संदर्भ:
डिजिटल शासन, नियामकीय सरलीकरण तथा विश्वास-आधारित प्रशासन के माध्यम से भारत एक सुविधा-प्रधान व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र की ओर अग्रसर हुआ है, जिससे व्यापार सुगमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
व्यवसाय करने की सुगमता (EoDB) क्या है?
- व्यवसाय करने की सुगमता (EoDB) यह मापती है कि किसी देश में व्यवसाय को शुरू करना, संचालित करना, विस्तार करना तथा कानूनी एवं प्रशासनिक सहायता प्राप्त करना कितना आसान है। इसके लिए नियमों, लागत, समय-आवश्यकताओं तथा अनुपालन बोझ जैसे कारकों का मूल्यांकन किया जाता है।
महत्व
- अर्थशास्त्री एडम स्मिथ के अनुसार आर्थिक विकास के लिए निम्नलिखित आवश्यक हैं:
- शांति
- सरल कराधान
- कुशल न्याय व्यवस्था
EoDB के संकेतक
- प्रमुख स्तंभ:
- व्यवसाय शुरू करना
- परमिट प्राप्त करना
- ऋण तक पहुँच
- संपत्ति पंजीकरण
- कर प्रणाली
- अनुबंध प्रवर्तन
भारत की प्रगति
- भारत की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ:
- 2014: 142वाँ स्थान
- 2019: 63वाँ स्थान
हालाँकि, विश्व बैंक ने डेटा संबंधी चिंताओं के कारण वर्ष 2021 के बाद ‘डूइंग बिज़नेस इंडेक्स’ (Doing Business Index) को बंद कर दिया।
इसके स्थान पर ‘बिज़नेस रेडी (Business Ready – B-READY)’ नामक एक नया ढाँचा प्रस्तुत किया गया।
व्यवसाय करने की सुगमता (EoDB) सुधारने हेतु सरकारी पहल
1. स्टार्टअप इंडिया
- वर्ष 2016 में शुरू की गई ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल का उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना तथा रोजगार खोजने वालों को रोजगार सृजक में परिवर्तित करना है।
- यह निम्नलिखित माध्यमों से स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करती है:
- प्रारंभिक चरण के व्यवसायों हेतु सीड फंडिंग
- वित्तीय सहायता हेतु फंड ऑफ फंड्स
- ऋण तक पहुँच बढ़ाने के लिए क्रेडिट गारंटी योजनाएँ
2. SPICe+ पोर्टल
- SPICe+ पोर्टल एकल डिजिटल मंच के माध्यम से अनेक सेवाएँ उपलब्ध कराकर कंपनी स्थापित करने की प्रक्रिया को सरल बनाता है।
- यह निम्नलिखित सुविधाएँ प्रदान करता है:
- कंपनी पंजीकरण
- PAN एवं TAN निर्माण
- EPFO पंजीकरण
3. उद्यम पंजीकरण
- उद्यम पंजीकरण सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के पंजीकरण के लिए एक सरल एवं कागजरहित प्रक्रिया प्रदान करता है।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- आसान पंजीकरण प्रक्रिया
- कागजरहित अनुपालन
- स्व-घोषणा आधारित प्रणाली
4. डिजिटल शासन
- डिजिटल शासन संबंधी पहलों ने निम्नलिखित प्लेटफॉर्मों के माध्यम से प्रक्रियागत विलंब को कम किया है तथा पारदर्शिता में सुधार किया है:
- गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM)
- डिजिटल भूमि अभिलेख
- MCA की डिजिटल प्रणालियाँ
- ऑनलाइन स्वीकृति तंत्र
व्यवसाय करने की सुगमता (EoDB) से संबंधित चुनौतियाँ
1. अनुबंध प्रवर्तन की चुनौतियाँ:
- न्यायालयों में मामलों का भारी लंबित बोझ: बड़ी संख्या में लंबित मामलों के कारण विवादों के निपटारे में देरी होती है।
- न्याय वितरण में विलंब: लंबी कानूनी प्रक्रियाएँ निवेशकों के विश्वास तथा व्यावसायिक निश्चितता को कम करती हैं।
2. नियामकीय जटिलता:
- अनेक नियम एवं विनियम: व्यवसायों को विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नियमों और विनियमों का सामना करना पड़ता है।
- श्रम कानूनों में भिन्नता: विभिन्न राज्यों के अलग-अलग श्रम नियमों और विनियमों के कारण अनुपालन का बोझ बढ़ जाता है।
- भूमि और अनुपालन संबंधी आवश्यकताएँ: जटिल प्रक्रियाएँ कंपनियों के लिए कठिनाइयाँ उत्पन्न करती हैं।
3. भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याएँ:
- स्वामित्व विवाद: अस्पष्ट भूमि अभिलेख अक्सर कानूनी विवादों को जन्म देते हैं।
- धीमी अधिग्रहण प्रक्रिया: स्वीकृतियों में देरी औद्योगिक परियोजनाओं एवं निवेश को प्रभावित करती है।
4. उच्च लॉजिस्टिक्स लागत:
- अधिक परिवहन व्यय: भारत में लॉजिस्टिक्स लागत GDP का लगभग 13–14% है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह लगभग 7–8% होती है।
- अवसंरचनात्मक अंतराल: अकुशल आपूर्ति श्रृंखलाएँ व्यवसाय संचालन की लागत को बढ़ाती हैं।
5. MSME क्षेत्र में विद्यमान चुनौतियाँ:
- सीमित डिजिटल साक्षरता: कई छोटे व्यवसाय डिजिटल उपकरणों को अपनाने में कठिनाई का सामना करते हैं।
- ऋण प्राप्ति में कठिनाई: MSMEs को सस्ती वित्तीय सहायता प्राप्त करने में समस्याएँ आती हैं।
- कम जागरूकता: डिजिटल प्लेटफॉर्म और सरकारी सहायता योजनाओं की सीमित जानकारी विकास को प्रभावित करती है।
आगे की राह
- विनियमों का सामंजस्य स्थापित करना: राज्यों के बीच एकसमान और सरल नियमों का निर्माण करना।
- राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना: राज्य-स्तरीय प्रदर्शन रैंकिंग और नवाचार के माध्यम से सुधारों को बढ़ावा देना।
- न्यायिक सुधार: त्वरित विवाद समाधान: कुशल न्यायालयों और बेहतर न्यायिक क्षमता के माध्यम से देरी को कम करना।
- मध्यस्थता और सुलह को बढ़ावा देना: शीघ्र निपटान के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्रों को प्रोत्साहित करना।
- सरकारी पोर्टलों का एकीकरण: अनुमोदन, पंजीकरण और अनुपालन के लिए निर्बाध (सहज) डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का निर्माण करना।
- कागजी कार्यवाही कम करना: पारदर्शी और कुशल ऑनलाइन शासन को बढ़ावा देना।
- राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति को लागू करना: लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना तथा आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता में सुधार करना।
- पीएम गति शक्ति: बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की एकीकृत योजना और बेहतर कनेक्टिविटी को सक्षम बनाता है।
- छोटे अपराधों का गैर-आपराधिकरण: छोटे अनुपालन संबंधी गलतियों पर आपराधिक दंड के बजाय वित्तीय जुर्माना लगाया जाना चाहिए।
- व्यापारिक विश्वास को बढ़ावा देना: नियंत्रण-आधारित विनियमन से सुविधा-आधारित और विश्वास-आधारित शासन की ओर स्थानांतरित होना।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न: डिजिटल शासन और वैश्विक रैंकिंग में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद, भारत में व्यवसाय करने की सुगमता ढाँचा अभी भी अनुबंध प्रवर्तन और भूमि अधिग्रहण से संबंधित संरचनात्मक बाधाओं से प्रभावित है। समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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