किया।
- कारगिल से सबक: कारगिल संघर्ष के दौरान देखी गई समन्वय की कमी के विपरीत, यह ऑपरेशन सशस्त्र बलों के मध्य बेहतर संबंधों को दर्शाता है।
- थिएटर कमांड अवधारणा का सत्यापन: सफलता ने सेवाओं में एकीकृत परिचालन नियंत्रण के साथ ‘एकीकृत थिएटर कमांड’ (Integrated Theatre Commands) के तर्क को पुष्ट किया।
ऑपरेशन सिंदूर की रक्षात्मक और जवाबी सफलता
- प्रभावी मिसाइल रक्षा: भारत की S-400 वायु रक्षा प्रणाली और स्वदेशी ‘कवच’ प्रणालियों ने जवाबी हमलों के दौरान पाकिस्तान की अधिकांश मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया।
- वायु रक्षा क्षमता का प्रदर्शन: ऑपरेशन ने भारत की बढ़ती बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा तैयारी तथा तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित किया।
- सटीक जवाबी हमले: भारत ने ‘नूर खान’ और ‘सरगोधा’ जैसे प्रमुख पाकिस्तानी हवाई ठिकानों के खिलाफ ब्रह्मोस और अन्य मिसाइलों का उपयोग करके सटीक जवाबी हमला किया।
- डीप स्ट्राइक क्षमता: इन हमलों ने दुश्मन के इलाके के भीतर रणनीतिक लक्ष्यों को सटीक रूप से भेदने की भारत की क्षमता का प्रदर्शन किया।
- नियंत्रित तनाव रणनीति : भारत द्वारा अपने प्राथमिक सैन्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के बाद 88 घंटों के भीतर युद्धविराम हो गया।
- रणनीतिक संयम: भारत ने विश्वसनीय निवारण का संकेत देते हुए लंबे समय तक तनाव से बचते हुए निर्णायक प्रतिशोध और संयम के बीच संतुलन स्थापित किया।
आगे की राह
- चीन के खिलाफ रक्षा तैयारी मजबूत करना: भारत को चीन द्वारा उत्पन्न चुनौती से निपटने के लिए सैन्य आधुनिकीकरण, उन्नत क्षमता विकास और दीर्घकालिक रणनीतिक निवारण में तेजी लानी चाहिए।
- रक्षा में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण’ को बढ़ावा देना: ड्रोन, एआई, मिसाइल प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी रक्षा विनिर्माण, नवाचार तथा उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर अधिक ध्यान देना आवश्यक है।
- सार्वजनिक-निजी सहयोग विस्तार: रक्षा उत्पादन में नवाचार और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए DRDO तथा रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) को लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और महिंद्रा समूह जैसी निजी फर्मों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर ने सक्रिय निवारण की ओर परिवर्तन को चिह्नित किया, जबकि भारत के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को सुरक्षित करने के लिए निरंतर रक्षा आधुनिकीकरण तथा आत्मनिर्भरता की आवश्यकता को रेखांकित किया।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: “प्रतिक्रियाशील संयम’ (Reactive Restraint) से ‘एस्केलेशन डोमिनेंस’ (Escalation Dominance) की ओर संक्रमण भारत के रणनीतिक सैन्य सिद्धांत में एक ऐतिहासिक क्षण है।” हालिया सीमा पार आतंकवाद विरोधी अभियानों के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए। इस ‘नए सामान्य’ (new normal) को बनाए रखने में ‘संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण’ (Whole-of-Nation approach) कितना महत्त्वपूर्ण है?
(15 अंक, 250 शब्द)
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