संदर्भ:
बिम्सटेक (BIMSTEC) सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के नेतृत्व में नई दिल्ली में बैठक की।
- 2027 में बिम्सटेक की 30वीं वर्षगाँठ के करीब पहुँचने के साथ, यह बैठक आतंकवाद, साइबर अपराध, संगठित अपराध, समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और आपदा प्रबंधन के खिलाफ क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित थी।
मुख्य निष्कर्ष
- उभरती सुरक्षा धमकियों के खिलाफ सहयोग: सदस्य देश आतंकवाद, साइबर हमलों, संगठित अपराध और पारराष्ट्रीय (transnational) सुरक्षा धमकियों के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए।
- समुद्री कानून प्रवर्तन दिशानिर्देश: सदस्यों ने बंगाल की खाड़ी में नौसेना और तटरक्षक (coast guard) एजेंसियों के बीच समन्वय में सुधार के लिए समुद्री कानून प्रवर्तन के मार्गदर्शक सिद्धांतों का समर्थन किया।
- मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR): बिम्सटेक ने चक्रवात, सुनामी और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित और समन्वित आपदा प्रतिक्रिया को सुगम बनाने के लिए प्रोटोकॉल अपनाए।
बिम्सटेक (BIMSTEC) के बारे में
- बिम्सटेक (BIMSTEC) का पूरा नाम “बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल” है।
- यह बंगाल की खाड़ी के माध्यम से दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया को जोड़ने वाला एक क्षेत्रीय संगठन है।
- विभिन्न क्षेत्रों में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इसकी स्थापना 1997 में की गई थी।
सदस्य देश
- बांग्लादेश
- भूटान
- भारत
- म्याँमार
- नेपाल
- श्रीलंका
- थाईलैंड
बिम्सटेक का विकास
| वर्ष |
विकास |
| 1997 |
बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड के साथ BIST-EC के रूप में स्थापित। |
| 1997 |
म्याँमार शामिल हुआ, और यह समूह BIMSTEC बन गया। |
| 2004 |
नेपाल और भूटान शामिल हुए, और संगठन का नाम बदलकर BIMSTEC कर दिया गया। |
मुख्य तथ्य
- विश्व की लगभग 22% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।
- संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
- बंगाल की खाड़ी दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री क्षेत्रों में से एक है, जो वैश्विक व्यापार का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा वहन करती है।
बिम्सटेक की स्थापना के कारण
- दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच सेतु: बिम्सटेक दक्षिण एशिया को दक्षिण पूर्व एशिया से जोड़ने वाले एक रणनीतिक और आर्थिक सेतु के रूप में कार्य करता है।
- क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना: यह व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और आपदा प्रबंधन में सहयोग को बढ़ावा देता है।
- सार्क (SAARC) का विकल्प: भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण सार्क काफी हद तक निष्क्रिय रहा है, जिससे बिम्सटेक एक प्रभावी क्षेत्रीय मंच के रूप में उभरा है।
- बंगाल की खाड़ी कनेक्टिविटी को मजबूत करना: इसका उद्देश्य परिवहन, समुद्री संपर्क, डिजिटल कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय एकीकरण में सुधार करना है।
भारत के लिए महत्त्व
- पड़ोसी प्रथम (नेबरहुड फर्स्ट) की नीति का समर्थन करता है: बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में पड़ोसी देशों के साथ भारत के जुड़ाव को मजबूत करता है।
- एक्ट ईस्ट (Act East) नीति को आगे बढ़ाता है: यह दक्षिण पूर्व एशिया के साथ भारत के आर्थिक और रणनीतिक जुड़ाव को गहरा करता है।
- समुद्री सुरक्षा को बढ़ाता है: यह समुद्री डोमेन जागरूकता, तटीय सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता में सहयोग को बढ़ावा देता है।
- चीन के प्रभाव का विकल्प प्रदान करता है: बिम्सटेक एक ऐसा क्षेत्रीय ढांचा प्रदान करता है जो नियम-आधारित हिंद-प्रशांत व्यवस्था का समर्थन करता है और चीन की बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति को संतुलित करता है।
- कनेक्टिविटी में सुधार करता है: यह विशेष रूप से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बेहतर सड़क, रेल, बंदरगाह और डिजिटल कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करता है।
- भू-आबद्ध (Landlocked) देशों का समर्थन करता है: यह नेपाल और भूटान को बंगाल की खाड़ी तक अधिक पहुँच प्रदान करता है, जिससे क्षेत्रीय व्यापार में सुधार होता है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
- व्यापार और निवेश: क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और व्यापार सरलीकरण को बढ़ावा देता है।
- कनेक्टिविटी: परिवहन गलियारों, बंदरगाहों और डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करता है।
- समुद्री सुरक्षा: समुद्री डकैती, अवैध शिकार, तस्करी और समुद्री अपराध के खिलाफ सहयोग को बढ़ाता है।
- आतंकवाद विरोधी: खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद के प्रति समन्वित प्रतिक्रिया को प्रोत्साहित करता है।
- साइबर सुरक्षा: साइबर खतरों और साइबर अपराध से निपटने के लिए क्षेत्रीय क्षमता का निर्माण करता है।
- आपदा प्रबंधन: प्राकृतिक आपदाओं के दौरान संयुक्त तैयारी और समन्वित मानवीय सहायता को सुगम बनाता है।
संबंधित चुनौतियाँ
- म्याँमार में राजनीतिक अस्थिरता: म्याँमार में जारी आंतरिक संघर्ष क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और सहयोग को प्रभावित करता है।
- भारत-बांग्लादेश तनाव: हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने द्विपक्षीय संबंधों में चुनौतियाँ पैदा की हैं, जिससे क्षेत्रीय पहल प्रभावित हुई हैं।
- द्विपक्षीय विवाद: म्याँमार और बांग्लादेश के बीच रोहिंग्या मुद्दे सहित सदस्य देशों के बीच मतभेद गहरे सहयोग में बाधा डालते हैं।
- धीमा कार्यान्वयन: कई कनेक्टिविटी और व्यापार परियोजनाएँ कार्यान्वयन में देरी का सामना कर रही हैं।
- सीमित संस्थागत क्षमता: कई अन्य क्षेत्रीय संगठनों की तुलना में बिम्सटेक के पास अपेक्षाकृत कमजोर संस्थागत तंत्र है।
- अपर्याप्त वित्तपोषण: महत्त्वाकांक्षी क्षेत्रीय परियोजनाओं को लागू करने के लिए वित्तीय और तकनीकी संसाधन अपर्याप्त बने हुए हैं।
आगे की राह
- बिम्सटेक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में तेजी लाएँ: एफटीए के शीघ्र समापन से अंतर-क्षेत्रीय व्यापार और निवेश को काफी बढ़ावा मिलेगा।
- भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करें: सदस्य देशों में परिवहन गलियारों, बहु-मॉडल रसद (multimodal logistics), बंदरगाहों और डिजिटल अवसंरचना में सुधार करें।
- समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाएँ: संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों, समुद्री डोमेन जागरूकता और समन्वित कानून प्रवर्तन तंत्र का विस्तार करें।
- संस्थागत क्षमता को मजबूत करें: प्रभावी कार्यान्वयन के लिए बिम्सटेक सचिवालय को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक सहायता प्रदान करें।
- क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास करें: लचीली क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखलाओं (value chains), ऊर्जा सहयोग और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा दें।
- भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ बिम्सटेक को संरेखित करें: नेबरहुड फर्स्ट, एक्ट ईस्ट, महासागर (MAHASAGAR – सभी क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति) और भारत के हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में बिम्सटेक का लाभ उठाएँ।
निष्कर्ष
बिम्सटेक (BIMSTEC) बंगाल की खाड़ी में भारत का सबसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय मंच बन गया है। आर्थिक एकीकरण, समुद्री सुरक्षा, आपदा अनुकूलन और कनेक्टिविटी को मजबूत करके, यह समूह हिंद-प्रशांत में भारत के रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि का मुख्य आधार बन सकता है।