संदर्भ
भारत–यूनाइटेड किंगडम मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई, 2026 से प्रभावी हो गया। यह दोनों देशों के मध्य आर्थिक संबंधों में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। इस समझौते का उद्देश्य शुल्क में कमी, बाज़ार तक बेहतर पहुँच तथा वस्तुओं, सेवाओं और पेशेवरों के आवागमन को सुगम बनाकर व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि करना है।
मुक्त व्यापार समझौता क्या है?
- मुक्त व्यापार समझौता दो या दो से अधिक देशों के मध्य किया जाने वाला ऐसा समझौता है, जिसके अंतर्गत आयात-निर्यात पर लगाए जाने वाले शुल्क, मात्रात्मक प्रतिबंध तथा अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या समाप्त किया जाता है।
- इस प्रकार के समझौते व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, आर्थिक सहयोग तथा रोजगार सृजन को बढ़ावा देते हैं और बाज़ार तक पहुँच को आसान बनाते हैं।
भारत–यूनाइटेड किंगडम मुक्त व्यापार समझौते के उद्देश्य
- वर्ष 2030 से पहले द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 56 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाना।
- यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं की पहुँच का विस्तार करना।
- निवेश, नवाचार तथा आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहित करना।
- भारत और यूनाइटेड किंगडम के व्यापक सामरिक साझेदारी संबंधों को और सुदृढ़ बनाना।
भारत के लिए प्रमुख लाभ
- भारतीय निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुँच
- भारत की लगभग 99 प्रतिशत निर्यात वस्तुओं को यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा।
- शुल्क समाप्त होने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढ़ावा
- वस्त्र एवं परिधान उद्योग
- आयात शुल्क समाप्त होने से भारतीय वस्त्र एवं परिधान अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
- तिरुप्पुर (तमिलनाडु) जैसे विनिर्माण केंद्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
- चमड़ा एवं जूता उद्योग: शुल्क-मुक्त पहुँच से भारत के चमड़ा उद्योग, विशेषकर आगरा जैसे औद्योगिक समूहों के निर्यात में वृद्धि होगी।
- समुद्री उत्पाद: समुद्री उत्पादों को यूनाइटेड किंगडम के बाज़ार तक आसान पहुँच मिलेगी, जिससे मत्स्य क्षेत्र की आय बढ़ेगी।
- प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ:आयात लागत घटने से भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
- वाहन कलपुर्जे एवं अभियांत्रिकी उत्पाद: शुल्क में कमी से अभियांत्रिकी तथा वाहन कलपुर्जा उद्योग के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
औषधि क्षेत्र के लिए अवसर
- भारत विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है।
- यूनाइटेड किंगडम प्रतिवर्ष लगभग 30 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की औषधियों का आयात करता है।
- यह समझौता भारतीय औषधि उद्योग को बेहतर बाज़ार पहुँच प्रदान करेगा।
- इससे भारतीय कंपनियाँ अमेरिका और यूरोप के आपूर्तिकर्ताओं के प्रभुत्व को चुनौती दे सकेंगी।
सामाजिक सुरक्षा समझौता
- पहले की स्थिति
- यूनाइटेड किंगडम में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय पेशेवरों को भारत और यूनाइटेड किंगडम—दोनों देशों की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में अंशदान देना पड़ता था।
- अधिकांश पेशेवर पात्रता अवधि पूरी होने से पहले भारत लौट आते थे, जिससे उन्हें आर्थिक हानि होती थी।
- नई व्यवस्था
- पात्र भारतीय पेशेवरों को अब दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान से छूट मिलेगी।
- यह छूट प्रारंभिक रूप से पाँच वर्षों के लिए प्रदान की गई है।
- संभावित लाभ
- लगभग 75,000 भारतीय पेशेवरों तथा 900 कंपनियों को इसका लाभ मिलेगा।
- सामाजिक सुरक्षा अंशदान में फँसने वाले लगभग 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर प्रतिवर्ष की बचत होगी।
भारत द्वारा दी गई रियायतें
- ब्रिटिश मोटर वाहन
- भारत चरणबद्ध तरीके से ब्रिटिश मोटर वाहनों पर आयात शुल्क को लगभग 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करेगा।
- आयात कोटा और चरणबद्ध व्यवस्था के माध्यम से घरेलू उद्योग की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
- स्कॉच व्हिस्की
- स्कॉच व्हिस्की पर सीमा शुल्क लगभग 150 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा।
- यह कमी चरणबद्ध तरीके से लागू होगी, जिससे घरेलू उद्योग को अनुकूलन का समय मिलेगा।
आयात में वृद्धि भारत के लिए कैसे लाभदायक हो सकती है?
- प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा:
- विदेशी प्रतिस्पर्धा से भारतीय उद्योगों को गुणवत्ता, दक्षता और नवाचार में सुधार करने की प्रेरणा मिलेगी।
- उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद और अधिक प्रतिस्पर्धी मूल्य प्राप्त होंगे।
- औद्योगिक आधुनिकीकरण: अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से उद्योगों को निम्न क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा—
- अनुसंधान एवं विकास
- उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकी
- उत्पाद नवाचार
- उत्पादकता में वृद्धि
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1991 के उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के सुधारों के बाद बढ़ी प्रतिस्पर्धा ने भारतीय वाहन उद्योग, विशेषकर मारुति, को बेहतर तकनीक अपनाने और उत्पाद गुणवत्ता में सुधार करने के लिए प्रेरित किया।
आर्थिक महत्त्व
- निर्यात में वृद्धि: शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच से भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा।
- रोजगार सृजन: वस्त्र, चमड़ा, अभियांत्रिकी, खाद्य प्रसंस्करण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
- विदेशी मुद्रा अर्जन: निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा तथा व्यापार संतुलन में सुधार आएगा।
- वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकरण: यह समझौता भारत को वैश्विक उत्पादन एवं आपूर्ति शृंखलाओं में अधिक प्रभावी भागीदारी का अवसर प्रदान करेगा।
- व्यापार सुगमता में सुधार: व्यापारिक बाधाएँ कम होने से सीमा-पार व्यापार सरल होगा और दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
भारत के लिए महत्त्व
- भारत और यूनाइटेड किंगडम के सामरिक आर्थिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
- वैश्विक व्यापार एवं आपूर्ति शृंखलाओं में भारत की भूमिका को मजबूत बनाएगा।
- विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के निर्यात अवसरों का विस्तार करेगा।
- व्यापार-आधारित आर्थिक विकास के माध्यम से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को गति प्रदान करेगा।
- विश्वसनीय वैश्विक व्यापारिक साझेदार के रूप में भारत की प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करेगा।
चुनौतियाँ
- समझौते का लाभ समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
- प्रशासनिक विलंब तथा जटिल अनुपालन प्रक्रियाएँ इसकी प्रभावशीलता को कम कर सकती हैं।
- कुछ घरेलू उद्योगों को ब्रिटिश उत्पादों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
- घरेलू उद्योगों की सुरक्षा हेतु उपयुक्त संरक्षण उपाय तथा चरणबद्ध शुल्क कटौती आवश्यक होगी।
- भारतीय निर्यातकों को गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा श्रम मानकों से संबंधित यूनाइटेड किंगडम के कठोर मानकों का निरंतर पालन करना होगा।
आगे की राह
- निर्यातकों के मध्य समझौते के प्रावधानों और नए बाज़ार अवसरों के बारे में व्यापक जागरूकता बढ़ाई जाए।
- सीमा शुल्क एवं नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए।
- आधारभूत संरचना, रसद व्यवस्था तथा तकनीकी उन्नयन के माध्यम से निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जाए।
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुपालन में सहायता प्रदान की जाए।
- मूल्य संवर्धित विनिर्माण को प्रोत्साहित कर शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच का अधिकतम लाभ उठाया जाए।
- विभिन्न क्षेत्रों में समझौते के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी कर समय पर नीतिगत सहयोग प्रदान किया जाए।
मुख्य परीक्षा आधारित प्रश्न :
प्रश्न : भारत द्वारा क्षेत्रीय व्यापार समूहों में किए गए समझौतों की तुलना में द्विपक्षीय व्यापार समझौतों को अधिक प्राथमिकता दिए जाने के कारणों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(12.5 अंक, 200 शब्द)
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