कनाडा-भारत के बीच नए आर्थिक गठबंधन का उदय

कनाडा-भारत के बीच नए आर्थिक गठबंधन का उदय 9 Mar 2026

संदर्भ

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत का दौरा किया और नरेंद्र मोदी के साथ आर्थिक सहयोग को पुनर्जीवित करने तथा समग्र आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के लिए वार्ता दोबारा शुरू करने पर चर्चा की।

  • इस समझौते का लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 70 अरब डॉलर तक पहुँचाना है।

भारतीय व्यवसायों के लिए लाभ

  •  बाजार तक पहुँच (Market Access): फार्मास्यूटिकल्स, IT और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के लिए व्यापारिक बाधाएँ कम होंगी।
  • निवेश सुरक्षा (Investment Protection): कनाडा में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए अधिक स्पष्ट नियम।
  • उत्तरी अमेरिका का प्रवेश द्वार (Gateway to North America): स्थिर नियामक व्यवस्था के कारण कनाडा भारतीय कंपनियों को व्यापक उत्तर अमेरिकी बाजार तक पहुँच प्रदान कर सकता है।

आर्थिक गठबंधन से संबंधित प्रमुख बिंदु

  • भू-राजनीतिक कारण (Geopolitical Drivers): कोविड -19 महामारी के बाद कई देश “चाइना प्लस वन” रणनीति अपना रहे हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखलाओं को विविध बनाया जा सके और एक ही देश पर निर्भरता कम हो।
    • कनाडा इस विविधीकरण के लिए भारत को सबसे सुरक्षित और महत्वपूर्ण बाजार के रूप में देखता है।
  • “FOMO” (Fear Of Missing Out) कारक: कनाडा के फाइव आईज़ (Five Eyes) साझेदार—संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड—पहले ही व्यापार समझौतों और वार्ताओं के माध्यम से भारत के साथ अपने आर्थिक सहयोग को मजबूत कर चुके हैं।
    • उदाहरण: ऑस्ट्रेलिया ने ECTA (आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता) पर हस्ताक्षर किए हैं, यूके और यूरोपीय संघ भारत के साथ FTA वार्ताओं के उन्नत चरण में हैं, और अमेरिका पहले से ही भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
  • अर्थव्यवस्था संबंधी कमजोरियाँ और विविधीकरण: कनाडा की अर्थव्यवस्था अमेरिका पर काफी निर्भर है, जबकि चीन के साथ उसके संबंध मानवाधिकार मुद्दों के कारण तनावपूर्ण हैं। इसलिए वह अपने आर्थिक साझेदारों में विविधता लाना चाहता है।
  • पूरक शक्तियाँ: यह संबंध परस्पर पूरक है, जिसमें प्रत्येक देश वह प्रदान करता है जिसकी दूसरे को आवश्यकता है।
    • कनाडा: पूँजी (निवेश निधियाँ), प्राकृतिक संसाधन (यूरेनियम, पोटाश, दालें), और उन्नत तकनीक।
    • भारत: एक विशाल उपभोक्ता बाजार, मजबूत जनसांख्यिकीय लाभ (युवा कार्यबल), और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी IT सेवाएँ।
      • उदाहरण: कनाडाई पेंशन योजना निवेश बोर्ड (CPPIB) भारत के बुनियादी ढाँचे में, जैसे राजमार्ग और नवीकरणीय ऊर्जा, लगभग 100 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है।
  • रणनीतिक संरेखण (Strategic Alignment): दोनों देश मुक्त और खुला इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाए रखने की साझा दृष्टिकोण रखते हैं।
    • वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि समुद्री व्यापार मार्ग खुले रहें और किसी एक शक्ति का प्रभुत्व न हो।

निर्णायक क्षण: निजी कंपनियों की भूमिका

  • सरकार एक सक्षमकर्ता के रूप में: सरकारें व्यापार समझौतों और शुल्क में कटौती के माध्यम से सहायक ढाँचे तैयार करके सक्षमकर्ता की भूमिका निभातें हैं।
  • निजी क्षेत्र एक प्रेरक के रूप में: हालाँकि, निजी क्षेत्र मुख्य प्रेरक बना रहता है, जो राजनीतिक इरादों को वास्तविक व्यापार, निवेश और बाजार विस्तार में बदलता है।
  • कॉर्पोरेट आवश्यकताएँ: कंपनियों को बाजार में प्रवेश करने के लिए कार्रवाई, पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षा, और दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण के साथ निवेश करने का दृढ़ विश्वास चाहिए।

निष्कर्ष

अंततः, भू-राजनीतिक मुद्दे और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती स्थिति ने इसे कनाडा के लिए एक आदर्श और आवश्यक साझेदार बना दिया है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा ने समग्र आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर चर्चाओं को पुनर्जीवित किया है और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों को उजागर किया है।

भारत–कनाडा के नए सिरे से बढ़ते संबंधों के महत्व पर चर्चा कीजिए। साथ ही यह भी बताइए कि इन अवसरों को साकार करने में कौन-सी चुनौतियाँ प्रभाव डाल सकती हैं।

 (15 अंक, 250 शब्द)

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