भारत का हरित/ग्रीन अमोनिया मार्ग के माध्यम से ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तन

भारत का हरित/ग्रीन अमोनिया मार्ग के माध्यम से ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तन 24 Feb 2026

संदर्भ:

भारत स्वच्छ ऊर्जा परिदृश्य की ओर सक्रिय रूप से अग्रसर है और ग्रीन अमोनिया को प्राथमिकता दे रहा है। यह परिवर्तन पर्यावरणीय, आर्थिक तथा कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है।

मूलभूत अवधारणाएँ और ग्रे से ग्रीन की ओर बदलाव

  • अमोनिया (NH): अमोनिया (NH₃) एक नाइट्रोजन परमाणु और तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से मिलकर बना यौगिक है। इसका उपयोग व्यापक स्तर पर उर्वरकों (विशेषकर यूरिया) के निर्माण में किया जाता है। उच्च हाइड्रोजन तथा भंडारण एवं परिवहन की सरलता के कारण यह स्वच्छ ऊर्जा वाहक और संभावित समुद्री ईंधन के रूप में भी तेजी से महत्व प्राप्त कर रहा है।
  • ग्रे अमोनिया: ग्रे अमोनिया का उत्पादन हैबर–बॉश प्रक्रिया (Haber–Bosch process) के माध्यम से किया जाता है, जिसमें वायुमंडल से प्राप्त नाइट्रोजन को प्राकृतिक गैस से प्राप्त हाइड्रोजन के साथ संयोजित किया जाता है।
    • जीवाश्म ईंधन आधारित हाइड्रोजन के उपयोग के कारण इसका उत्पादन अत्यधिक कार्बन-गहन और उत्सर्जन-प्रधान होता है।
  • ग्रीन अमोनिया: ग्रीन अमोनिया का निर्माण भी हेबर–बॉश प्रक्रिया (Haber–Bosch process) से ही किया जाता है, लेकिन इसमें प्रयुक्त हाइड्रोजन “ग्रीन हाइड्रोजन” होता है।
    • ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन सौर या पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके जल के विद्युत अपघटन (इलेक्ट्रोलिसिस) की प्रक्रिया द्वारा किया जाता है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया के दौरान लगभग शून्य कार्बन उत्सर्जन होता है।
  • परिवर्तन का महत्व: ग्रे अमोनिया से ग्रीन अमोनिया की ओर संक्रमण ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाता है, जीवाश्म ईंधन और प्राकृतिक गैस आयात पर निर्भरता घटाता है, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है, और जलवायु प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाता है, साथ ही उर्वरक और औद्योगिक मांग को पूरा करता है।

रणनीतिक परिप्रेक्ष्य और सरकारी मिशन

  • ऊर्जा आत्मनिर्भरता: जनवरी 2026 में सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज करने और आयात निर्भरता कम करने हेतु लगभग 500 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान प्रस्तुत किया।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: जहाँ यूरोपीय संघ और दक्षिण कोरिया आयात निविदाओं और पोर्टफोलियो मानकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, वहीं भारत ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के माध्यम से एक विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाया है।
  • ‘द साइट इनिशिएटिव’ (The Sight Initiative): राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत, भारत ने “हरित हाइड्रोजन संक्रमण के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप कार्यक्रम(Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition – SIGHT)” कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य वित्तीय प्रोत्साहन देकर हरित हाइड्रोजन तथा उसके उत्पादों (जैसे ग्रीन अमोनिया) के घरेलू विनिर्माण, उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देना है।

SECI निविदा और आर्थिक व्यवहार्यता

  • थोक खरीद: सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने जून 2024 में 13 घरेलू उर्वरक संयंत्रों के लिए प्रतिवर्ष 7,24,000 टन ग्रीन अमोनिया खरीदने की निविदा जारी की।
  • प्रतिस्पर्धी मूल्य: अगस्त 2025 में पूर्ण हुई इस निविदा में प्राप्त दरें यूरोपीय संघ की खरीद दरों से 40–50% कम थीं।
  • मूल्य समर्थन तंत्र: सरकारी प्रोत्साहन (पहले वर्ष ₹8.82 प्रति किलोग्राम से प्रारंभ) तथा 10-वर्षीय निश्चित मूल्य गारंटी वाले ऑफ-टेक समझौतों ने ग्रीन अमोनिया के उत्पादन लागत को लगभग 572–704 डॉलर प्रति टन तक सीमित कर दिया है।
  • व्यावसायिक व्यवहार्यता: इससे ग्रे अमोनिया (लगभग $515 प्रति टन) के साथ लागत का अंतर काफी हद तक कम हो जाता है, जिससे ग्रीन अमोनिया एक तेजी से प्रतिस्पर्धी और वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य विकल्प बनता जा रहा है।

रणनीतिक और भू-राजनीतिक लाभ

  • निर्यात क्षमता: SECI ने तटीय क्षेत्रों के पास वितरण केंद्रों की पूर्व-पहचान कर ली है, जिससे ग्रीन अमोनिया का समुद्री मार्ग से परिवहन और निर्यात करना सुगम होगा।
  • आयात निर्भरता में कमी: नए अनुबंध भारत के वर्त्तमान अमोनिया आयात का लगभग 30% कवर करेंगे, जिससे वैश्विक गैस कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशीलता कम होगी।
  • जोखिम न्यूनीकरण: स्वदेशी उत्पादन से डॉलर विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से जुड़ा जोखिम कम होगा तथा युद्ध जैसे भू-राजनीतिक व्यवधानों के समय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

ग्रीन अमोनिया के विस्तार में विद्यमान चुनौतियाँ

  • भंडारण आवश्यकताएँ: चूँकि हाइड्रोजन उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भर है, इसलिए निरंतर उत्पादन हेतु पर्याप्त भंडारण अवसंरचना आवश्यक है, विशेषकर तब जब सौर या पवन ऊर्जा उपलब्ध न हो।
  • सुरक्षा और मानक: अमोनिया की विषैली प्रकृति को देखते हुए भारत को सुदृढ़ सुरक्षा नियम और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
  • वित्तपोषण: व्यापक पैमाने पर उत्पादन के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से पर्याप्त पूँजी निवेश की आवश्यकता होती है।
    • निवेशक विश्वास बनाए रखने के लिए जोखिम न्यूनीकरण तंत्र तथा नीतिगत स्थिरता आवश्यक हैं।

निष्कर्ष

ग्रीन अमोनिया की पूर्ण क्षमता को साकार करने के लिए निरंतर नीतिगत समर्थन, तकनीकी प्रगति, और मजबूत नियामक ढाँचे अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत भारत की ग्रीन अमोनिया नीलामियाँ वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा बाज़ारों को पुनर्संरचित कर सकती हैं। अपनाने की प्रक्रिया को तीव्र करने में समेकित खरीद (Aggregated Procurement) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए और भारत की नेतृत्वकारी स्थिति बनाए रखने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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