संदर्भ:
केंद्र सरकार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में अधिकारियों की भर्ती, सेवा शर्तों और प्रशासनिक ढाँचे को विनियमित करने के लिए राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पेश करने की योजना बना रही है।
उद्देश्य और मूल प्रयोजन
- IPS वर्चस्व बनाए रखना: यह विधेयक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में शीर्ष नेतृत्व पदों पर IPS अधिकारियों के वर्चस्व को बनाए रखने का उद्देश्य रखता है।
- न्यायिक आदेश को निरस्त करना: यह 23 मई 2025 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को निरस्त करने का प्रयास करता है, जिसमें सरकार को निर्देश दिया गया था कि दो वर्षों के भीतर DIG और IG स्तर पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कम की जाए, ताकि CAPF कैडर अधिकारियों के करियर अवसर बेहतर हो सकें।
- विधायी स्पष्टता प्रदान करना: सरकार इस विधेयक को “अम्ब्रेला कानून” के रूप में वर्णित करती है, जिसका उद्देश्य CAPFs में ग्रुप A जनरल ड्यूटी अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों के संबंध में विधायी स्पष्टता प्रदान करना है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
- IPS अधिकारियों के लिए प्रतिनियुक्ति कोटा: यह विधेयक CAPFs में वरिष्ठ पदों पर प्रतिनियुक्त हेतु IPS अधिकारियों के लिए निश्चित कोटा निर्धारित करता है।
- इंस्पेक्टर जनरल (IG) पद: 50% पद प्रतिनियुक्ति पर आए IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं।
- अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) पद: 67% पद प्रतिनियुक्ति पर आए IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं।
- विशेष DG और महानिदेशक (DG) पद: 100% पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं। (इसका अर्थ है कि CAPF कैडर अधिकारी इन शीर्ष नेतृत्व पदों तक नहीं पहुँच सकते)।
- नॉटविथस्टैंडिंग क्लॉज (Notwithstanding Clause): इस विधेयक में एक नॉटविथस्टैंडिंग क्लॉज शामिल है, जो यह सुनिश्चित करता है कि इसके प्रावधान किसी अन्य कानून या पूर्व न्यायिक निर्णय पर प्रधान होंगे।
- गृह मंत्रालय का बढ़ा हुआ नियंत्रण: यह विधेयक गृह मंत्रालय (MHA) को अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों को नियंत्रित करने का अधिकार देता है, जिससे सामान्यतः इस प्रकार के मामलों को संभालने वाले कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की भूमिका से परे कार्य किया जा सके।
IPS और CAPF कैडर के बीच संघर्ष
- CAPF अधिकारियों का करियर ठहराव: अलग UPSC परीक्षा के माध्यम से भर्ती होने वाले CAPF अधिकारियों को पदोन्नति में देरी का सामना करना पड़ता है।
- उदाहरण: जहाँ एक असिस्टेंट कमांडेंट को आदर्श रूप से लगभग चार वर्षों में डिप्टी कमांडेंट पद पर पदोन्नत किया जाना चाहिए, वहीं कुछ अधिकारी प्रवेश स्तर के पद पर 16 वर्षों तक बने रहते हैं।
- संचालनात्मक जोखिम बनाम नेतृत्व नियंत्रण: CAPF अधिकारी जमीनी अभियानों जैसे कि नक्सल विरोधी मिशनों में मुख्य जोखिम उठाते हैं, जबकि शीर्ष नेतृत्व पदों पर अधिकांशतः प्रतिनियुक्त IPS अधिकारी रहते हैं, जिन्हें कैडर से बाहर का माना जाता है।
- वेतन और वेतन समानता का मुद्दा: हालाँकि 2006 में गैर-कार्यात्मक उन्नयन [Non-Functional Upgradation (NFU)] लागू किया गया था ताकि ग्रुप A अधिकारियों को IAS स्तर के समान वेतन मिल सके, यह CAPF अधिकारियों के लिए प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाया, जिससे उनकी वेतन में असमानता विद्यमान है।
विधेयक से संबंधित सरकार का औचित्य
- प्रशासनिक अनुभव: सरकार का तर्क है कि IPS अधिकारियों के पास व्यापक प्रशासनिक अनुभव होता है, जो CAPFs जैसे बड़े और जटिल सुरक्षा बलों का नेतृत्व करने के लिए आवश्यक माना जाता है।
- अंतर-राज्य समन्वय: चूँकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) अक्सर राज्य प्रशासन और राज्य पुलिस के साथ समन्वय में कार्य करते हैं, सरकार का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व पदों पर IPS अधिकारियों का होना केंद्र सरकार और राज्यों के बीच समन्वय को और अधिक सुगम बनाता है।
विधेयक से संबंधित आलोचनाएँ और चिंताएँ
- शक्तियों के पृथक्करण पर सवाल: आलोचकों का तर्क है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को निरस्त करने के लिए कानून का उपयोग करना विधायिका और न्यायपालिका के बीच शक्ति पृथक्करण को लेकर चिंताएँ उत्पन्न करता है।
- CAPF समुदाय का विरोध: सेवानिवृत्त CAPF अधिकारियों ने सांसदों को पत्र लिखकर इस विधेयक का विरोध किया है, यह तर्क देते हुए कि इससे CAPF कैडर का मनोबल और अधिक घट जाएगा।
निष्कर्ष
यह विधेयक संचालनात्मक समन्वय और CAPF अधिकारियों के न्यायसंगत करियर विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की व्यापक चुनौती को दर्शाता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) बिल, 2026 के संदर्भ में आंतरिक सुरक्षा बलों में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की विशेषताओं और कमियों पर चर्चा कीजिए।
(10 अंक, 150 शब्द)
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