‘स्वयंसेवी’ देखभाल कार्य को मान्यता देने की आवश्यकता

‘स्वयंसेवी’ देखभाल कार्य को मान्यता देने की आवश्यकता 9 Mar 2026

संदर्भ

केंद्रीय बजट 2026–27 में एक ‘मजबूत देखभाल तंत्र (Care Ecosystem)’ विकसित करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है। इसके तहत राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचे (NSQF) के अनुरूप कार्यक्रमों के माध्यम से 1.5 लाख बहु-कुशल देखभालकर्ताओं को वृद्धजन देखभाल, मूलभूत देखभाल और संबंधित कौशलों में प्रशिक्षित किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता: आशा (अधिकारिक सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) के अंतर्गत की गई थी, जबकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) के अंतर्गत कार्य करती हैं, जिसे वर्ष 1975 में शुरू किया गया था।
    • दोनों मिलकर भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य, पोषण और मातृ-शिशु कल्याण प्रणाली की रीढ़ का निर्माण करते हैं।
  • कोविड -19 में योगदान: महामारी के दौरान इन अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं ने तब भी गाँवों में टीकों, दवाओं और जागरूकता अभियानों की अंतिम-मील तक पहुँच सुनिश्चित की, जब अधिकांश व्यवस्थाएँ बाधित थीं।

मुख्य समस्या: “मानदेय” बनाम उचित वेतन

  • स्वयंसेवक का दर्जा: सरकार आशा(ASHA) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को औपचारिक कर्मचारी की बजाय स्वयंसेवक या सामुदायिक कार्यकर्ता के रूप में वर्गीकृत करती है, जिससे उनकी संस्थागत मान्यता सीमित हो जाती है।
  • आर्थिक असुरक्षा: नियमित वेतन के बजाय उन्हें सीमित मानदेय प्रदान किया जाता है, जो उनके कार्यभार और जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है।
  • सुविधाओं की कमी: अनौपचारिक स्थिति के कारण उन्हें रोजगार की सुरक्षा, औपचारिक अनुबंध और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती, जिसके कारण वे अक्सर मान्यता और सम्मान की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हैं।

प्रस्तावित समाधान

  • NSQF के साथ समन्वय: राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (NSQF) का उपयोग ASHA और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के व्यावहारिक कौशलों की औपचारिक पहचान और ग्रेडिंग के लिए किया जा सकता है।
    • उदाहरण: जो कार्यकर्ता चिकित्सा या सामुदायिक स्वास्थ्य कार्य (जैसे प्राथमिक उपचार या टीकाकरण) शामिल होते हैं, वे मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद अपने कौशल का प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं।
  • बेहतर वेतन का मार्ग: औपचारिक कौशल मान्यता से उन्हें कुशल श्रमिक के रूप में वर्गीकृत किया जा सकेगा, जिससे बेहतर वेतन और कैरियर प्रगति का आधार मजबूत होगा।
  • ILO का 5R ढाँचा: अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) देखभाल कार्य से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने के लिए 5R ढाँचा का सुझाव देती है, जिसमें शामिल है: पहचान (Recognise), कम करना (Reduce), पुनर्वितरण (Redistribute), प्रतिफल देना (Reward), और प्रतिनिधित्व करना (Represent)।
  • प्रतिफल (Reward): ASHA और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें “स्वयंसेवक” की संज्ञा से आगे बढ़ाकर उनके देखभाल कार्य की प्रकृति और सामाजिक मूल्य के अनुसार उचित वेतन और पर्याप्त पारिश्रमिक सुनिश्चित किया जाए।
  • प्रतिनिधित्व (Represent): कार्यकर्ताओं को नीति निर्माण और कार्यक्रमों के निर्माण में शामिल किए जाने की आवश्यकता है, ताकि जमीनी वास्तविकताएँ नीति निर्णयों में शामिल हो सकें।

निष्कर्ष

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार प्रदान करता है।

  • इसलिए, ASHA और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए उचित मान्यता, पर्याप्त वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल कल्याणकारी उपाय नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अनिवार्यता बन जाता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: भारत की विस्तारित होती देखभाल अर्थव्यवस्था (Care Economy) एक ओर प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की बढ़ती मांग को उजागर करती है, वहीं दूसरी ओर यह अभी भी ASHA और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं जैसी अनौपचारिक महिला श्रमिकों पर निर्भर है। इन अग्रिम पंक्ति के देखभाल कार्यकर्ताओं के सामने आने वाली चुनौतियों का परीक्षण कीजिए और भारत में देखभाल अर्थव्यवस्था को औपचारिक रूप से मान्यता देने और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

 (15 अंक, 250 शब्द)

Follow Us

Explore SRIJAN Prelims Crash Course

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.