संदर्भ:
यह लेख सर्वोच्च न्यायालय के एक महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करता है, जिसमें एक 15 वर्षीय अविवाहित लड़की शामिल थी जो एक 17 वर्षीय लड़के के साथ सहमतिजन्य यौन संबंधों के बाद गर्भवती हो गई थी।
- जब तक गर्भावस्था का पता चला, तब तक 28 सप्ताह पूरे हो चुके थे। न्यायालय ने प्रजनन स्वायत्तता और लड़की के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए गर्भपात की अनुमति दे दी।
- इस मामले ने गर्भपात कानूनों, किशोरावस्था यौन रुचियों और पोक्सो (POCSO) फ्रेमवर्क पर चर्चा को पुनः आरंभ कर दिया है।
सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय
- सर्वोच्च न्यायालय ने गर्भावस्था के उन्नत (advanced) चरण के बावजूद, प्रजनन स्वायत्तता के सिद्धांतों, नाबालिग के मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा तथा बच्चे के सर्वोत्तम हितों का हवाला देते हुए गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी।
चिकित्सीय एवं नैतिक चिंताएँ
- अक्षम भ्रूण (Non-Viable Foetus): एक अक्षम भ्रूण वह होता है, जिसके चिकित्सीय हस्तक्षेप के बावजूद गर्भाशय के बाहर जीवित रहने की संभावना नहीं होती है। आमतौर पर, 20-24 सप्ताह से कम की गर्भावस्था इस श्रेणी में आती है, जिससे माँ के हित प्राथमिक विचार बन जाते हैं।
- सक्षम भ्रूण (Viable Foetus): एक सक्षम भ्रूण उचित चिकित्सीय सहायता के साथ गर्भाशय के बाहर जीवित रहने में समर्थ होता है। 28 सप्ताह में, भ्रूण का विकास हो चुका होता है और जीवित रहने की संभावना काफी अधिक होती है, जिससे अतिरिक्त नैतिक और चिकित्सीय उत्तरदायित्व उत्पन्न होते हैं।
- नैतिक दुविधा : डॉक्टरों ने तर्क दिया, कि इतने उन्नत चरण में गर्भपात करने में संभावित रूप से सक्षम भ्रूण का प्रसव (डिलिवरी) शामिल हो सकता है, जिससे चिकित्सा नैतिकता, भ्रूण के अधिकार और पेशेवर उत्तरदायित्व से संबंधित जटिल प्रश्न उठते हैं।
चिकित्सकों पर नैतिक बोझ
- दुहरा उत्तरदायित्व: जब एक गर्भावस्था सक्षमता तक पहुँच जाती है, तो डॉक्टरों की जिम्मेदारी न केवल माँ के प्रति बल्कि विकसित हो रहे भ्रूण के प्रति भी हो सकती है, जिससे नैदानिक निर्णय अधिक जटिल हो जाते हैं।
- विधिक अनुपालन से परे: यह मुद्दा केवल विधिक प्राधिकरण से परे है और चिकित्सा नैतिकता के क्षेत्र में प्रवेश करता है, जहाँ स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को देर से किए जाने वाले गर्भपात के दौरान नैतिक दुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
- पेशेवर संघर्ष: चिकित्सकों को महत्त्वपूर्ण नैतिक असहजता का अनुभव हो सकता है, जब उन्हें संभावित रूप से सक्षम भ्रूणों से जुड़े गर्भपात करने की आवश्यकता होती है।
विधिक अंतर्विरोध
- गर्भ का चिकित्सीय समापन (MTP) अधिनियम, 1971: एमटीपी (MTP) अधिनियम आमतौर पर गर्भपात की अनुमति देता है:
- सामान्य मामलों में 20 सप्ताह तक
- निर्दिष्ट श्रेणियों जैसे- नाबालिगों, बलात्कार पीड़ितों और कमजोर महिलाओं के लिए 24 सप्ताह तक।
- चूँकि वर्तमान गर्भावस्था 28 सप्ताह तक पहुँच चुकी थी, इसलिए इस मामले ने यह सवाल उठाया कि कानून द्वारा निर्धारित वैधानिक सीमाओं से परे न्यायिक विवेक किस सीमा तक कार्य कर सकता है।
- यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012: पोक्सो (POCSO) के तहत सहमति की आयु 18 वर्ष है, और नाबालिगों से जुड़ी किसी भी यौन गतिविधि को सहमति के बावजूद एक अपराध के रूप में माना जाता है।
- वर्तमान मामले में अंतर्विरोध: हालाँकि व्यवहार में यह संबंध सहमतिजन्य था, लेकिन कानून इसे वैधानिक बलात्कार (statutory rape) के रूप में वर्गीकृत करता है, जो कानूनी परिभाषाओं और सामाजिक वास्तविकताओं के मध्य तनाव को उजागर करता है।
पूर्ण अपराधीकरण की समस्या
- किशोरों का अपराधीकरण: लेख का तर्क है, कि पोक्सो (POCSO) के मामलों की एक बड़ी संख्या सहमतिजन्य किशोर संबंधों से उत्पन्न होती है, जिससे युवा व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू हो जाती है।
- न्यायिक और पारिवारिक हस्तक्षेप: ऐसे मामले अक्सर परिवारों, पुलिस अधिकारियों और अदालतों को व्यक्तिगत संबंधों में खींच लेते हैं, जिनमें ज़बरदस्ती या शोषण शामिल नहीं हो सकता है।
- विधिक सूक्ष्मता की कमी: वर्तमान ढाँचा अक्सर शोषणकारी यौन अपराधों और समान आयु वर्ग के किशोरों के मध्य सहमतिजन्य संबंधों के बीच अंतर करने में विफल रहता है।
मूल कारण : यौन शिक्षा की कमी
- वर्तमान दृष्टिकोण (केवल नियंत्रण का संदेश): समाज अक्सर एक सरल दृष्टिकोण पर भरोसा करता है जो किशोरों को पर्याप्त ज्ञान और जागरूकता प्रदान किए बिना, केवल यौन गतिविधि में शामिल न होने का निर्देश देता है।
- अनुशंसित दृष्टिकोण: समग्र यौन शिक्षा (CSE)
- लेख समग्र यौन शिक्षा (CSE) का समर्थन करता है, जिसमें शामिल हैं:
- सुरक्षित यौन व्यवहार
- गर्भनिरोधक जागरूकता
- मासिक धर्म शिक्षा
- प्रजनन स्वास्थ्य ज्ञान
- यौन संचारित रोगों (STDs) की रोकथाम
- सहमति और स्वस्थ संबंधों को समझना
ऐसी शिक्षा किशोरों को सूचित और जिम्मेदार निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
सुझाए गए सुधार
- विधिक सुधार
- सहमतिजन्य किशोर संबंधों के लिए एक अधिक सूक्ष्म ढाँचा प्रस्तुत करना।
- शोषणकारी आचरण और सहकर्मी (पीयर) संबंधों में अंतर करना।
- समान आयु वाले मामलों में पोक्सो प्रावधानों के पूर्ण अनुप्रयोग की समीक्षा करना।
- शैक्षिक सुधार
- स्कूलों में यौन शिक्षा को संस्थागत बनाना।
- प्रजनन और यौन स्वास्थ्य जागरूकता में सुधार करना।
- परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सहायता सेवाओं तक पहुँच का विस्तार करना।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. जब विधिक आदेश जीवन की रक्षा करने के उनके प्राथमिक कर्तव्य के साथ संघर्ष में आते हैं, तो चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा सामना की जाने वाली नैतिक दुविधाओं पर चर्चा कीजिए। सक्षम भ्रूणों से जुड़े, देर से किए जाने वाले गर्भ के चिकित्सीय समापन के मामलों के विशिष्ट संदर्भ के साथ, अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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