संदर्भ
ईरान के परमाणु और सैन्य लक्ष्यों पर अमेरिका–इज़राइल के बढ़ते हमलों ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है कि क्या केवल वायु शक्ति ही कोई रणनीतिक लक्ष्य बिना जमीनी हस्तक्षेप के हासिल कर सकती है।
वायु शक्ति का आकर्षण और सीमाएँ
- दृश्य प्रभाव और दंडात्मक क्षमता: वायु हमले (जैसे, इज़राइल–अमेरिका के अभियान, पुलवामा के बाद भारत की प्रतिक्रिया) घरेलू और वैश्विक दर्शकों के लिए कार्रवाई का दृश्य और तत्काल प्रमाण प्रदान करते हैं, जो संकेत देने, दंड देने और निवारक उपाय के उपकरण के रूप में कार्य करते हैं।
- कम जोखिम: ये जमीनी अभियानों की तुलना में सैनिकों के लिए कम जोखिम वाले होते हैं, क्योंकि इनमें सीधे सैनिकों की तैनाती, हताहत या बंदी बनने का खतरा कम होता है।
- नियंत्रण की कमी: हालाँकि, केवल वायु शक्ति से क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित करना या शासन परिवर्तन सुनिश्चित करना संभव नहीं है।
- जैसा कि सैन्य विशेषज्ञ टी.आर. फेहरेनबाच ने कहा है, ‘जमीनी सैनिक’ हमेशा ‘आसमान में बमों’ से श्रेष्ठ होते हैं, क्योंकि आप उस क्षेत्र को नियंत्रित नहीं कर सकते जिसे आपने केवल राख में बदल दिया है।
कथा युद्ध (Narrative Warfare)
- धारणा प्रबंधन: आधुनिक वायु हमलों के बाद ‘कथाओं की युद्ध’ होता है, जिसमें प्रतिस्पर्धी दावे जनता की राय को आकार देने का प्रयास करते हैं।
- उदाहरण: वर्ष 2019 के बालाकोट हमलों के बाद पाकिस्तान ने नुकसान को कम करके दिखाया, जिससे भारत को आतंकवादी ढाँचे पर हमले के प्रमाण प्रस्तुत करने पड़े।
- सूचना युद्ध: समकालीन संघर्षों (जैसे, रूस–यूक्रेन युद्ध) में, दोनों पक्ष रणनीतिक रूप से छवियों, वीडियो और आधिकारिक बयानों का उपयोग करते हैं ताकि वायु या ड्रोन हमलों के प्रभाव को बढ़ाया या कम किया जा सके, जिससे नुकसान की धारणा वास्तविक सैन्य परिणाम जितनी ही महत्वपूर्ण हो जाता है।
संपर्क युद्ध (Contact Warfare) की आवश्यकता
- कारगिल का उदाहरण: कारगिल युद्ध के दौरान वायु सेना के मिराज 2000 हमलों ने दुश्मन की आपूर्ति लाइनों को बाधित किया, लेकिन निर्णायक जीत तब प्राप्त हुई जब पैदल सेना ने कठिन परिस्थितियों में ऊंची चोटियों पर चढ़कर घुसपैठियों को बाहर निकाला।
- जमीनी उपस्थिति ही सफलता का मापदंड: रूस–यूक्रेन युद्ध में व्यापक ड्रोन और हवाई हमलों के बावजूद, वास्तविक रणनीतिक सफलता क्षेत्रीय नियंत्रण से मापी जाती है, जो जमीनी बलों द्वारा गांवों को कब्जे में लेने और बनाए रखने से संभव होती है।
रणनीतिक उद्देश्य और सैनिकों की आवश्यकताएँ
- विशेषज्ञता का विभाजन: चिंता की बात यह है कि सैन्य बलों की विभिन्न शाखाएँ आधुनिक उपकरणों के आकर्षण में अपनी मूल दक्षताओं से भटक रही हैं।
- वायु सेना को मिसाइल और हवाई हमलों पर ध्यान देना चाहिए, जबकि नौसेना को पनडुब्बियों और समुद्री मार्गों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि केवल विमानवाहक पोतों पर।
- सैनिक-केंद्रित प्रणाली: जहाँ सरकारें राफेल जैसे उन्नत विमानों पर भारी निवेश करती हैं, वहीं पैदल सेना की बुनियादी जरूरतें को अक्सर नजरअंदाज किया जाता हैं।
- जमीनी युद्ध जीतने के लिए सैनिकों को चाहिए:
- आधुनिक राइफल और गोला-बारूद, नाइट-विजन उपकरण और विश्वसनीय संचार प्रणाली, माइन-प्रोटेक्टेड वाहन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम तथा युद्धक्षेत्र डेटा को तेजी से प्रोसेस करने के लिए सॉफ्टवेयर उपकरण आदि।
निष्कर्ष
युद्ध का अंतिम निर्णय उन बलों द्वारा तय होता है जो क्षेत्र पर कब्जा करते हैं और उसे बनाए रखते हैं। वायु शक्ति जमीन तैयार कर सकती है, लेकिन अंतिम विजय केवल पैदल सेना ही सुनिश्चित कर सकती है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: आधुनिक युद्ध के उपकरण के रूप में वायु शक्ति कितनी प्रभावी है? इसकी सीमाओं पर चर्चा करें और हाल के वैश्विक एवं भारतीय अनुभवों के संदर्भ में निर्णायक सैन्य परिणाम सुनिश्चित करने के लिये उपाय सुझाएँ।
(15 अंक, 250 शब्द)
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