संदर्भ
संयुक्त राज्य अमेरिका–इज़राइल–ईरान संघर्ष उस समय और तीव्र हो गया जब संयुक्त अमेरिकी–इज़राइली हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत की पुष्टि हुई। इन हवाई हमलों में वरिष्ठ IRGC(Islamic Revolutionary Guard Corps) नेताओं और रक्षा अधिकारियों की भी हत्या हुई, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और संघर्ष में वृद्धि हुई।
बहाना और विफल कूटनीति
- युद्ध-विरोधी प्रतिबद्धता का विरोधाभास: युद्धों के विरुद्ध विभिन्न अभियानों के बावजूद, पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य विस्तार गहरे रणनीतिक उलझाव को दर्शाता है।
- अमेरिका ईरानियों की स्वतंत्रता के लिए लड़ने का दावा करता है, जबकि राज्यविहीन फ़िलिस्तीनियों के निरंतर उत्पीड़न की अनदेखी करता है और अन्य कई तानाशाही शासन से संबंध बनाए रखता है।
- पूर्व-निवारक औचित्य पर प्रश्न: ईरान के आसन्न हमले के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्रमाणों की अनुपस्थिति अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत प्रत्याशित आत्मरक्षा (Anticipatory Self-Defence) के दावे को कमजोर करती है।
- कूटनीतिक झटका: ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताएँ कथित रूप से सफलता के करीब थीं। इससे संकेत मिलता है कि सैन्य कार्रवाई ने संभावित कूटनीतिक सफलता को बाधित कर दिया, जैसा कि वर्ष 2018 में अमेरिकी वापसी के बाद वर्ष 2015 के परमाणु समझौते के विघटन में देखा गया था।
सैन्य गतिशीलता और क्षेत्रीय विस्तार
- वायु रक्षा का अभाव: ईरान के पास S-400 जैसी उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों का अभाव है, जिससे अमेरिका और इज़राइल को वायु वर्चस्व स्थापित करने तथा प्रथम हमले में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने में आसानी हुई।
- ईरान की प्रतिकारात्मक कार्रवाई: प्रतिक्रिया स्वरूप, ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, कुवैत, बहरीन और क़तर सहित पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले शुरू कर दिए हैं, साथ ही इज़राइल पर मिसाइलें भी दागी हैं।
- मानवीय प्रभाव: संघर्ष में नागरिक हताहत हुए हैं, जिनमें एक ईरानी विद्यालय पर हुए हमले में 150 छात्रों की मृत्यु शामिल है।
वैश्विक और आर्थिक प्रभाव
- हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर खतरा: एक गंभीर चिंता यह है कि ईरान हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण संकीर्ण मार्ग है। इससे क्षेत्रीय विस्तार और वैश्विक तेल आपूर्ति में व्यवधान की आशंका बढ़ जाती है।
- यदि जलडमरूमध्य बंद होता है, तो वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आएगा।
- नियम-आधारित व्यवस्था का क्षरण: व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति के बिना एकतरफा सैन्य कार्रवाई वैश्विक मानदंडों और बहुपक्षीय संघर्ष-समाधान तंत्र के कमजोर होने की चिंता बढ़ाती है।
- क्षेत्रीय अस्थिरता: यह संघर्ष खाड़ी देशों और प्रमुख शक्तियों को इसमें खींच सकता है, जिससे व्यापक क्षेत्रीय टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
भारत के लिए रणनीतिक निहितार्थ
- ऊर्जा सुरक्षा: हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी भी व्यवधान से भारत के कच्चे तेल आयात और ऊर्जा स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
- प्रवासी भारतीयों की चिंता: खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय सुरक्षा और निकासी की चुनौतियों का सामना कर सकता है।
- रणनीतिक स्वायत्तता: भारत को अपनी राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए अमेरिका, इज़राइल और ईरान के साथ अपने संबंधों को सावधानी से संतुलित करना चाहिए।
- समष्टि आर्थिक प्रभाव: तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति, राजकोषीय दबाव और चालू खाते के घाटे को बढ़ा सकती हैं।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बारे में:
- भौगोलिक विस्तार: यह एक ओर ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तथा दूसरी ओर ईरान के बीच स्थित है।
- यह फारस की खाड़ी को उत्तर में ओमान की खाड़ी से और दक्षिण में अरब सागर से जोड़ता है।
- बफर ज़ोन (संरक्षण क्षेत्र): अपने सबसे संकरे स्थान पर यह केवल 33 किलोमीटर चौड़ा है। इसके निर्धारित नौवहन मार्ग (शिपिंग लेन) प्रत्येक दिशा में लगभग 3 किलोमीटर चौड़े हैं, जिन्हें एक बफर ज़ोन द्वारा अलग किया गया है।
- कानूनी स्थिति और समुद्री विनियमन: संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत, तटीय राज्य अपने तट से 12 समुद्री मील (लगभग 22 किमी) तक संप्रभुता का अधिकार रखते हैं।
- इसके सबसे संकीर्ण बिंदु पर, होरमुज़ जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल के अंतर्गत स्थित है।

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विद्वतापूर्ण दृष्टिकोण
- चयन का युद्ध (War of Choice): यथार्थवादी विचारक जॉन मीयरशाइमर इसे “आवश्यकता का युद्ध” (War of Necessity) नहीं, बल्कि “चयन का युद्ध” (War of Choice) कहा हैं, जिसका उद्देश्य केवल एक क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी को समाप्त कर अमेरिकी और इज़राइली हितों की रक्षा करना है।
- शक्ति संतुलन की गतिशीलता: इस स्थिति की तुलना थ्यूसीडाइड्स (Thucydides) के कथन से की जाती है कि “शक्तिशाली वही करते हैं जो वे कर सकते हैं और कमजोर वही सहते हैं जो उन्हें सहना पड़ता है।”
निष्कर्ष
क्षेत्रीय अस्थिरता को रोकने और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता तथा संयुक्त राष्ट्र जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं की प्रभावशीलता को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल तनाव कम करना और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: प्रमुख शक्तियों द्वारा एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों का पुनरुत्थान नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक मौलिक चुनौती प्रस्तुत करता है। हाल के अमेरिका–इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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