जनसांख्यिकी और राज्य की राजनीति: क्या सरकारें बच्चों को “खरीद” सकती हैं?

जनसांख्यिकी और राज्य की राजनीति: क्या सरकारें बच्चों को “खरीद” सकती हैं? 10 Mar 2026

संदर्भ

हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में घटती जन्म दर को ध्यान में रखते हुए दूसरे बच्चे से आगे जन्म लेने वाले बच्चों के लिए दंपतियों को ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव रखा।

  • इस प्रस्ताव ने इस बहस को फिर से जीवित कर दिया है कि क्या वित्तीय प्रोत्साहन घटती जन्म दर को वास्तव में बदल सकते हैं।

मुख्य अवधारणाएँ 

  • जनसांख्यिकी ही नियति है: यह विचार, जिसे अक्सर ऑगस्त कॉम्टे से जोड़ा जाता है, यह संकेत देता है कि किसी राष्ट्र का आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक भविष्य उसकी जनसंख्या संरचना से निर्धारित होता है।
  • कुल प्रजनन दर (TFR): यह औसतन उन बच्चों की संख्या है जिन्हें एक महिला अपने प्रजनन काल के दौरान जन्म देती है, जो वर्त्तमान प्रजनन पैटर्न पर आधारित होती है।
  • प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन: यह उस प्रजनन दर को दर्शाता है (लगभग 2.1 बच्चे प्रति महिला) जो किसी जनसंख्या को पीढ़ी दर पीढ़ी स्वयं को बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है।
    • अतिरिक्त 0.1 बच्चों की संख्या शिशु मृत्यु दर और अन्य जनसांख्यिकीय कारकों को ध्यान में रखते हुए जोड़ी गई है।
    • जब कुल प्रजनन दर (TFR) इस स्तर से नीचे गिर जाती है, तो किसी देश में अंततः जनसंख्या में कमी और वृद्धावस्था बढ़ने का अनुभव हो सकता है।

भारत में जनसांख्यिकीय से संबंधित चिंताएँ

  • जनसांख्यिकीय संक्रमण: भारत जनसांख्यिकीय संक्रमण के चरण 3 से चरण 4 की ओर बढ़ रहा है, जहाँ कम जन्म दर के साथ कम मृत्यु दर धीरे-धीरे जनसंख्या वृद्धि को धीमा कर देती है तथा वृद्ध जनसंख्या बढ़ने लगती है।
  • आंध्र प्रदेश: मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने चिंता व्यक्त की है क्योंकि राज्य की TFR लगभग 1.4 तक गिर गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर से काफी कम है, और इससे भविष्य में कार्यबल में कमी और बुजुर्गों पर निर्भरता में वृद्धि हो सकती है।
  • सिक्किम: सिक्किम में भारत की सबसे कम प्रजनन दरों में से एक दर्ज की गई है (लगभग 1.1).

नीति में हस्तक्षेप के प्रयास

  • आंध्र प्रदेश: दूसरे या तीसरे बच्चे के जन्म पर दंपतियों को ₹25,000 देने का प्रस्ताव।
  • सिक्किम का व्यापक मॉडल (2022): दूसरा बच्चा होने पर सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि।
    • मातृत्व अवकाश को एक वर्ष तक बढ़ा दिया गया है, साथ ही पितृत्व अवकाश में भी वृद्धि की गई है।
    • निजी क्षेत्र के लिए वित्तीय सहायता: दूसरे बच्चे के लिए ₹5,000/माह और तीसरे बच्चे के लिए ₹10,000/माह का प्रावधान
    • वात्सल्य योजना: गर्भधारण में कठिनाई झेल रहे दंपतियों के लिए दो मुफ्त IVF चक्र प्रदान किए गए।
  • अंतरराष्ट्रीय उदाहरण
    • दक्षिण कोरिया: नकद अनुदान, आवास सहायता और मुफ्त बाल देखभाल जैसी योजना के बावजूद भी, इसका TFR विश्व में सबसे कम 0.7 है।
    • सिंगापुर: “बेबी बोनस” योजनाएँ और कर छूट लागू की गईं, फिर भी TFR 1.0 पर ही बनी हुई है।
    • चीन: एक-बच्चा नीति को पहले दो-बच्चा और फिर तीन-बच्चा नीति में परिवर्तित कर दिया गया, फिर भी जन्म दर लगातार घट रही है।
    • जापान: दशकों से प्रोत्साहन योजनाओं के बावजूद TFR 1.3
    • हंगरी: TFR 1.3 से बढ़कर 1.55 हो गया। उनकी सक्रिय नीति में चार या उससे अधिक बच्चों वाली माताओं के लिए आजीवन आयकर छूट शामिल है।

वित्तीय योजनाओं की विफलता के कारण

  • नकद प्रोत्साहनों का सीमित प्रभाव: बच्चों के पालन-पोषण की उच्च लागत की तुलना में वित्तीय लाभ अक्सर बहुत कम होते हैं, जिससे ये प्रजनन संबंधी निर्णयों पर पर्याप्त प्रभाव डालने के लिए अपर्याप्त हो जाते हैं।
  • सामाजिक बदलाव: महिलाओं की बढ़ती शिक्षा, करियर की आकांक्षाएँ और देर से विवाह के कारण बच्चे पैदा करने की जैविक अवधि कम हो जाती है।
  • शहरीकरण का दबाव: शहरों में आवास, शिक्षा और बाल देखभाल की ऊँची लागत बड़े परिवारों को हतोत्साहित करती है।
  • गुणवत्ता बनाम संख्या: आधुनिक माता-पिता अक्सर कई बच्चों के बजाय एक बच्चे पर अधिक संसाधन निवेश करना पसंद करते हैं।

सुझाया गया विकल्प — “इकोसिस्टम मॉडल”

  • नकद सहायता से आगे बढ़ना: फ्रांस और नॉर्डिक जैसे देशों ने केवल नकद प्रोत्साहनों पर निर्भर रहने के बजाय परिवार-समर्थक इकोसिस्टम बनाकर प्रजनन दर को स्थिर किया है।
  •  किफायती बाल देखभाल सेवा: कामकाजी माता-पिता पर बोझ कम करने के लिए सुलभ और किफायती बाल देखभाल सेवाओं को सुनिश्चित करना।
  • मातृत्व-पितृत्व अवकाश: माता और पिता दोनों के लिए पूर्वानुमानित और उदार मातृत्व-पितृत्व अवकाश प्रदान करना।
  • लचीली कार्य नीतियाँ: माता-पिता को उनके करियर और पारिवारिक जिम्मेदारियों को संतुलित करने में मदद करने के लिए लचीले कार्य समय और कार्य-जीवन संतुलन को बढ़ावा देना।

निष्कर्ष

जनसांख्यिकीय परिवर्तन धीमा लेकिन निर्णायक होता है। सरकारें प्रोत्साहन दे सकती हैं, लेकिन अंततः जन्म दर इस बात पर निर्भर करती है कि परिवारों को आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता पर कितना भरोसा है, न कि केवल वित्तीय सब्सिडी पर।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: कुछ भारतीय राज्यों में घटती प्रजनन दर के लिए जिम्मेदार कारकों पर चर्चा कीजिए तथा यह मूल्यांकन कीजिए कि राज्य द्वारा बच्चों के जन्म पर दिए जाने वाले प्रोत्साहन क्या एक स्थायी नीतिगत समाधान प्रदान करते हैं।

 (15 अंक, 250 शब्द)

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