UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

एक राष्ट्र, एक चुनाव — बीमारी से भी बदतर इलाज

एक राष्ट्र, एक चुनाव — बीमारी से भी बदतर इलाज 9 Mar 2026

संदर्भ

प्रस्तावित ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (ONOE) ढाँचा, जिसे संविधान (एक सौ उनतीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2024 के माध्यम से लाने का प्रस्ताव है, ने संघवाद, संसदीय जवाबदेही और संवैधानिक संरचना पर इसके प्रभावों को लेकर बहस उत्पन्न कर दी है।

एक राष्ट्र, एक चुनाव (ONOE) के बारे में

  • परिभाषा: ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (ONOE) का अर्थ है कि लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव समानांतर रूप से आयोजित किए जाएँ।
  • पक्ष में दिए जाने वाले तर्क
    • चुनावी खर्च में कमी: एक साथ चुनाव कराने से प्रशासनिक और लॉजिस्टिक लागत में कमी आ सकती है।
    • शासन की दक्षता: यह मॉडल आचार संहिता (MCC) के कारण होने वाले व्यवधानों को कम करता है और सरकारों को विकास कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में सहयोग प्रदान करता है।
    • प्रचार चक्र में कमी: यह लगातार राजनीतिक प्रचार को सीमित करता है, जिससे नीतियों की निरंतरता में सुधार होता है।

एक राष्ट्र, एक चुनाव का आर्थिक और दार्शनिक तर्क

  • लागत संबंधी तर्क पर प्रश्न: भारत में चुनावी खर्च GDP का 1% से भी कम है, जिससे इतने बड़े संवैधानिक बदलाव के आर्थिक औचित्य पर सवाल उठते हैं।
  • चुनाव “ओवरहेड” नहीं हैं: आर्थिक दृष्टि से ओवरहेड ऐसे खर्च होते हैं जिन्हें टाला जा सकता है, जबकि चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अनिवार्य हैं।
  • लोकतंत्र की कीमत: चुनाव स्वशासन की नियमित लागत का प्रतिनिधित्व करते हैं और शासन की वैधता तथा नागरिक भागीदारी सुनिश्चित करते हैं।

चरणबद्ध चुनावों के लाभ

  • लगातार राजनीतिक जवाबदेही: राज्य और केंद्र स्तर पर अलग-अलग समय पर होने वाले चुनाव यह सुनिश्चित करते हैं कि सत्ता में बैठे लोग लगातार जनता के प्रति जवाबदेह रहें।
  • प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहन: यदि चुनाव केवल प्रत्येक पाँच वर्ष में एक बार हों, तो हार का डर (जो बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है) कम हो सकता है।
    • चरणबद्ध चुनावों से यह सुनिश्चित होता है कि अलग-अलग राज्यों में चुनाव होने के कारण नेता प्रत्येक कुछ वर्षों में जनता के प्रति जवाबदेह रहें।

संघवाद और स्थानीय मुद्दों पर प्रभाव

  • दो-मंज़िला संघवाद की उपमा: संघवाद की तुलना दो-मंज़िला संरचना से की जा सकती है, जिसमें केंद्र और राज्य अपने-अपने अलग संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हैं।
  • राष्ट्रीय मुद्दों का प्रभुत्व: एक साथ चुनाव होने पर राष्ट्रीय मुद्दे (जैसे सुरक्षा, विदेश नीति) स्थानीय शासन के मुद्दों—जैसे जल की आपूर्ति, सड़कें और बिजली पर हावी हो सकते हैं।
  • राज्यों की स्वायत्तता कमजोर होना: समन्वित चुनाव राज्य-विशेष मुद्दों और नीतिगत प्राथमिकताओं के लिए राजनीतिक विस्तार को कम कर सकते हैं।

संविधान की मूल संरचना से संबंधित मुद्दा 

  • मूल संरचना सिद्धांत: केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संसद संविधान की मूल संरचना को बदल नहीं सकती।
  • कानूनी टकराव: चूँकि संघवाद और लोकतंत्र इस मूल संरचना का हिस्सा हैं, इसलिए एक साथ चुनाव लागू करना संविधान की मूल पहचान को प्रभावित करने वाला कदम माना जा सकता है।

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (ONOE) पर विशेषज्ञों की सिफारिशें

  • न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति: इसे अप्रैल 2025 में तमिलनाडु सरकार द्वारा भारत में केंद्र–राज्य संबंधों और बढ़ते केंद्रीकरण की समीक्षा के लिए गठित किया गया था।
  • सिफारिश (फरवरी 2026 रिपोर्ट): समिति ने संघवाद और संवैधानिक संतुलन से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (ONOE) प्रस्ताव को वापस लेने की सिफारिश की।
  • प्रस्ताव का मूल्यांकन: समिति ने निष्कर्ष निकाला कि इसके लाभों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया है, जबकि संघवाद और लोकतंत्र के लिए संरचनात्मक जोखिम गंभीर हैं।

केस स्टडी: इंडोनेशिया की प्रशासनिक चुनौती

  • चेतावनी का उदाहरण: इंडोनेशिया द्वारा वर्ष 2019 में राष्ट्रपति और सभी विधायी स्तरों के लिए एक ही दिन में चुनाव आयोजित किए, जिससे अत्यधिक प्रशासनिक दबाव के कारण लगभग 900 चुनाव कर्मचारियों की मृत्यु और 5,000 से अधिक लोग बीमार हो गए।
    • वर्ष 2024 में भी इसी तरह की समस्याएँ सामने आईं, जिसके कारण इंडोनेशिया के संवैधानिक न्यायालय ने जून 2025 में 2029 से राष्ट्रीय और स्थानीय चुनाव अलग-अलग कराने का आदेश दिया, ताकि मतदाता और प्रशासनिक बोझ को कम किया जा सके।
  • जोखिम का पैमाना: भारत, जो इंडोनेशिया से कहीं बड़ा और अधिक विविध है, में ऐसा प्रयोग और भी गंभीर लोकतांत्रिक संकट उत्पन्न कर सकता है।

निष्कर्ष

चुनाव लोकतंत्र की अनिवार्य लागत हैं। प्रशासनिक दक्षता ऐसे सुधारों का औचित्य नहीं दे सकती जो संघवाद, संवैधानिक संतुलन, या लोकतांत्रिक जवाबदेही को कमजोर करते हैं।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (ONOE) का प्रस्ताव लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने का प्रयास करता है। भारत में संसदीय लोकतंत्र, संघवाद और विधायी जवाबदेही पर इसके संवैधानिक प्रभावों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

 (15 अंक, 250 शब्द)

एक राष्ट्र, एक चुनाव — बीमारी से भी बदतर इलाज

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.