संदर्भ
बार-बार ICU में आग लगने की घटनाएँ, जैसे SCB मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में, अग्नि सुरक्षा परीक्षण होने के बावजूद प्रणालीगत कमियों को उजागर करती हैं।
- ऑक्सीजन-समृद्ध वातावरण, खराब विद्युत प्रणाली और कर्मचारियों की अपर्याप्त तैयारी ऐसे जोखिमों को घातक आपदाओं में बदल देती है, जो रोकी जा सकती थीं। यह कमजोर अनुपालन और जवाबदेही को दर्शाता है।
पूर्व की घटनाएँ जो एक पैटर्न को दर्शाती हैं
- भुवनेश्वर (2016): अनिवार्य अग्नि निकासी के अभाव वाले एक निजी अस्पताल के ICU में 22 लोगों की मृत्यु।
- राजस्थान (2023): ICU में आग से 6 मरीजों की मृत्यु।
- झांसी, उत्तर प्रदेश (2024): ICU में आग से नवजात शिशुओं की मौत।
- महाराष्ट्र (2021): ICU में आग की दो समान घटनाएँ रिपोर्ट की गईं।
- सुरक्षा ऑडिट और वित्तीय आवंटन के बावजूद दुर्घटनाएँ जारी हैं, जो खराब क्रियान्वयन को दर्शाती हैं।
ICU में आग लगने के कारण
- विद्युत जोखिम: खराब और ओवरलोडेड विद्युत प्रणाली प्रमुख कारण है।
- शॉर्ट सर्किट और लोड व सर्किट क्षमता में असंतुलन से ओवरहीटिंग और आग लगती है।
- खुली वायरिंग और खराब अर्थिंग से विद्युत दोषों का जोखिम बढ़ जाता है।
- आधुनिक उपकरणों से उत्पन्न हार्मोनिक करंट से धीमी ओवरहीटिंग होती है, जिसे सर्किट ब्रेकर नहीं रोक पाते।
- बुनियादी ढाँचे की कमी: अस्पताल आधुनिक उपकरणों के लिए संरचनात्मक रूप से तैयार नहीं हैं।
- पुराने विद्युत सिस्टम बढ़ती ऊर्जा मांग को नियंत्रित नहीं कर पाते।
- वेंटिलेटर जैसे नए उपकरण बिना लोड क्षमता को जाँचे स्थापित किए जाते हैं।
- ICU से जुड़े विशेष जोखिम: ICU स्वाभाविक रूप से उच्च जोखिम वाला क्षेत्र होते है।
- ऑक्सीजन-समृद्ध वातावरण में छोटी चिंगारी भी खतरनाक होती है।
- मशीनों की अधिक संख्या से विद्युत भार (stress) बढ़ जाता है।
- संचालन संबंधी विफलताएँ: मानवीय और प्रक्रियात्मक त्रुटियाँ स्थिति को और खराब कर देती हैं।
- अग्निशमन दल को सूचना देने में देरी से प्रतिक्रिया भी देर से होती है।
- कर्मचारियों को अक्सर हाइड्रेंट जैसे अग्नि सुरक्षा प्रणालियों के उपयोग का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है।
- विद्युत आग के लिए कार्बन डाइऑक्साइड के बजाय जल का गलत उपयोग किया जाता है।
- मरीजों की संवेदनशीलता: ICU के मरीज अत्यधिक निर्भर होते हैं और भाग नहीं सकते, क्योंकि अधिकांश मरीज बेहोश (Sedated), इंट्यूबेटेड और मशीनों से जुड़े होते हैं, जिससे निकासी कठिन हो जाती है और मृत्यु दर बढ़ जाती है।
- प्रणालीगत समस्याएँ: शासन संबंधी विफलताएँ लापरवाही के एक चक्र को बनाए रखती हैं, जहाँ अग्नि सुरक्षा केवल एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाती है, और ऑडिट जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं होते, जिसके परिणामस्वरूप बिना किसी सार्थक सुधारात्मक कार्रवाई के वही गलतियाँ बार-बार दोहराई जाती हैं।
आगे की राह
- तकनीकी सुधार: पुराने हो चुके अस्पताल के बुनियादी ढाँचे का उन्नयन, हार्मोनिक करंट को नियंत्रित करने वाली प्रणालियों की स्थापना, तथा विद्युत आग के लिए विशेष रूप से उपयुक्त अग्निशमन तंत्रों को अपनाना।
- प्रशासनिक सुधार: तैयारी और प्रभावी आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए नियमित स्टाफ प्रशिक्षण और समय-समय पर मॉक ड्रिल्स को संस्थागत बनाना।
- जवाबदेही और अनुपालन: अग्नि सुरक्षा मानकों का सख्त प्रवर्तन, साथ ही जिम्मेदारी का स्पष्ट निर्धारण, जिसमें लापरवाही के लिए आपराधिक दायित्व भी शामिल हो, ताकि निवारण और अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
निष्कर्ष
ICU में आग की घटनाएँ काफी हद तक रोकी जा सकती हैं। इसके लिए केवल औपचारिक अनुपालन से आगे बढ़कर कड़ी जवाबदेही, बेहतर बुनियादी ढाँचा और प्रशिक्षित आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की आवश्यकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: भारत में अस्पतालों की अग्नि सुरक्षा प्रणालीगत प्रशासनिक विफलताओं को दर्शाती है। अस्पतालों में बार-बार होने वाली आग की घटनाओं के कारणों का परीक्षण कीजिए तथा मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय सुझाइए।
(10 अंक, 150 शब्द)
|