संदर्भ:
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और चीन+1 रणनीति के बीच, भारत–न्यूज़ीलैंड FTA आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करता है।
रणनीतिक महत्व
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव: COVID-19 और भू-राजनीतिक तनावों (जैसे रूस-यूक्रेन, पश्चिम एशिया) जैसे व्यवधानों के कारण, देश अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं।
- चीन +1 रणनीति: न्यूज़ीलैंड और अन्य “ग्लोबल नॉर्थ (Global North)” देश चीन पर अपनी पूरी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
- भारत की विदेश नीति: भारत के लिए, यह सहभागिता उसकी एक्ट ईस्ट नीति और न्यूज़ीलैंड जैसे स्थिर, लोकतांत्रिक देशों के साथ साझेदारी के माध्यम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लक्ष्य के साथ मेल खाती है।
- प्रवासी भारतीयों की भूमिका: न्यूज़ीलैंड में 3,00,000 से अधिक भारतीय निवास करते हैं, जो उनकी कुल आबादी का 5% से अधिक हैं, जो एक मजबूत सांस्कृतिक और आर्थिक सेतु का कार्य करता है।
रणनीतिक पूरकता: पैमाना बनाम विशेषज्ञता
यह साझेदारी “रणनीतिक परस्परपूरकता” (Strategic Complementarity) की अवधारणा पर आधारित है, जहाँ प्रत्येक राष्ट्र की ताकतें दूसरे राष्ट्र की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं:
- भारत की शक्ति (पैमाना): भारत 1.4 बिलियन लोगों के विशाल बाज़ार के साथ मध्यवर्गीय वर्ग के विस्तार और वित्त, स्वास्थ्य, और सेवाओं के बढ़ते क्षेत्रों की पेशकश करता है।
- न्यूज़ीलैंड की शक्ति (विशेषज्ञता): न्यूज़ीलैंड उच्च-तकनीकी कृषि, डेयरी, सटीक कृषि, सतत वानिकी और विशेष निर्माण में विश्वस्तरीय विशेषज्ञता प्रदान करता है।
व्यापार समझौते की प्रमुख विशेषताएँ
- संरक्षणात्मक और आक्रामक हित: भारत ने डेयरी, पशु उत्पाद, सब्जियाँ, चीनी और शहद जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को शुल्क-मुक्त सूची से बाहर रखा है ताकि घरेलू किसानों (जैसे अमूल जैसी कंपनियाँ) की सुरक्षा की जा सके।
- शुल्क में कटौती: न्यूज़ीलैंड ने भारतीय निर्यात जैसे वस्त्र, चमड़ा और जूते पर 100% शुल्क हटा दिया है। इसके बदले में, भारत ने न्यूज़ीलैंड से आने वाले लगभग 70.03% आयात पर शुल्क घटा दिया है, जबकि संवेदनशील घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए लगभग 29.97% को बाहर रखा है।
- निवेश: न्यूज़ीलैंड की कंपनियाँ अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर का निवेश करेंगी, जिससे पूँजी के साथ-साथ तकनीक और मानव संसाधन प्रशिक्षण भी प्राप्त होगा।
क्षेत्र-विशिष्ट लाभ
- कृषि और कोल्ड चेन: कम संसाधन में अधिक उत्पादन करने वाली सतत कृषि और कोल्ड स्टोरेज तकनीक में न्यूज़ीलैंड की विशेषज्ञता भारत को फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकती है, जो वर्त्तमान में लगभग 30% है।
- लोगों का आवागमन (विशेष वीज़ा व्यवस्था): यह सौदे का एक अनूठा हिस्सा है जो प्रतिभा के आदान-प्रदान को संस्थागत रूप देता है। इसमें शामिल हैं:
- कुशल कार्यकर्ता: IT इंजीनियर, स्वास्थ्य सेवा पेशेवर, यहाँ तक कि आयुष चिकित्सक, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षक को भी कुशल कार्यकर्ताओं के रूप में मान्यता प्राप्त हैं।
- छात्र: STEM क्षेत्र के छात्र 3 वर्षों तक रह सकते हैं, और पीएचडी धारक 4 वर्षों तक, जिनके पास प्रति सप्ताह 20 घंटे काम करने का अधिकार होता है।
- फार्मास्यूटिकल्स: भारतीय जेनेरिक दवाओं को न्यूज़ीलैंड में तेज़ स्वीकृति प्रक्रिया मिलेगी।
- बौद्धिक संपदा (IPR): इस सौदे में अद्वितीय उत्पादों की रक्षा के लिए भौगोलिक संकेत (GI) टैग का उपयोग करने पर जोर दिया गया है, जिससे दार्जिलिंग चाय और बासमती चावल जैसे उत्पादों को लाभ होता है।
भू-राजनीतिक संरेखण
- इस समझौते से यह संदेश जाता है कि यह साझेदारी साझा लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित है।
- यह भारत की दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में स्थिति को मजबूत करता है और एक अधिक लचीली आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करता है, जो किसी एक देश से होने वाले व्यवधानों के प्रति कम संवेदनशील होती है।
निष्कर्ष
- भारत–न्यूज़ीलैंड FTA पारंपरिक व्यापार की सीमाओं को पार कर आर्थिक विकास को भू-राजनीतिक स्थिरता के साथ जोड़ता है।
- जहाँ भारत ने अपने संवेदनशील डेयरी क्षेत्र की सावधानीपूर्वक रक्षा की है, वहीं यह समझौता कृषि, निवेश और पेशेवर गतिशीलता में तकनीकी आदान-प्रदान के लिए विभिन्न अवसर निर्मित करते है।
- यह 21वीं सदी के अनुरूप एक समग्र दृष्टिकोण है, जो वस्तुओं के आदान-प्रदान से आगे बढ़कर ज्ञान, सेवाओं और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित संबंध स्थापित करता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न: हाल ही में हुआ भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) केवल आर्थिक पूरकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक गहरे भू-राजनीतिक संरेखण को भी दर्शाता है। विश्लेषण कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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