स्वास्थ्य प्राथमिकताएँ: पोषण के साथ कृषि का समन्वय

स्वास्थ्य प्राथमिकताएँ: पोषण के साथ कृषि का समन्वय 23 May 2026

संदर्भ:

भारत का वर्ष 2047 तक विकसित भारत (Viksit Bharat) बनने का लक्ष्य केवल GDP वृद्धि पर निर्भर नहीं करता, बल्कि एक स्वस्थ और उत्पादक कार्यबल पर भी आधारित है। पोषण स्वास्थ्य, उत्पादकता और दीर्घकालिक मानव पूँजी निर्माण का केंद्रीय आधार है।

पोषण का महत्व

  • पोषण और उत्पादकता: खराब पोषण शारीरिक और मानसिक उत्पादकता को कम करता है। यदि कार्यबल अस्वस्थ होगा, तो भारत के विकास लक्ष्य प्रभावित होंगे।
  • जीवन-चक्र दृष्टिकोण : पोषण व्यक्ति के पूरे जीवन को प्रभावित करता है। अच्छी पोषण स्थिति वाली बालिका के स्वस्थ किशोरी, स्वस्थ माँ और समाज में योगदान देने वाली नागरिक बनने की संभावना अधिक होती है। मातृ पोषण भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।
  • अमर्त्य सेन का विचार: स्वास्थ्य और शिक्षा आर्थिक विकास के मूलभूत इंजन हैं। इसलिए भारत को पोषण को मानव पूँजी में निवेश के रूप में देखना चाहिए।

एपिजेनेटिक्स (Epigenetics) और पीढ़ीगत स्वास्थ्य

  • एपीजेनेटिक्स से तात्पर्य है कि पोषण सहित पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारक, जीन अभिव्यक्ति को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।
  • यदि गर्भवती महिला को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता है, तो बच्चा भविष्य में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है। इस प्रकार, आज के खाद्य विकल्प भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य को आकार दे सकते हैं।

भारत में बदलती पोषण संबंधी चुनौतियाँ

  • पिछली चुनौती: कुपोषण: 1947 से 2000 तक, भारत ने मुख्य रूप से महिलाओं और बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी पर ध्यान केंद्रित किया।
  • वर्तमान चुनौती: मोटापा और गैर-संक्रामक रोग (NCDs)
    • शहरी भारत अब बढ़ते मोटापे, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी रोगों का सामना कर रहा है। मोटापा केवल अधिक खाने के कारण नहीं होता, बल्कि खराब गुणवत्ता वाले भोजन के कारण भी हो सकता है।
    • गरीब लोग भी मोटापे का शिकार हो सकते हैं क्योंकि मेवे, बीज, मछली, फल और रेशे (फाइबर) से भरपूर आहार जैसे स्वस्थ खाद्य पदार्थ अक्सर महंगे होते हैं।

स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाएँ

  • विसरल एडिपोसिटी (Visceral Adiposity): यह आंतरिक अंगों के आसपास जमा पेट की चर्बी को संदर्भित करता है। यह सामान्य चर्बी की तुलना में अधिक खतरनाक होती है क्योंकि यह मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और चयापचय संबंधी विकारों के जोखिम को बढ़ावा देता है।
  • गट माइक्रोबायोम (Gut Microbiome): आंत में खरबों बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जिन्हें माइक्रोबायोम कहा जाता है। ये बैक्टीरिया चयापचय (Metabolism), प्रतिरक्षा (Immunity), विटामिन उत्पादन और गट-ब्रेन कनेक्शन के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य को भी नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
    • आहार फाइबर पेट के बैक्टीरिया के लिए ज़रूरी है। लेकिन मैदा जैसे रिफाइंड खाद्य पदार्थों पर आधारित आधुनिक आहार फाइबर का सेवन कम कर देते हैं, जिससे पेट के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचता है।

कृषि और पोषण का संबंध

  • चावल-गेहूँ एकल कृषि की समस्या: MSP और सरकारी खरीद प्रोत्साहनों के कारण किसान अक्सर मुख्यतः चावल और गेहूँ पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं। इससे फसल विविधता कम होती है और परिणामस्वरूप आहार विविधता भी घट जाती है।
  • बायोफोर्टिफिकेशन (Biofortification): बायोफोर्टिफिकेशन का अर्थ है बीज या आनुवंशिक स्तर पर फसलों के पोषण मूल्य को बढ़ाना, ताकि फसल में प्राकृतिक रूप से अधिक पोषक तत्व मौजूद हों।
    • उदाहरण:
      • आयरन युक्त बाजरा
      • जिंक युक्त गेहूँ
      • विटामिन A युक्त गाजर
  • खाद्य फोर्टिफिकेशन (Food Fortification): खाद्य फोर्टिफिकेशन का अर्थ है प्रसंस्करण (processing) के दौरान खाद्य पदार्थों में बाहरी रूप से विटामिन या खनिज मिलाना।
    • उदाहरण:
      • नमक में आयोडीन
      • खाद्य तेल में विटामिन A
      • खाद्य उत्पादों में आयरन और फोलिक एसिड
  • फसलों की पोषण गुणवत्ता में गिरावट: फसलों का पोषण निम्नलिखित कारणों से प्रभावित होता है:
    • खराब मृदा स्वास्थ्य
    • दूषित या अपर्याप्त जल
    • खराब बीज गुणवत्ता
    • जलवायु परिवर्तन और बढ़ता CO₂ स्तर

SEHAT पहल

  • सेहत (SEHAT) से आशय है; ‘साइंस एक्सीलेंस फॉर हेल्थ थ्रू एग्रीकल्चरल ट्रांसफॉर्मेशन’ (कृषि परिवर्तन के ज़रिए स्वास्थ्य के लिए वैज्ञानिक उत्कृष्टता)’।
  • यह भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य कृषि को स्वास्थ्य परिणामों के साथ जोड़ना है।
  • पाँच प्रमुख कार्य-क्षेत्र
    • बायोफोर्टिफिकेशन
    • एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming Systems)
    • गैर-संचारी रोगों के लिए कृषि-पोषण
    • वन हेल्थ (One Health) दृष्टिकोण
    • किसानों का स्वास्थ्य

 सिद्धांत   अर्थ 
 हित भोजन ऐसा भोजन करें जो शरीर के लिए लाभकारी हो
 मित भोजन उचित मात्रा में भोजन करें
 ऋतु भोजन  मौसम के अनुसार भोजन करें

  • वन हेल्थ दृष्टिकोण (One Health Approach): वन हेल्थ दृष्टिकोण यह मानता है कि मनुष्यों, पशुओं और पर्यावरण का स्वास्थ्य आपस में जुड़ा हुआ है। यदि पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य की अनदेखी की जाए, तो मानव स्वास्थ्य की रक्षा नहीं की जा सकती।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: भारत में कुपोषण और गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बढ़ते दोहरे बोझ से निपटने के लिए ‘ऊर्जा सुरक्षा’ (Energy Security) से ‘पोषण सुरक्षा’ (Nutritional Security) की ओर बदलाव आवश्यक है। इस संदर्भ में बायोफोर्टिफिकेशन तथा SEHAT जैसी बहु-क्षेत्रीय पहलों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

 (15 अंक, 250 शब्द)

स्वास्थ्य प्राथमिकताएँ: पोषण के साथ कृषि का समन्वय

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