संदर्भ:
नीति आयोग द्वारा “Ease of Doing R&D” रिपोर्ट जारी की गई है, जिसका उद्देश्य यह समझना है कि भारत का नवाचार क्षेत्र वैश्विक समकक्ष देशों की तुलना में पीछे क्यों है।
सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD)
- GERD (सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय) GDP के प्रतिशत के रूप में अनुसंधान एवं विकास पर कुल व्यय को मापता है।
वर्तमान स्थिति (GERD)
- भारत का सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) GDP के 0.6% से 0.7% के बीच स्थिर बना हुआ है। इसके विपरीत, दक्षिण कोरिया 5.3%, अमेरिका 3.4% और चीन 2.6% व्यय करते हैं।
- निजी क्षेत्र की कमी (Private Sector Gap): अमेरिका में R&D व्यय का लगभग 70% निजी क्षेत्र द्वारा किया जाता है, जबकि भारत में 70% व्यय सरकार द्वारा किया जाता है। निजी कंपनियाँ R&D को जोखिमपूर्ण मानती हैं क्योंकि इसमें अत्यधिक समय लगता है, और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) कमजोर होता हैं।
प्रणालीगत समस्याएँ
- वित्तपोषण में असंतुलन (Funding Imbalance): IIT जैसे प्रमुख संस्थानों में विश्वस्तरीय प्रयोगशालाएँ हैं, जबकि राज्य विश्वविद्यालयों में अक्सर बुनियादी उपकरणों का भी अभाव होता है।
- “वैली ऑफ डेथ” (Valley of Death): कई विचार प्रयोगशाला में ही समाप्त हो जाते हैं क्योंकि अनुसंधान और बाजार में उपलब्ध उत्पादों के बीच बड़ा अंतर होता है। इस अंतर को पाटने के लिए सक्षम तकनीकी हस्तांतरण अधिकारियों (Technology Transfer Officers) की कमी होती है।
- विभागीय अलगाव (Silos): DST और CSIR जैसे विभिन्न विभाग अक्सर एक ही विषय पर अलग-अलग शोध करते हैं, लेकिन डेटा साझा नहीं करते, जिससे संसाधनों की पुनरावृत्ति होती है।
- निजी क्षेत्र की कम भागीदारी : विकसित अर्थव्यवस्थाओं के विपरीत, जहाँ निजी कंपनियाँ R&D को बढ़ावा देती हैं, भारत में अनुसंधान व्यय मुख्यतः सरकार के वित्त पोषण पर निर्भर करता है।
- असमान वित्तीय वितरण : IIT जैसे प्रमुख संस्थानों को पर्याप्त धन प्राप्त होता है, जबकि कई राज्य विश्वविद्यालयों में बुनियादी शोध अवसंरचना का भी अभाव होता है।
परिणाम
- ब्रेन ड्रेन: कमजोर शोध पारिस्थितिकी तंत्र प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों को विदेश जाने के लिए प्रेरित करता है।
- आयात पर निर्भरता : भारत सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वास्थ्य सेवा और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी तकनीक पर निर्भर बना हुआ है।
नीति आयोग द्वारा सुझाए गए उपाय
- R&D व्यय में वृद्धि: भारत को सतत नवाचार-आधारित विकास के लिए GERD को लगभग GDP के 2% तक बढ़ाना चाहिए।
- ROPE रणनीति : ROPE का अर्थ है बाधाओं को हटाना और सहायक तत्वों को बढ़ावा देना (Removing Obstacles and Promoting Enablers), जिसका उद्देश्य अनुसंधान कार्य को संचालित करने में सुगमता स्थापित करना है।
- अनुदान प्रणाली का सरलीकरण: सिंगल-विंडो स्वीकृति और सरल बैंकिंग प्रक्रियाएँ अपनाकर देरी को कम किया जाना चाहिए।
- राज्य विश्वविद्यालयों को सुदृढ़ बनाना: राज्य संस्थानों में शिक्षकों की रिक्तियों और अवसंरचना की कमी को तुरंत दूर किया जाना चाहिए।
- उद्योग-शिक्षा सहयोग में सुधार: विश्वविद्यालयों और उद्योगों को मिलकर शोध प्राथमिकताओं और व्यावसायीकरण के अवसरों की पहचान करनी चाहिए।
- तकनीकी हस्तांतरण कार्यालयों का निर्माण: अनुसंधान को बाजार-तैयार उत्पादों में परिवर्तित करने के लिए समर्पित संस्थानों की आवश्यकता है।
- R&D के लिए CSR फंड का उपयोग: कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड का उपयोग नवाचार और जमीनी स्तर की शोध पहलों को समर्थन देने के लिए किया जा सकता है।
- वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन: सरकार समर्थित एकीकृत प्रणाली के माध्यम से शोध पत्रिकाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित की जा सकती है, जिससे विभिन्न संस्थानों में वैज्ञानिक ज्ञान का लोकतंत्रीकरण संभव होगा।
निष्कर्ष
- आज भारत की विकास संबंधी चुनौतियाँ आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। कमजोर होती मुद्रा व्यापक आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती है, कमजोर पोषण प्रणाली मानव पूँजी को कमजोर करती है, और अपर्याप्त R&D निवेश नवाचार एवं प्रतिस्पर्धात्मकता को सीमित करता है।
- इन समस्याओं के समाधान के लिए सुदृढ़ आर्थिक प्रबंधन, पोषण-संवेदनशील कृषि और मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का संयोजन आवश्यक है।
- भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संस्थागत क्षमता को मजबूत करना होगा, मानव विकास में निवेश करना होगा तथा सतत और अनुसंधान-आधारित विकास को बढ़ावा देना होगा।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बनने की भारत की आकांक्षाओं के बावजूद, सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) अत्यंत निम्न बना हुआ है। भारत के R&D पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद संरचनात्मक एवं नौकरशाही बाधाओं की पहचान कीजिए तथा उन्हें दूर करने हेतु नीति आयोग द्वारा प्रस्तावित ROPE रणनीति का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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